'पूरी तरह शुगर छोड़ना मेरी बहुत बड़ी ग़लती थी'

  • 8 नवंबर 2017
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Image caption राधिका संघम

हम ये लगातार सुनते हैं कि शर्करा यानी शुगर का सेवन शरीर के लिए कितना बुरा है और रोज़मर्रा के आहार में हमें शुगर की मात्रा घटानी चाहिए. शुगर में सुक्रोज़ होता है और कहा जाता है कि यह मोटापे और टाइप-2 डायबिटीज़ की चपेट में आने की आशंका बढ़ा देता है.

इन बातों के प्रभाव में आकर बीबीसी थ्री की राधिका संघन ने तय किया कि वह ख़ुद को स्वस्थ रखने के लिए पूरी तरह शुगर छोड़ देंगी. दो महीने से ज़्यादा वक़्त तक उन्होंने किसी भी रूप में शुगर का सेवन नहीं किया. इसके बाद क्या हुआ? पढ़िए उनकी ज़ुबानी.

मैंने एक महीने से शुगर नहीं चखी है और मुझे बहुत बुरा लगता है.

मैं हर रोज़ कम से कम एक बार मीठा खाती थी और अब मेरी ज़िंदग़ी पूरी तरह 'शुगर फ्री' हो गई है.

मैं एक ही चीज़ चिल्लाना चाहती हूं, 'चॉकलेट!'

'हस्तियों का कहना, शुगर छोड़ दो'

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मुझे लगता है कि मैं वो इंसान हूं जिसके रोज़ाना के आहार में कम से कम 15 चम्मच शुगर शामिल है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक, दिन में सिर्फ 6 चम्मच शुगर लेनी चाहिए.

सनद रहे कि एक सोडा कैन में नौ चम्मच तक शुगर हो सकती है.

इन आंकड़ों को ज़ेहन में रखते हुए, अपने स्वास्थ्य को लेकर फिक्रमंद, मैं इंटरनेट रिसर्च करने लगी.

वहां हस्तियां, जानकार और न्यूट्रीशनिस्ट खाने में शुगर न लेने की वकालत करते हुए मिले. हॉलीवुड सितारे ग्विनेथ पैल्ट्रो, सारा विल्सन जैसी लेखिकाएं और आम लोग भी अपने इंस्टाग्राम अकाउंट्स पर शुगर का इस्तेमाल छोड़ने की बात करते हैं.

उनका संदेश साफ है: शुगर कम मत कीजिए, इसे पूरी तरह अपनी ज़िंदग़ी से बाहर कर दीजिए.

तो मैंने यह चुनौती स्वीकार कर ली.

प्रयोग की शुरुआत

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Image caption डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, एक दिन में 6 चम्मच से ज़्यादा शुगर नहीं लेनी चाहिए

पहले 15 दिन मैंने एक किशोरी से भी बुरे मूड स्विंग का सामना किया. लगातार सिरदर्द होता था, जैसे स्थायी हैंगओवर हो. मैं चिड़चिड़ी हो गई थी. लोगों पर चिल्लाने लगी थी.

सिर्फ़ एक ही चीज़ मुझे शांत कर सकती थी- केले का मीठा स्वाद. लेकिन ग्विनेथ फ्रुक्टोज़ के थोड़ा भी क़रीब आने की इजाज़त नहीं देती. यह सोचकर मैं अपराध बोध से भर जाती थी.

तीन हफ़्ते बाद सिरदर्द ख़त्म हो गया. मुझे सामान्य लगने लगा और जब कोई केक या मिठाई मेरे आगे बढ़ाता तो मना करने में मुझे भीतर ज़ोर नहीं लगाना पड़ा.

मैं सोचती थी, क्या मैं उससे उबर गई हूं?

लेकिन नहीं. रात 11 बजे मैं अपनी रसोई में ईस्टर एग्स खोज रही थी.

पहले भोजन मुझे चिंतित नहीं करता था. लेकिन अब हफ्ते की ख़रीदारी में मुझे बहुत सोचना पड़ता था कि मै क्या खा सकती हूं, क्या नहीं.

मुझे लोगों के जन्मदिन समारोह में आनंद नहीं आता था. मैं वहां पानी सुड़कती रहती थी और दूसरे लोग वाइन पिया करते थे.

मेडिकल सलाह

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Image caption शुगर कम करना दांतों की सेहत और वज़न कम करने में फायदेमंद होता है, लेकिन जानकार इसके पूरी तरह त्याग की वकालत नहीं करते

दो महीनों के बाद, मेरे सहकर्मी और दोस्त एक बात पर सहमत थे: मेरी सनक बहुत आगे बढ़ गई थी.

मैं एक विशेषज्ञ के पास गई. डॉक्टर हिशम ज़ियाउद्दीन यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज में शोधकर्ता हैं. वह ख़ुद को इस प्रयोग में डालने का मेरा कारण समझ ही नहीं पाए.

एक सवाल से मुझे मेरी बुनियादी ग़लती पता चली, 'तुमसे किसने कहा कि पूरी तरह शुगर छोड़ दो?'

'संतुलित आहार'

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Image caption जानकार संतुलित आहार की ही वकालत करते हैं

तब मैंने महसूस किया कि कोई वैज्ञानिक अध्ययन नहीं है जो ऐसी सिफ़ारिश करता हो. यह नामी हस्तियों और इंटरनेट के आम लोगों की सलाह थी, जिसके प्रभाव में आकर मैंने ऐसा किया.

ज़ियाउद्दीन ने माना कि दांतों की सेहत और वज़न कम करने के संबंध में शुगर की मात्रा घटाने के फायदे हैं, लेकिन उनका निष्कर्ष साफ था- 'इसे पूरी तरह छोड़ना कुछ ज़्यादा ही है.'

जानकारों का कहना है कि जायज़ वजह, मसलन एलर्जी आदि के अलावा शुगर का इस्तेमाल पूरी तरह छोड़ना नुकसानदायक हो सकता है.

तब से मैं डॉ. ज़ियाउद्दीन की सलाह मान रही हूं. वह कहते हैं, न कम, न ज़्यादा. जैसा छठी क्लास में मेरी टीचर बताया करती थीं- संतुलित आहार लेना चाहिए.

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