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शुक्रवार, 26 दिसंबर, 2008 को 11:45 GMT तक के समाचार

रेणु अगाल
बीबीसी संवाददाता, ढाका से

बांग्लादेश की राजनीतिक पार्टियों का ब्यौरा

बांग्लादेश में लोकतंत्र की वापसी दो साल के आपातकाल के बाद होने जा रही है. पिछले दो वर्षो से सेना के समर्थन वाली सरकार सत्तासीन थी.

पेश है बांग्लादेश की प्रमुख राजनीतिक दलों का ब्यौरा.

अवामी लीग

बांग्लादेश की इस सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी का गठन भारत और पाकिस्तान की स्वतंत्रता के एक साल बाद वर्ष 1948 में हुआ था.

अवामी लीग ने पाकिसतान में पश्चिम के उर्दू भाषी और वर्ष 1971 से पहले पूर्वी पाकिस्तान के बांग्ला भाषियों को समान अधिकार दिलाने की लड़ाई छेडी थी.

बाद के दिनों में इस लड़ाई ने स्वतंत्रता संग्राम का रूप ले लिया जिसके बाद दिसंबर 1971 में पूर्वी पाकिस्तान आज़ाद हुआ और बांग्लादेश ने जन्म लिया.

इस सब में भारत की अहम भूमिका रही. पार्टी की नेता शेख हसीना बांग्लादेश के संस्थापक और पहले राष्ट्रपति शेख़ मुजीबुर रहमान की बेटी हैं.

सैन्य तख़्ता पलट के बाद वर्ष 1975 में शेख मुजीब की हत्या कर दी गई. 61 वर्षीया हसीना वर्ष 1996 में प्रधानमंत्री बनी थी पर 2001 में अपनी मुखर प्रतिद्वंदी बेगम ख़ालिदा ज़िया से हार गईं.

अगस्त 2004 में उनपर जानलेवा हमला हुआ जिसमें वो बाल बाल बच गईं.

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने उन्हें भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ़्तार किया. फिर एक साल जेल कटने के बाद उन्हें स्वास्थ्य के आधार पर रिहा किया गया.

अब वे विज़न 2021 ले कर चौदह पार्टियों के महाजोत के साथ चुनाव में उतरी है. अब देखना ये है की वे अवामी लीग की नाव (चुनाव चिह्न) को किनारे पर लगा पाती है या नहीं.

वे समाजवादी नहीं, पर बाज़ार व्यवस्था में फलता फूलता, सभी पड़ोसी देशों के साथ मिल कर आगे बढ़ते बांग्लादेश की बात करती हैं.

बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी

पार्टी का गठन 1978 में मौजूदा नेता बेगम ख़ालिदा ज़िया के दिवंगत पति, बांग्लादेश के राष्ट्रपति जनरल ज़िया उर रहमान ने किया था.

जनरल ज़िया उर रहमान राष्ट्रवाद, मुस्लिम धार्मिक आस्थाओं और खुली बाज़ार व्यवस्था वाला बांग्लादेश देखना चाहते थे. उनकी हत्या के बाद ख़ालिदा ने 1981 में पार्टी की बागडोर संभाली और 1991 का चुनाव जीत कर देश की पहली महिला प्रधान मंत्री बनीं.

फिर अवामी लीग को हराकर वे 2001 में सत्ता में आई. 63 साल की ख़ालिदा ने दूसरी बार प्रधानमंत्री के रूप में बांग्लादेश पर अक्तूबर 2006 तक शासन किया.

उन्हे और उनके दो बेटों को भ्रष्टाचार विरोधी अभियान में सितंबर 2007 को गिरफ़्तार किया गया और जेल की एक साल सज़ा कटने के बाद ज़मानत पर रिहा किया गया.

जातीय पार्टी

जातीय पार्टी का गठन पूर्व सैनिक शासक लेफ्टिनेंट जनरल हुसैन मोहम्मद इरशाद ने 1985 में किया था. इरशाद ने सैन्य तख़्ता पलट कर सत्ता पर 1982 में अपना हक़ जमाया था.

विवादस्पद चुनावो में, 1986 में वे देश के राष्ट्रपति चुने गए. और उन्होने सेना से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने बांग्लादेश को इस्लामी देश में तब्दील किया हालाँकि संविधान के इस बदलाव को गंभीरता से लागू नहीं किया गया.

सभी को अपनी धर्मो का पालन करने की छूट थी. उन्होने 1990 तक देश पर शासन किया और फिर जनता के विद्रोह की वजह से वे सत्ता से दूर हुए. और जातीय पार्टी गठित की, जो इस चुनावों में अवामी लीग की गठबंधन का हिस्सा है.

जमात-ए- इस्लामी पार्टी

जमात-ए- इस्लामी पार्टी पहले पाकिस्तान की जमात-ए-इस्लामी का एक भाग थी. इस पार्टी पर आरोप है की इसने बांग्लादेश की आज़ादी के युद्ध में पाकिस्तान का साथ दिया था.

हालाँकि 1971 की लड़ाई में अपनी इस भूमिका से वो इनकार करती रही है. बांग्लादेश की स्वतंत्रता के बाद जमात पर प्रतिबंध लगा दिया गया था पर बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने बाद में इसे क़ानूनी दर्जा दिया और चुनावों में हिस्सा लेने दिया.

वर्ष 1991 के चुनावो में ख़ालिदा ज़िया की पार्टी के साथ चुनाव लड़ी और 2001 में उनकी सरकार में हिस्सेदार भी.

आज यह देश का सबसे बड़ी धार्मिक राजनीतिक दल है. 65 साल के मतीउर रहमान निज़ामी इसके नेता है और ख़ालिदा सरकार में मंत्री रहे चुके है.

निज़ामी को भी हाल में गिरफ़्तार और फिर रिहा किया गया था. पार्टी ग़रीब जनता से इस्लाम के नाम पर वोट मांग रही है और शरिया (इस्लामी धर्मिक क़ानून) लागू करने की बात कहती हैं.