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शुक्रवार, 11 जुलाई, 2008 को 12:11 GMT तक के समाचार
 
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राजेश तलवार को ज़मानत मिली
 
आरुषि
सीबीआई ने 13 मई को कंपाउंडर कृष्णा को गिरफ़्तार किया था
दिल्ली के क़रीब नोएडा के बहुचर्चित आरुषि-हेमराज हत्याकांड में केंद्रीय जाँच एजेंसी (सीबीआई) ने अपनी जाँच में कहा है कि उसे आरुषि के पिता राजेश तलवार के ख़िलाफ़ कोई सबूत नहीं मिले हैं.

इसके बाद ग़ाज़ियाबाद में सीबीआई की विशेष अदालत ने राजेश तलवार को दस लाख रुपए के मुचलके पर ज़मानत दे दी.

शुक्रवार को सीबीआई ने दिल्ली में एक प्रेस कांफ़्रेस में संयुक्त निदेशक अरुण कुमार ने बताया, "नोएडा पुलिस की केस डायरी के मुताबिक जब डॉक्टर राजेश तलवार को गिरफ़्तार किया गया था, उस समय नोएडा पुलिस के पास उनके ख़िलाफ़ कोई सबूत नहीं था और फ़िलहाल सीबीआई ने भी ऐसा ही पाया है."

सीबीआई अधीकारी ने दावा किया कि अब तक हुई मनोवैज्ञानिक और फ़ॉरेंसिक तहकीकात के बाद वे इस नतीजे पर पहुँचे हैं कि हत्याकांड को तलवार के कंपाउंडर कृष्णा, तलवार परिवार की जानकार अनीता दुर्रानी के नौकर राजकुमार और एक अन्य नौकर विजय मंडल ने मिलकर अंजाम दिया.

इस साल सोलह मई की सुबह 14 साल की आरुषि अपने माता-पिता के फ़्लैट में मृत पाई गई थीं. शुरुआती जाँच में उत्तर प्रदेश पुलिस ने उस घर के नौकर हेमराज पर हत्या का आरोप लगाया था.

लेकिन जब हेमराज का शव भी बाद में छत पर मिला तो पुलिस ने एक प्रेस कॉंफ़्रेस कर आरुषि की हत्या के लिए उसके पिता डॉक्टर राजेश तलवार को मुख्य अभियुक्त बताया और उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया.

 नोएडा पुलिस की केस डायरी के मुताबिक जब डॉक्टर राजेश तलवार को गिरफ़्तार किया गया था, उस समय नोएडा पुलिस के पास उनके ख़िलाफ़ कोई सबूत नहीं था और फ़िलहाल सीबीआई ने भी ऐसा ही पाया है
 
संयुक्त निदेशक अरुण कुमार

लेकिन परिवार की माँग पर उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने एक संवाददाता सम्मेलन में घोषणा की कि वे परिवार की इच्छानुसार इस मामले को सीबीआई को सौंप रही हैं.

'मामला सुलझाया नहीं गया'

आरुषि-हेमराज हत्याकांड की जाँच कर रहे सीबीआई के संयुक्त निदेशक अरुण कुमार ने इस बात पर बार-बार बल दिया कि मामला अभी सुलझाया नहीं जा सका है और ना ही वो किसी निष्कर्ष पर पहुंचे हैं.

अरुण कुमार ने कहा कि सीबीआई ने राजेश तलवार और उनकी पत्नी नूपुर तलवार पर लाई-डिटेक्शन टेस्ट किए यानि यह पता लगाने के टेस्ट किए कि कहीं वो झूठ तो नहीं बोल रहे. सीबीआई ने इन टेस्ट में पाया कि उनके झूठ बोलने का कोई सबूत नहीं है.

अरुण कुमार के अनुसार 16 मई की रात हत्या से दो दिन पहले, राजेश तलवार ने अपने कंपाउँडर कृष्णा को डांटा था जिससे वो नाराज़ था.

जाँच एजेंसी को कृष्णा और राजकुमार के लाई-डिटेक्ट्शन टेस्ट में उनके झूठ बोलने के सबूत मिले और सीबीआई के अनुसार इन दोनों ने नार्को एनेलिसिस टेस्ट के दौरान आरुषि और हेमराज की हत्या करने की बात स्वीकार की.

सीबीआई का मानना है कि इस अपराध में राजेश तलवार के एक पड़ौसी का नौकर विजय मंडल भी शामिल था और उसे भी ग़िरफ्तार कर लिया गया है.

आरुषि
सीबीआई के अनुसार हत्याकांड में कंपाउंडर कृष्णा, अनीता दुर्रानी का नौकर राजकुमार और एक अन्य नौकर विजय मंडल शामिल थे

'जानबूझकर गुमराह किया'

जाँच एजेंसी के अनुसार कृष्णा ने जानबूझकर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की ताकि शक़ आरुषि के पिता राजेश तलवार पर जाए.

मगर सीबीआई के संयुक्त निदेशक अरुण कुमार ने इस बात पर भी बल दिया कि जो बातें वो बता रहे हैं वो मुख्य अभियुक्त कृष्णा और राजकुमार के नार्को एनालिसिस जांच पर आधारित हैं, हालाँकि उन्हें इन बयानों को साबित करने वाले असल सबूत नहीं मिले हैं.

आरुषि की हत्या के लिए खुखरी का इस्तेमाल किया गया होगा. मगर सीबीआई को ना तो अभी तक यह हथियार मिल पाया है ना ही आरुषि और हेमराज के मोबाईल फ़ोन.

 
 
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