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'ख़ुफ़िया ब्यूरो ने चेतावनी दी थी'
 

 
 
जयपुर के धमाकों से ख़ुफ़िया एजेंसियों की भूमिका पर सवाल उठे हैं
जब मोहम्मद जलालुद्दीन उर्फ़ बाबू भाई को लखनऊ में गिरफ़्तार किया गया तो पूछताछ करने वाले अधिकारियों से उन्होंने कहा था कि 'जयपुर उनके मुख्य निशानों में एक था'.

जलालुद्दीन से पूछताछ करने वाले अधिकारियों में शामिल भारतीय ख़ुफिया एजेंसी (आईबी) के एक संयुक्त निदेशक ने बीबीसी को बताया, "मुझे अच्छी तरह याद है कि उसने दो शहरों का नाम लिया, एक तो तीर्थनगर हरिद्वार और दूसरा जयपुर, ये दोनों शहर उनके निशाने पर थे."

जलालुद्दीन पर आरोप है कि वह बांग्लादेशी चरमपंथी संगठन हरकत-उल-जिहाद-अल-इस्लामी का भारतीय कमांडर है.

अधिकारियों का कहना है कि जलालुद्दीन पश्चिम बंगाल का रहने वाला है उसने 1999 में बांग्लादेश में ट्रेनिंग ली है.

 ख़ुफिया एजेंसी शायद ही कभी सुरागों की पूरी तफ़्तीश करती हैं, लेकिन जब जयपुर जैसी घटनाएँ होती हैं तो अधिकारी अपनी नौकरी बचाने के लिए पुरानी फ़ाइलें दिखाने लगते हैं
 
पूर्व ख़ुफ़िया अधिकारी

ख़ुफ़िया अफ़सरों का कहना है कि जुलाई 2006 में मुंबई में हुए धमाकों की ज़िम्मेदारी ज़लालुद्दीन ने स्वीकार की थी, मुंबई के बम धमाकों में 187 लोग मारे गए थे.

अपना नाम ज़ाहिर न करने की शर्त पर आईबी के संयुक्त निदेशक ने बीबीसी से बातचीत की है.

इस अधिकारी ने कहा, "जलालुद्दीन ने हमें बताया कि बांग्लादेशी नागरिक जहाँगीर ने मुंबई के धमाकों के लिए विस्फोटक उपलब्ध कराया था."

जलालुद्दीन के इक़बालिया बयान के आधार पर खुफिया ब्यूरो ने संबंधित अधिकारियों को आगाह किया था कि जयपुर चरमपंथियों के निशाने पर है.

इसके कई महीनों बाद तक कुछ नहीं हुआ और ख़ुफिया ब्यूरो की चेतावनी भुला दी गई.

भारत की प्रमुख अंतरराष्ट्रीय ख़ुफ़िया एजेंसी रॉ के पूर्व उप निदेशक विभूति भूषण नंदी कहते हैं, "भारत में इंटेलिजेंस का यही हाल है, इक़बालिया बयान के आधार पर या किसी एजेंट की रिपोर्ट के आधार पर जब कोई चेतावनी जारी की जाती है और कुछ समय की शांति रहती है तो लोग सब भूल जाते हैं."

नंदी कहते हैं, "ख़ुफिया एजेंसी शायद ही कभी सुरागों की पूरी तफ़्तीश करती हैं, लेकिन जब जयपुर जैसी घटनाएँ होती हैं तो अधिकारी अपनी नौकरी बचाने के लिए पुरानी फ़ाइलें दिखाने लगते हैं."

भारतीय अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ समय में हुए सभी धमाकों के तार बांग्लादेश से जुड़े पाए गए हैं.

'विदेशी हाथ'

नंदी कहते हैं, "इन धमाकों के मास्टर माइंड बांग्लादेशी नागरिक थे, विस्फोट भी वहीं से लाए गए थे, जयपुर का मामला भी ऐसा ही हो सकता है. हुजी और लश्कर के ढेर सारे चरमपंथी भारत के विभिन्न हिस्सों में आम नागरिकों की तरह रह रहे हैं और बाहर से निर्देश मिलने पर कभी भी हमला कर सकते हैं."

 दक्षिणपंथी हिंदुत्व का बढ़ते प्रभाव और बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद से मुसलमान समाज की मुख्यधारा से दूर होते गए, इसके बाद गुजरात के दंगे जैसी घटनाओं से चरमपंथियों का काम आसान हो गया
 
प्रदीप बोस

बांग्लादेश सरकार का कहना है कि वह हुजी के खिलाफ़ कड़ी कार्रवाई कर रही है, 2005 में संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया गया और उसके नेता जेल में बंद हैं.

कोलकाता स्थित सेंटर फॉर स्टडी इन सोशल साइंसेज़ के प्रदीप बोस कहते हैं, "दक्षिणपंथी हिंदुत्व का बढ़ते प्रभाव और बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद से मुसलमान समाज की मुख्यधारा से दूर होते गए, इसके बाद गुजरात के दंगे जैसी घटनाओं से चरमपंथियों का काम आसान हो गया."

बोस कहते हैं, "हमने ये समस्याएँ खुद खड़ी की हैं, विदेशी हाथ की बात करना बेमानी है."

आईबी के पूर्व संयुक्त निदेशक अमिय सामंता कहते हैं, "जब तक हम अपनी ख़ुफ़िया प्रणाली को आधुनिक नहीं बनाते और हम आतंकवाद से नहीं लड़ सकते, हमें ख़ुफिया प्रणाली को भी जवाबदेह बनाना होगा."

 
 
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