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बुधवार, 11 मार्च, 2009 को 06:59 GMT तक के समाचार
 
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नवीन पटनायक ने साबित किया बहुमत
 
नवीन पटनायक
बीजेपी से गठबंधन टूटने के बाद बीजेडी ने वाम और दूसरे दलों से सहायता माँगी थी
उड़ीसा में बीजेडी सरकार के मुखिया नवीन पटनायक ने बुधवार को राज्य विधानसभा में अपना बहुमत साबित कर लिया है.

कांग्रेस के वॉकआउट के बाद ध्वनिमत से ही बहुमत का फ़ैसला हो गया.

गठबंधन टूटने के बाद बीजू जनतादल की सहयोगी रही भाजपा ने दावा किया था कि सरकार अल्पमत में आ गई है और राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा देना चाहिए.

इसके बाद राज्यपाल ने मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से विधानसभा में बहुमत साबित करने को कहा था.

उल्लेखनीय है कि लोकसभा और विधानसभा की सीटों की बँटवारे को लेकर असहमति के बाद भाजपा और बीजू जनतादल के बीच एक दशक पुराना गठबंधन टूट गया था.

इसके बाद नवीन पटनायक ने अकेले ही चुनाव में जाने की घोषणा कर दी थी.

'लोकतंत्र की हत्या'

भारतीय जनता पार्टी ने कहा है कि जिस तरह से नवीन पटनायक ने बहुमत जीता है वह लोकतंत्र की हत्या है.

गठबंधन टूटने से पहले बीजू जनतादल के साथ सीटों के बंटवारे के लिए बातचीत कर रहे भाजपा नेता चंदन मित्रा ने एक टेलीविज़न चैनल से बात करते हुए कहा है कि सदन में जिस तरह के माहौल में ध्वनिमत से बहुमत का फ़ैसला किया गया उससे यह जानना कठिन है कि नवीन पटनायक के पास बहुमत है.

 विधानसभा अध्यक्ष के पद का दुरुपयोग किया गया और बहुमत पर मत विभाजन से पहले इस पर चर्चा भी नहीं करवाई गई
 
चंदन मित्रा, भाजपा नेता

उन्होंने आरोप लगाया, "विधानसभा अध्यक्ष के पद का दुरुपयोग किया गया और बहुमत पर मत विभाजन से पहले इस पर चर्चा भी नहीं करवाई गई."

उन्होंने कहा कि भाजपा ने राज्यपाल से सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगाने का अनुरोध किया था लेकिन राज्यपाल ने नवीन पटनायक को मौक़ा देने का फ़ैसला किया.

भाजपा के प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि चुनाव की घोषणा हो जाने के बाद सदन में बहुमत साबित कर देने का कोई मतलब नहीं है क्योंकि अब बहुमत का फ़ैसला जनता को करना है.

दूसरी ओर बीजू जनता दल के नेता जय पांडा ने कहा है कि उनकी पार्टी ने संविधान के प्रावधानों के तहत ही बहुमत साबित किया है.

उनका कहना का था कि यह स्थिति सदन में कभी थी ही नहीं कि भाजपा के गठबंधन से हट जाने से बीजू जनतादल के पास बहुमत नहीं रह जाएगा.

समर्थन वापसी

बीजू जनतादल के नेतृत्ववाली राज्य सरकार से पिछले सप्ताह भारतीय जनता पार्टी ने समर्थन वापसी की घोषणा कर दी थी.

इसके बाद राज्य में पैदा हुए राजनीतिक संकट के मद्देनज़र राज्य के मुख्यमंत्री और बीजू जनता दल प्रमुख नवीन पटनायक रविवार को राज्यपाल एमसी भंडारे से मिले.

सीताराम येचुरी
वामपंथी नवीन पटनायक को अपने पाले में लाने की कोशिशों में लगे हुए हैं

राज्यपाल से मुलाक़ात में उन्होंने दावा किया कि बहुमत के लिए ज़रूरी 74 विधायकों का समर्थन उन्हें प्राप्त है.

विधानसभा की 147 सीटों में से बीजेडी के पास 61 हैं जबकि भाजपा के पास 30 हैं. इस तरह बीजेडी को 13 अन्य विधायकों का समर्थन जुटाना है.

राज्यपाल ने मुख्यमंत्री से मुलाक़ात के बाद कहा कि राज्य सरकार 11 मार्च को एक विशेष सत्र में अपना बहुमत साबित करे.

नए रास्ते, नए दोस्त

भाजपा के अलग होते ही मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने पटनायक सरकार को समर्थन देने की घोषणा कर दी थी. सीपीआई और सीपीएम के उड़ीसा विधानसभा में एक-एक विधायक हैं.

सीपीएम ने आने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनावों में भी बीजेडी के साथ गठबंधन बनाने का संकेत भी दिया है और इस बाबत सीपीएम नेता सीताराम येचुरी से राज्य के मुख्यमंत्री की बातचीत भी हुई है.

हालांकि नए गठबंधन के बारे में नवीन पटनायक ने स्षष्ट रुप से कुछ नहीं कहा है.

पार्टी ने भाजपा के अलग होने के बाद भी दावा किया था कि सरकार को बचाने के लिए पर्याप्त सदस्यों का समर्थन उन्हें हासिल है.

मंगलवार को प्रमुख बीजेडी नेताओं की कई बैठकें हुई थीं जिसमें जेएमएम, एनसीपी, भाकपा और माकपा जैसे कुछ दूसरे दलों के नेता और कुछ निर्दलीय विधायक भी मौजूद थे.

 
 
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