चांद पर 4G: धरती की तरह लगाए जाएंगे टावर?

  • 1 मार्च 2018
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आप भले ही अपने मोबाइल में 4जी स्पीड का आनंद नहीं ले पा रहे हों, पर चांद पर जल्द ही हाई स्पीड 4जी नेटवर्क की शुरुआत होने जा रही है.

वोडाफोन जर्मनी और नोकिया साथ मिलकर चांद पर 4जी नेटवर्क लगाएंगे. इसकी मदद से रोबोट वहां की लाइव तस्वीर धरती पर भेज सकेगा.

यह नेटवर्क बर्लिन के पीटी साइंटिस्ट (पार्ट टाइम साइंटिस्ट) नाम की कंपनी की मदद के लिए बनाया जाएगा. कंपनी एक निजी चंद्र रोबोट मिशन की योजना बना रही है.

मिशन के तहत अपोलो 11 मिशन के 50 वर्ष पूरे होने पर कंपनी चांद पर एक लॉन्चर और दो रोबोट भेजेंगे.

अपोलो 11 मिशन नासा की महत्वकांक्षी परियोजना थी, मिशन के तहत 1969 में नील आर्मस्ट्रॉन्ग और एडविन एल्ड्रिन ने पहली बार चांद पर कदम रखे थे.

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वोडाफोन जर्मनी के आधिकारिक बयान में कहा गया है, "अगले साल चांद पर 4जी नेटवर्क होगा. वोडाफोन चांद पर पहला 4जी नेटवर्क स्थापित करने की योजना बना रहा है. इसके लिए कंपनी ने टेक्नोलॉजी पार्टनर के रूप में नोकिया को चुना है."

वहीं, पीटी साइंटिस्ट के संस्थापक और सीईओ रॉबर्ट बोम ने कहा, "यह सौर मंडल के सस्ते पड़ताल की ओर पहला कदम है. इस तकनीक के ज़रिए हम आसानी से और कम खर्च में एचडी (हाय डेफिनिशन) वीडियो डाटा प्राप्त सकेंगे."

स्पे के मुताबिक इस मिशन में कार कंपनी ऑडी के बनाए रोबोट भेजे जाएंगे. यह पहला मिशन होगा जो निजी खर्च पर पूरा किया जाएगा.

कैसा होगा ट्रांसमिशन उपकरण?

आम तौर पर इंटरनेट सर्विस के लिए टावर लगाए जाएंगे. पर चांद पर ऐसा नहीं होगा. नोकिया 4जी ट्रांसमिशन के लिए अब तक का सबसे हल्का ट्रांसमिशन उपकरण बनाएगा, जिसका वजन चीनी की एक थैली से भी कम होगा.

नोकिया के मुताबिक यह ट्रांसमिशन उपकरण एक किलो से भी कम वज़न का होगा. 4जी ट्रांसमिशन के लिए 1800 मेगाहर्ट्ज फ्रिक्वेंसी बैंड का इस्तेमाल किया जाएगा, जो एचडी वीडियो के लिए जरूरी होता है.

स्मिथसोनियन डॉट कॉम के मुताबिक पहले दोनों रोबोट बेस स्टेशन यानी लॉन्चर को हाई डेफिनिशन वीडियो भेजेंगे. इसके बाद बेस स्टेशन यह वीडियो धरती पर भेजेगा.

रोबोट 1972 में नासा के अपोलो 17 का भी निरीक्षण करेगा. अपोलो 17 का इस्तेमाल चांद पर जाने के लिए अंतिम बार अंतरिक्ष यात्रियों ने किया था.

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Image caption स्पेस एक्स से लॉन्च किया जाएगा मून मिशन

4जी ही क्यों, 5जी क्यों नहीं?

अब सवाल उठता है कि इस महत्वकांक्षी मिशन के लिए 4जी ही क्यों चुना गया, 5जी क्यों नहीं? रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में इस सवाल का जवाब दिया गया है.

रिपोर्ट के मुताबिक मिशन से जुड़े एक अधिकारी ने बताया 5जी का इस्तेमाल इसलिए नहीं किया जाएगा क्योंकि इस पर परीक्षण जारी है. यह भी स्पष्ट नहीं है कि 5जी चांद की सतह से काम करेगा या नहीं.

फॉरच्यून डॉट कॉम के मुताबिक रोबोट अब तक एक-दूसरे से संपर्क बनाए रखने के लिए एनलॉग रेडियो ट्रांसमिशन विधि का इस्तेमाल करते थे.

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4जी से संपर्क बनाने के लिए एनालॉग रेडियो के मुकाबले कम ऊर्जा की खपत होगी. पृथ्वी से चांद की दूरी 3.58 लाख किलोमीटर है.

कैसा होगा रोबोट?

पीटी साइंटिस्ट के मुताबिक उनके रोबोट में चार पहिया होंगे, जो चांद की उबड़-खाबड़ जमीन पर चल सकेंगे. रोबोट 30 किलोग्राम का होगा जो 5 किलोग्राम अतिरिक्त भार ले जाने में सक्षम होंगे.

रोबोट 4जी तकनीक की मदद से 3डी वीडियो कैद कर सकता है.

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