जानलेवा नहीं है स्तन कैंसर

  • 28 सितंबर 2016
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स्तन कैंसर का नाम सुनते ही कैंसर पीड़ित और उनके परिवार वाले मरीज़ के जीने की उम्मीद छोड़ देते हैं, लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो ये धारणा सही नहीं है.

भारत में हर साल स्तन कैंसर से पीड़ित महिलाओं की संख्या में प्रति एक लाख में से तीस की औसत से इज़ाफ़ा हो रहा है.

यहां यह समझना बेहद ज़रूरी है कि अलग-अलग महिलाओं में स्तन कैंसर के अलग-अलग लक्षण पाए जाते हैं.

स्तन कैंसर को समझना आसान है, स्त्रियां खुद भी स्तन की जांच कर सकती हैं.

स्तन में गांठ, स्तन के निप्पल के आकर या स्किन में बदलाव, स्तन का सख़्त होना, स्तन के निप्पल से रक्त या तरल पदार्थ का आना, स्तन में दर्द, बाहों के नीचे (अंडर आर्म्स) भी गांठ होना स्तन कैंसर के संकेत हैं.

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हालांकि स्तन में हर गांठ कैंसर नहीं होती, लेकिन इसकी जांच करवाना बेहद ज़रूरी है, ताकि कहीं वो आगे चलकर कैंसर का रूप ना पकड़ ले.

टाटा मेमोरियल सेंटर के डायरेक्टर और कैंसर विशेषज्ञ डॉ आरए बडवे के मुताबिक़, "स्तन में गांठ, सूजन या फिर किसी भी तरह का बदलाव महसूस हो तो डॉक्टर से संपर्क करें."

डॉ. बडवे कहते हैं, "स्तन कैंसर से डरे नहीं क्योंकि इसका निदान संभव है. अगर स्तन कैंसर पहले स्टेज में ही है, तो इसे जड़ से ख़त्म करना बहुत आसान है."

मुंबई में कैंसर के इलाज के लिए मशहूर टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल के आंकड़ों के मुताबिक हर साल 4 हज़ार कैंसर के नए रोगी अस्पताल आते हैं.

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कैंसर विशेषज्ञ डॉ आरए बडवे के मुताबिक, "शराब, ध्रूमपान, तंबाकू के साथ-साथ बढ़ता वज़न, ज़्यादा उम्र में गर्भवती होना और बच्चों को स्तनपान ना करवाना स्तन कैंसर के प्रमुख कारण हैं."

इसलिए ज़रूरी है कि महिलाएं अपने वज़न को नियंत्रित रखें, गर्भधारण का समय निश्चित करें और कम-से-कम 6 महीने तक बच्चों को स्तनपान ज़रूर कराएं. ऐसा करने से स्तन कैंसर का ख़तरा कम हो जाता है.

स्तन कैंसर का कारण आनुवंशिक भी हो सकता हैं, लेकिन ऐसा सिर्फ़ 5-10 % महिलाओं में ही पाया जाता है.

सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. मेहुल एस भंसाली कहते हैं, "बदलते दौर में अपने लाइफ़स्टाइल को ज़रूरत से ज़्यादा बदलना भी स्तन कैंसर का कारण बन सकता है."

उनकी सलाह है कि ज़्यादा कोलेस्ट्रॉल वाले भोजन से दूर रहें और गर्भनिरोधक दवाइयों का सेवन ना करें. इसके अलावा 40 की उम्र के बाद साल में एक बार मेमोग्राफी ज़रूर करवाएं.

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कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. रेशमा पलेप के मुताबिक़, "अक्सर मेमोग्राफी टेस्ट का नाम सुनकर महिलाएं डरती हैं, लेकिन इस टेस्ट से शरीर को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है."

वहीं डॉ अंजलि पाटिल का मानना है कि, "स्तन कैंसर के लक्षण सामने आते ही महिलाएं डर और शर्मिंदगी से इसका ज़िक्र नहीं करती. लेकिन लक्षण का पता चलते ही डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना ज़रूरी है."

डॉ अंजलि के मुताबिक़ कुछ महिलाएं तो सर्जरी के बाद बिल्कुल ठीक हो जाती हैं. लेकिन बाद में लापरवाही की वजह से इसका ख़तरा फिर से उभर आता है.

स्तन कैंसर को लेकर जानकारी का अभाव भी इसके फैलने में अहम रोल निभा रहा है.

डॉ आरए बडवे कहते हैं कि, "बॉयोप्सी टेस्ट से जानकारी मिल जाती है कि स्तन कैंसर है या नहीं. अगर स्तन में गांठ है तो उसका आकार कितना बड़ा है और यह किस तरह का स्तन कैंसर है ये जानने के बाद इलाज़ की प्रक्रिया आसान हो जाती है."

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डॉ बडवे बताते हैं कि स्तन कैंसर की 4 अवस्था होती है. स्तन कैंसर अगर पहले स्टेज में है तो मरीज के ठीक होने की उम्मीद 80% से ज़्यादा होती है. दूसरे स्टेज में अगर स्तन कैंसर है 60-70% तक महिलाएं ठीक हो जाती हैं, वहीं तीसरे या चौथे स्टेज में स्तन कैंसर है तो इलाज़ थोड़ा कठिन हो जाता है.

इसलिए सही समय पर डॉक्टर से संपर्क करना बेहतर होता है.

स्तन कैंसर से जूझ रही राखी शुक्ला कहती हैं, "स्तन कैंसर का नाम सुनते ही मैं बहुत घबरा गई थी. लेकिन डॉक्टरों ने मुझे समझाया है कि मैं स्तन कैंसर के शुरुआती दौर में हूं. इसलिए मैं ठीक हो जाऊंगी. जिसके लिए मुझे सिर्फ डॉक्टर के बताए गए तरीके और दवाइयों समय पर लेनी है."

वहीं बिहार के बेगूसराय से इलाज़ के लिए मुंबई के टाटा मेमोरियल सेंटर आईं मनीषा सिंह मानती हैं, "बीमारी कोई भी हो मरीज़ को दिमाग़ी तौर पर स्थिर होना ज़रूरी है और मुझे उम्मीद है कि मैं बहुत जल्द ठीक हो जाऊंगी."

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स्तन कैंसर के उपचार के लिए डॉक्टर सर्जरी, रेडिएशन थेरेपी और कीमोथेरेपी करते हैं.

माना जाता है कि इन थेरेपी के कुछ साइड इफ़ेक्ट्स भी होते हैं.

टाटा मेमोरियल सेंटर के डिप्टी डायरेक्टर और कीमोथेरेपी एक्सपर्ट डॉ. सुदीप गुप्ता ने बीबीसी को बताया, "कीमोथेरेपी से होने वाले साइड इफ़ेक्ट्स के बारे में पेशेंट्स को बताया जाता है. जैसे बालों का गिरना, लेकिन 6 महीनों में फ़िर से बाल आ जाते हैं. मरीज़ों को पौष्टिक आहार के अलावा फल और हरी सब्ज़ी का सेवन करना ज़रूरी है."

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