कितना ज़रूरी है मुंह का कंडोम?

  • 21 अक्तूबर 2017
सुरक्षित सेक्स इमेज कॉपीरइट BBCthree

जब मैं 20 साल की थी तो एक चैरिटी ने यूनिवर्सिटी में मेरे लिए एक बॉक्स भेजा था. इस बॉक्स में ओरल सेक्स को सुरक्षित बनाने वाले उपकरण थे.

जब यह मुझे सौंपा गया तो ऐसा लगा कि यह यौन सुरक्षा को लेकर है. इसे देखने के बाद भीतर से जिज्ञासा भी पैदा हुई थी. जब यह मेरे पास आया तो मैंने इससे एक छोटा फॉइल पैकेज निकाला. पहली बार मेरा सामना 'डेंटल डैम' से हुआ, ये ओरल सेक्स के दौरान इस्तेमाल किया जाने वाला रबर का एक आवरण होता है.

डेंटल डैम को आसान शब्दों में मुंह के कंडोम के रूप में समझा जा सकता है. यह लेटेक्स का वर्गाकार या आयताकार टुकड़ा होता है, जिसे वजाइना में लगाया जाता है. इसके लगाने के बाद ओरल सेक्स में इन्फेक्शन की आशंका ख़त्म हो जाती है.

'मुझे सेक्स इतना पसंद था कि पोर्न में चली गई'

सेक्स के दौरान वजाइना में ग्लिटर कैप्सूल ख़तरनाक

इमेज कॉपीरइट Getty Images

सुरक्षित सेक्स ज़रूरी

ये लेटेक्स फ्रुट-फ्लेवर का भी होता है. इसके बारे में सोचते हुए बहुत सेक्सी नहीं लगता है, लेकिन इन्फेक्शन से आप बच सकते हैं.

ब्रिटेन में 15 से 24 साल की उम्र वालों में सेक्शुअली ट्रांसमिटेड इन्फेक्शन (एसटीआई) की आशंका सबसे ज़्यादा होती है. उम्र बढ़ने के साथ इसमें कमी आती है.

एक रिपोर्ट के अनुसार 2016 में 15 से 24 की उम्र के हेट्रोसेक्शुअल (यानी पुरुष और महिला के बीच यौन संबंध की इच्छा) लोगों में 62 फ़ीसदी कमिडिया, 50 फ़ीसदी गॉनरीआ, 49 फ़ीसदी गुप्तांगों में गांठ और गुप्तांगों में त्वचा की इन्फेक्शन से पीड़ित पाए गए थे. समलैंगिक पुरुषों में भी इसकी आशंका होती है.

तुलनात्मक रूप से महिलाओं के बीच सेक्स में इन बीमरियों की आशंका कम होती है. कुछ लोग ग़लती से यह मान लेते हैं कि लेस्बियन और बाइसेक्शुअल महिलाओं को एसटीआई जांच की ज़रूरत नहीं पड़ती है, लेकिन कम ख़तरा का मतलब ख़तरा नहीं होना नहीं होता है.

जब मैंने किशोरावस्था में पहली बार डेटिंग शुरू की तो मुझे आइडिया नहीं था कि लेस्बियन के लिए भी सुरक्षित सेक्स ज़रूरी है. मेरी पहली दो पार्टनर इन चीज़ों को लेकर पूरी तरह से अनजान थीं, इसलिए हमने कभी इसका ख़्याल नहीं रखा.

इमेज कॉपीरइट globalprotection.com

डेंटल डैम

लेकिन डेंटल डैम से मुझे अहसास हुआ कि लेस्बियन के लिए भी यह ज़रूरी है. आपका यौन आकर्षण चाहे जैसा भी हो, सुरक्षित सेक्स की अहमियत बनी रहती है.

कंडोम की तरह ही डेंटल डैम भी पैकेट में बेचे जाते हैं. लेकिन कंडोम के उलट इसे ख़रीदना आसान नहीं है. कई बार आपको यह केमिस्ट की दुकानों पर भी मिल जाता है, लेकिन इसे ऑनलाइन भी मंगा सकते हैं. छोटे क्लीनिकों और यौन बीमारियों के लिए बने ख़ास क्लीनिकों में भी मिल जाते हैं.

डेंटल डैम मतलब मुंह का कंडोम

सुरक्षित सेक्स का मतलब केवल पेनिट्रेशन के दौरान सतर्क रहना ही नहीं होता है. हमें इसे जानना चाहिए कि पेनिट्रेशन में हमेशा पेनिस शामिल नहीं होता है.

ऐसा लेस्बियन और स्ट्रेट दोनों के साथ है. अगर आपकी उंगली कटी हो तो इन्फेक्शन की आशंका काफ़ी रहती है. हम सभी कंडोम और गर्भनिरोधक गोली के बारे में जानते हैं. हम इन्हें स्कूल के दिनों से ही जानते हैं. लेकिन डेंटल डैम और लेटेक्स ग्लोव्स इस मामले में जुदा हैं.

समलैंगिकता में सुरक्षित सेक्स को लेकर तो बात ही नहीं होती है. इसमें रिसर्च का भी पर्याप्त अभाव है. 2016 में नेशनल एलजीबीटी पार्टनरशिप के एक सर्वे में पाया गया कि 101 लेस्बियन में से आधे से ज़्यादा लोगों के अनुसार सेक्शुअल हेल्थ क्लीनिक में उनका अनुभव नकारात्मक रहा.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

एसटीआई का ख़तरा हर तरह के सेक्स में

एक ने अपना अनुभव बताते हुए कहा था, "मुझसे डॉक्टर ने कहा कि लोग इस बात को नहीं समझते हैं कि बिना लिंग की संलिप्तता के भी इन्फेक्शन कैसे संभव है."

वजाइना के ज़रिए जीवाणु का प्रसार होता है, लेकिन लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते हैं. ऐसे में कुछ चीज़ों का गंभीरता से ध्यान रखना चाहिए. नाखून छोटा और साफ़ रखें. कोई खरोंच नहीं चाहता है. उंगली में लेटेक्स ग्लोव का इस्तेमाल ज़रूर करें.

ओरल और डिजिटल सेक्स दोनों में एसटीआई का डर बना रहता है. इसलिए मुंह का कंडोम और लेटेक्स ग्लोव काफ़ी ज़रूरी सामान हैं. दोनों पार्टनरों को इस मामले में सतर्क रहना चाहिए.

मैं किशोरावस्था तक लेस्बियन थी. मेरी मां ने मुझसे स्कूल के दिनों में सेक्स को लेकर इस मामले में सतर्क रहने के लिए कहा था. अगर आप सेक्स टॉय का भी इस्तेमाल करते हैं तब भी कॉन्डम की अहमियत होती है. इससे एसटीआई का ख़तरा कम होता है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

मिलते-जुलते मुद्दे