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शुक्रवार, 03 अक्तूबर, 2008 को 09:08 GMT तक के समाचार
 
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कंधमाल:'बलात्कार' मामले में कार्रवाई
 

 
 
कंधमाल में सुरक्षाकर्मी (फ़ाइल फ़ोटो)
उड़ीसा में पिछले दिनों में ईसाई धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया गया
उड़ीसा के कंधमाल ज़िले में ईसाइयों के ख़िलाफ़ जारी हिंसा की घटनाएँ थम नहीं रही हैं. जहाँ सांप्रदायिक हिंसा में अब तक 33 लोग मारे गए हैं वहीं गुरुवार को ताज़ा घटनाओं में 20 से ज़्यादा घरों को जला दिया गया.

उधर हिंसाग्रस्त कंधमाल ज़िले में पुलिस ने ऐसे मामलों में उदासीन रवैया दिखाते हुए एक ईसाई नन के साथ हुई कथित बलात्कार की घटना के 38 दिनों के बाद मामले में कार्रवाई की है.

ज़िले के पुलिस प्रमुख प्रवीण कुमार के अनुसार कथित बलात्कार के मामले में चार लोगों को गिरफ़्तार किया गया है और कम से कम एक पुलिस अधिकारी को निलंबित किया गया है.

राज्य में सांप्रदायिक टकराव के कारण सैकड़ों लोग बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं. कई लोगों के घर जला दिए गए हैं और सैकड़ों लोगों को नुकसान उठाना पड़ा है.

पुलिस ने मजबूरी जताई

कंधमाल ज़िले के कांजेमंडी गाँव में दिव्यज्योति पेस्टोरल सेंटर में काम करने वाली 29 वर्षीय नन के साथ 25 अगस्त को कथित बलात्कार का मामला सामने आया है.

चौंकाने वाली बात यह है कि स्थानीय पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज होने और उनका मेडिकल टेस्ट होने के बावजूद पुलिस ने ये रिपोर्ट ही चिकित्सकों से नहीं ली.

 मैं क़ानून और व्यवस्था कायम करने में जुटा हुआ था. मेरे पास केवल एक सब-इंस्पेक्टर और 13 जवान हैं. मेरे लिए क़ानून और व्यवस्था कायम करना पहली प्राथमिकता है
 
थाना प्रभारी नारायण राव

पुलिस थाने में दर्ज रिपोर्ट के मुताबिक कंधमाल में ईसाइयों के ख़िलाफ़ हिंसा भड़कने के बाद इस नन और 55-वर्षीय फ़ादर थॉमस ने एक स्थानीय हिंदू के घर में शरण ले रखी थी.

रिपोर्ट के अनुसार लेकिन उस दिन इन दोनों को उस हिंदू के घर से घसीट कर बाहर निकाला गया और एक घर में उनसे कथित बलात्कार हुआ, जिसके बाद उन्हें सड़क पर नग्न अवस्था में चलने पर मजबूर किया गया.

पीड़ित महिला का मेडिकल टेस्ट करने वाली डॉक्टर संगीता मिश्र ने इस बाद की पुष्टि की कि नन का बलात्कार हुआ. उनका कहना था, "हमने मेडिकल टेस्ट के तत्काल बाद पुलिस को सूचना दी थी लेकिन वे मेडिकल रिपोर्ट लेने ही नहीं पहुँचे."

पुलिस मीडिया में इस बारे में रिपोर्टें छपने और घटना के 38 दिन बाद हरकत में आई.

बालिगुडा पुलिस थाने के अधिकारी के नारायण राव ने इस देरी को यह कहते हुए टाल दिया कि क़ानून और व्यवस्था की स्थिति से निपटने और कर्मचारियों की कमी के कारण ऐसा हुआ.

आगज़नी (फ़ाइल फोटो)
कंधमाल में गिरजाघरों को दंगाइयों ने निशाना बनाया

राव ने मीडिया को बताया, "मैं क़ानून और व्यवस्था कायम करने में जुटा हुआ था. मेरे पास केवल एक सब-इंस्पेक्टर और 13 जवान हैं. मेरे लिए क़ानून और व्यवस्था कायम करना पहली प्राथमिकता है."

कंधमाल के पुलिस प्रमुख प्रवीण कुमार का कहना था, "नन के इस क्षेत्र में न होने के कारण जाँच में अड़चने आ रही हैं. लेकिन हम कार्रवाई कर रहे हैं और दोषियों के सज़ा दिलाई जाएगी."

हिंसा जारी

कंधमाल की सीमा से सटे बौध ज़िले में गुरुवार को 20 से 25 घरों में आग लगा दी गई.

मंगलवार को कंधमाल में भड़की हिंसा में घायल हुए लोगों में से एक और व्यक्ति की गुरुवार को मौत हो गई.

मंगलवार को ज़िले के रुदांगिया गाँव में दो गुटों के बीच हुए सशस्त्र संघर्ष में एक महिला की मौत हो गई थी और कम से कम आठ अन्य लोग घायल हो गए थे.

राज्य सरकार लगातार दावा कर रही है कि हिंसा को रोकने के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं और स्थिति बदली है.

हिंसा प्रभावित इलाक़ों में लगातार पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती बढ़ाई जा रही है. गुरुवार को केंद्र सरकार की ओर से भेजे गए अर्धसैनिक बलों के 200 और जवान भुवनेश्वर पहुँच गए हैं. वे शुक्रवार को कंधमाल पहुँचेंगे.

प्रभावित इलाक़ों में पहले से ही 4500 से अधिक अर्धसैनिक बल तैनात हैं.

 
 
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