बँटवारे की लकीर

(1885-1947)

ये कहानी 70 साल पहले की है, जब देश दो हिस्सों में बँट गया-- भारत और पाकिस्तान. विभाजन के इतिहास से जुड़ी कुछ अहम तारीख़ों पर एक नज़र.

दिसंबर 1885 में `इंडियन नेशनल कांग्रेस की पहली बैठक मुंबई में हुई थी. पहले बीस वर्षों में, कांग्रेस का ज़ोर आज़ादी से ज्यादा ब्रिटिश राज में रह रहे भारतीय लोगों की दशा सुधारने पर था.

लेकिन 1905 में बंगाल के विभाजन के बाद, कांग्रेस ने राजनीतिक सुधार की मांग तेज़ कर दी और आख़िरकार पूर्ण स्वराज के लिए आवाज़ उठाई.

1906 में “भारतीय मुसलमानों के अधिकारों को सुरक्षित रखने के लिए” मुस्लिम लीग की स्थापना की गई.

गाँधी और जिन्ना वार्ता विफल

1938-1942

फ़रवरी 1938 में महात्मा गाँधी और मोहम्मद अली जिन्ना ने देश में हिंदुओं और मुसलमानों के बीच जारी तनाव का हल निकालने के लिए बातचीत शुरु की. लेकिन ये बातचीत जुलाई में नाकाम हो गई. दिसंबर में मुस्लिम लीग ने “मुसलमानों के उत्पीड़न” की जाँच के लिए एक समिति बनाई.

पाकिस्तान बनने की कड़ी में एक अहम पड़ाव 23 मार्च 1940 को आया. इस दिन मुस्लिम लीग ने लाहौर में एक प्रस्ताव रखा जिसे बाद में ‘पाकिस्तान प्रस्ताव’ के नाम से भी जाना गया. इसके तहत एक पूरी तरह आज़ाद मुस्लिम देश बनाए जाने का प्रस्ताव रखा गया.

वहीं वायसराय लिनलिथगो ने अगस्त प्रस्ताव की घोषणा की, जिसमें कार्यकारी परिषद और एक नई युद्ध सलाहकार परिषद में भारतीय प्रतिनिधियों की नियुक्ति किए जाने का ऐलान हुआ.कांग्रेस और लीग ने अगस्त प्रस्ताव ख़ारिज कर दिया और 17 अक्तूबर को कांग्रेस ने अंग्रेज़ी शासन के ख़िलाफ़ असहयोग और सविनय अवज्ञा आंदोलन छेड़ दिया.

ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने राजनीतिक और कानूनी गतिरोध दूर करने की कोशिश की. इसके लिए 11 मार्च 1942 को ब्रिटिश संसद में घोषणा की गई कि इंग्लैंड के प्रसिद्ध समाजवादी नेता सर स्टिफ़र्ड क्रिप्स को जल्द ही नए सुझावों के साथ भारत भेजा जाएगा जो राजनीतिक सुधारों के लिए भारतीय नेताओं से बातचीत करेंगे.

22-23 मार्च 1942 को सर स्टिफ़र्ड क्रिप्स दिल्ली आए. उन्होंने भारतीय नेताओं से लंबी बातचीत की और 30 मार्च को क्रिप्स प्रस्ताव प्रकाशित हुआ.

क्रिप्स मिशन के प्रस्तावों को भारतीय राष्ट्रवादियों ने नामंज़ूर कर दिया.

साल 1942 में महात्मा गांधी के नेतृत्‍व में भारत छोड़ो आंदोलन शुरु हुआ.

महात्मा गाँधी और जिन्ना ने सितंबर 1944 में पाकिस्तान की मांग पर बातचीत की, पर ये वार्ता नाकाम रही. इस मुद्दे पर दोनों में गहरे मतभेद थे.

जिन्ना को पाकिस्तान पहले चाहिए था और आज़ादी बाद में जबकि गाँधी का कहना था कि आज़ादी पहले मिलनी चाहिए. ऐसी आज़ादी जिसमें प्रमुख रूप से हिंदू बहुमत वाली अस्थायी सरकार, मुसलमानों की पहचान सुरक्षित रखने का आश्वासन दे.

1946 में मुस्लिम लीग ने कैबिनेट मिशन की योजना से खुद को अलग कर लिया और आंदोलन छेड़ दिया जिसके बाद देश भर में मारकाट शुरू हो गई.

हिंसा की पहली लहर कलकत्ता में 16 से 18 अगस्त के बीच शुरू हुई. ‘ग्रेट कैलकटा किलिंग्स' के नाम से याद की जाने वाली इस घटना में करीब 4000 लोग मारे गए, हज़ारों घायल हुए और लगभग एक लाख लोग बेघर हुए. इस हिंसा की आग पूर्वी बंगाल के नोआखाली ज़िले और बिहार तक फैल गई.

1947- विभाजन का साल

29 जनवरी को मुस्लिम लीग ने संविधान सभा को भंग करने की मांग की, फ़रवरी में पंजाब में भी सांप्रदायिक हिंसा शुरू हो गई.

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली ने घोषणा की कि ब्रिटेन जून 1948 तक भारत छोड़ देगा और लॉर्ड माउंटबेटन वायसरॉय का पद संभालेंगे.

24 मार्च को लॉर्ड माउंटबेटन ने वायसरॉय और गवर्नर जनरल के पद की शपथ ली.

15 अप्रैल को गांधी और जिन्ना ने मिलकर आम लोगों से हिंसा और अव्यवस्था से दूर रहने की अपील की.

2 जून को माउंटबेटन ने भारतीय नेताओं से विभाजन की योजना पर बात की और 3 जून को नेहरू, जिन्ना और सिख समुदाय के प्रतिनिधि बलदेव सिंह ने ऑल इंडिया रेडियो के प्रसारण में इस योजना के बारे में जानकारी दी.

आख़िरकार 14 अगस्त को एक नया मुल्क पाकिस्तान बना और पाकिस्तान ने अपना पहला स्वतंत्रता दिवस मनाया.

14 अगस्त की रात बारह बजे ब्रिटेन और भारत के बीच सत्ता का स्थांनातरण हुआ और 15 अगस्त को भारत ने अपना पहला स्वतंत्रता दिवस मनाया.

लगभग सवा करोड़ लोग अपना घरबार छोड़ देश बदलने को मजबूर हो गए. अंदाज़न 5 से 10 लाख लोग हिंसा में मारे गए. हज़ारों महिलाओं को अगवा कर लिया गया. इतिहास के पन्नों में ऐसी त्रासदी की मिसाल बहुत कम मिलती है.

ऐसा कत्लेआम जिसमें बँटवारे की रेखा अपने साथ ग़ुस्सा, बेबसी और क्रूरता का सैलाब लेकर आई. यह रेखा अपने पीछे ऐसे ज़ख्म छोड़ गई जिन्हें आज भी दोनों देश पूरी तरह भर नहीं पाए हैं.