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शुक्रवार, 29 अगस्त, 2008 को 02:30 GMT तक के समाचार

हिंसा के विरोध में ईसाई स्कूल-कॉलेज बंद

उड़ीसा में प्रशासन ने दावा किया है कि कंधमाल ज़िले में हिंसा की स्थिति में कुछ सुधार हुआ है और वहाँ गुरुवार को कर्फ़्यू में कुछ देर के लिए थोड़ी ढील दी गई.

लेकिन टीकाबाली और जी उदयगिरी से फिर हिंसा की ख़बरें मिली हैं.

इस बीच भारत में कैथोलिक बिशपों की सर्वोच्च संस्था ने शुक्रवार को देश भर के कैथोलिक ईसाई स्कूलों को बंद रखने और हिंसा के विरोध में शांतिपूर्ण रैलियाँ आयोजित करने की घोषणा की है.

पोप पहले ही इस हिंसा की निंदा कर चुके हैं. इस बीच इटली सरकार ने भी इस हिंसा की निंदा करते हुए तत्काल क़दम उठाए जाने की माँग की है.

शनिवार से जारी हिंसा में कंधमाल और गजपति ज़िलों में 11 लोग मारे जा चुके हैं. हालांकि कैथोलिक ईसाइयों का कहना है कि उनकी जानकारी के अनुसार 13 लोगों की जानें जा चुकी है.

स्कूल बंद

भारत में कैथोलिक बिशपों की सर्वोच्च संस्था कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ़्रेंस ने घोषणा की है कि उड़ीसा में हुई हिंसा के विरोध में देश भर के कैथोलिक ईसाई स्कूल और कॉलेज बंद रखे जाएँगे.

यह संस्था देश भर में 25 हज़ार स्कूल और कॉलेज चलाती है.

संस्था ने कहा है कि हिंसा का विरोध करते हुए देश भर में शांतिपूर्ण रैलियाँ भी आयोजित की जाएँगीं.

ईसाइयों को सर्वोच्च धर्मगुरु पोप बेनेडिक्ट ने बुधवार को उड़ीसा में हिंदूओं और इसाइयों को बीच जारी हिंसा की घटनाओं की भर्त्सना की थी.

वैटिकन में अपने साप्ताहिक संबोधन में पोप ने कहा था कि वे इस घटना से 'अत्यधिक दुखी' हैं. उन्होंने दोनों समुदायों से 'शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व' बहाल करने की अपील की थी.

इसके बाद गुरुवार को इटली की सरकार ने इस हिंसा का विरोध किया है.

इटली की सरकार ने कहा है कि वह भारतीय राजदूत को तलब कर उड़ीसा में ईसाइयों पर हमले रोकने की माँग करेगा.

गुरुवार को इटली सरकार की कैबिनेट की बैठक में ये फ़ैसला किया गया.

'स्थिति नियंत्रण में'

उड़ीसा में राज्य प्रशासन ने दावा किया है कि कंधमाल ज़िले में स्थिति में सुधार हुआ है.

गुरुवार को कंधमाल में ज़िले के कई ब्लॉक में कर्फ़्य़ू में ढील दी गई जिससे कि लोग ज़रुरत का सामान ख़रीद सकें.

लेकिन आसपास के ज़िलों से हिंसा की ख़बरें मिली हैं.

लेकिन इस बीच कंधमाल और आसपास के आठ नगरों में तनाव क़ायम है और कर्फ़्यू जारी है.

विश्व हिंदू परिषद के नेता स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या के बाद शनिवार से ही हिंसा शुरु हो गई थी.

सोमवार को विहिप के बुलाए बंद के बाद ईसाइयों के ख़िलाफ़ ख़ासी हिंसा हुई थी और कई गिरिजाघरों को आग लगा दी गई थी.

उड़ीसा में ईसाइयों पर पहले भी हमले होते रहे हैं.

22 जनवरी 1999 को ऑस्ट्रेलियाई ईसाई मिशनरी ग्राहम स्टेन्स और उनके दो बेटों के आग में झुलसे हुए शव क्योंझर के मनोहपुर गाँव में उनकी जीप में पाए गए थे.