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रविवार, 25 मई, 2008 को 04:11 GMT तक के समाचार
 
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कर्नाटक में खिला कमल
 
कर्नाटक विधानसभा
पिछली बार त्रिशंकु विधानसभा होने के कारण राजनीतिक अस्थिरता बनी रही
त्रिशंकु विधानसभा की अटकलों और कयासों के बीच कर्नाटक विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है.

सभी 224 सीटों के परिणाम घोषित किए जा चुके हैं. इसमें से भारतीय जनता पार्टी को 110 सीटों, कांग्रेस को 80 सीटों, जनता दल (सेक्युलर) को 28, निर्दलीय प्रत्याशियों को छह सीटों पर जीत हासिल हुई है.

कर्नाटक चुनाव 2008
भाजपा- 110 सीटें
कांग्रेस-80 सीटें
जनदा दल (सेक्युलर)- 28
अन्य- छह

बहुमत के लिए किसी भी पार्टी को 113 सीटों की ज़रूरत है. पिछली बार के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 79 सीटें मिली थीं.

कांग्रेस को भी 2004 के मुकाबले ज़्यादा सीटें मिली हैं लेकिन उसके कई बड़े नेता हार गए जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री धर्म सिंह भी शामिल हैं.

रविवार सुबह कर्नाटक विधानसभा चुनावों की मतगणना का काम शुरू होने के कुछ देर बाद ही भाजपा की बढ़त का अंदाज़ा मिलने लगा था.

चौंकानेवाले परिणाम

चुनावों से ठीक पहले तक अधिकतर जानकारों की राय थी कि किसी भी दल को सौ सीटों पर भी जीत हासिल नहीं होगी और विधानसभा त्रिशंकु होगी.

भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह
 कर्नाटक में कांग्रेस को लोगों ने नकार दिया है और भारतीय जनता पार्टी को एक बेहतर शासन देने वाले विकल्प के रूप में चुना है
 

माना जा रहा था कि ऐसे में देवेगौड़ा की पार्टी यानी जनता दल सेक्युलर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और उसी से अगली सरकार का भविष्य तय होगा.

सबसे ज़्यादा नुकसान देवेगौड़ा की पार्टी को ही हुआ है.पिछले चुनावों में 58 सीटों के साथ सत्ता के समीकरण तय करनेवाली यह पार्टी इस बार कई सीटें हार गई है. उसे केवल 28 सीटें मिली हैं.

परिणामों के आने के बाद से ही भाजपा के खेमे में जश्न का माहौल है. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने दिल्ली में पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा है कि कर्नाटक में जनादेश स्पष्ट तौर पर यूपीए के कमज़ोर होने का प्रमाण दे रहा है.

उन्होंने कहा कि कर्नाटक में कांग्रेस को लोगों ने नकार दिया है और भारतीय जनता पार्टी को एक बेहतर शासन देने वाले विकल्प के रूप में चुना है.

विधानसभा चुनाव

एसएम कृष्णा
राजभवन छोड़कर सक्रिय राजनीति में लौटे कृष्णा को बहुत उम्मीदें थीं

224 विधानसभा क्षेत्रों के लिए दो हज़ार से ज़्यादा उम्मीदवारों ने अपना भाग्य आज़माया था.

जहाँ कांग्रेस ने 222 जगहों से पर्चे भरे थे, भाजपा उम्मीदवारों ने सभी 224 सीटों के लिए और जेडीएस ने 219 जगहों से अपने पर्चे दाखिल किए थे.

भाजपा के लिए कर्नाटक इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहीं से उसे दक्षिण भारत में अपना परचम लहराता हुआ दिख रहा है.

याद रहे कि 2004 विधानसभा के चुनाव में जहां भाजपा 79 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी.

पिछली विधानसभा में 58 सीटों के साथ जेडीएस ने पहले कांग्रेस से हाथ मिलाया और बाद में भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाई.

दोनों ही पार्टियों के बीच हुए समझौते के मुताबिक़ जेडीएस नेता और देवगौड़ा के पुत्र कुमारस्वामी को एक निश्चित समय के बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी भाजपा के येदुरप्पा के लिए खाली करनी थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया और सत्ता की इस लड़ाई में किसी का भी भला नहीं हो सका.

भाजपा ने येदुरप्पा के साथ हुई जेडीएस की कथित धोखेबाज़ी को अपना हथियार बनाया लेकिन कांग्रेस की इस बात पर आलोचना होती रही कि विभिन्न गुटों में बँटी पार्टी कभी भी भाजपा और जेडीएस के बीच चले सत्ता संघर्ष जैसे मज़बूत मुद्दे को जनता के समक्ष नहीं ले जा पाई.

 
 
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