इच्छामृत्यु पर दूसरे देशों में क्या है क़ानून?

  • 9 मार्च 2018
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भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को 'इच्छामृत्यु' को मंज़ूरी दे दी है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि व्यक्ति को गरिमा के साथ मरने का अधिकार है.

कोर्ट ने इसके लिए 'पैसिव यूथेनेशिया' शब्द का इस्तेमाल किया है. इसका मतलब होता है किसी बीमार व्यक्ति का मेडिकल उपचार रोक देना ताकि उसकी मौत हो जाए.

कोर्ट के इस आदेश से असहनीय बीमारी से जूझ रहे मरीज़ों को मदद मिलेगी.

याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट ने इस फ़ैसले का स्वागत किया है. उनका कहना है कि कृत्रिम साधनों के ज़रिए मरीज़ को ज़िंदा रखने की कोशिश से सिर्फ़ अस्पतालों को पैसा कमाने की सुविधा मिली है.

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हालांकि इसे लेकर ज़रूरी गाइंडलाइंस क्या हैं, ये अभी अस्पष्ट है.

क्या है पैसिव यूथेनेशिया?

ये वो स्थिति है जब डॉक्टर किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीज़ का मेडिकल उपचार बंद कर दें और उसे मरने दें. इसमें मरीज़ से लाइफ़ सपोर्ट मशीनें हटा देना, खाने की ट्यूब हटाना, किसी तरह का ख़ास ऑपरेशन न करना और ज़रूरी दवाएं भी बंद कर देना शामिल है.

कहां-कहां है इच्छामृत्यु की अनुमति?

  • ब्रिटेन समेत यूरोप के कई बड़े देश इच्छामृत्यु को आज भी हत्या ही मानते हैं. लेकिन नीदरलैंड, बैल्जियम, कोलंबिया और पश्चिमी यूरोप के लक्ज़मबर्ग में इच्छामृत्यु की अनुमति है.
  • स्विट्ज़रलैंड में इसे असिस्टेड सुसाइड कहा जाता है. इसमें एक शख़्स कानूनी अनुमति के साथ किसी अन्य शख़्स की आत्महत्या करने में मदद कर सकता है. लेकिन मदद करने वाले शख़्स को ये लिखित में देना होता है कि इसमें उसका कोई हित नहीं छिपा है.
  • साल 2015 में अमरीका के कैलीफॉर्निया राज्य ने भी वॉशिंगटन, ओरेगन, मोन्टाना और वेरमॉन्ट राज्यों की तरह इच्छामृत्यु की अनुमति दे दी थी.
  • सालों चली बहस के बाद साल 2016 में कनाडा ने भी इच्छामृत्यु की इजाज़त दे दी.
  • ब्रिटेन, नॉर्वे, स्पेन, रूस, चीन, फ़्रांस और इटली जैसे कई बड़े देशों में इसे लेकर आज भी बहस जारी है और इच्छामृत्यु फ़िलहाल ग़ैर-क़ानूनी या सशर्त दी जाती है.
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इच्छामृत्यु किनके लिए?

  • मरीज़ की बीमारी असहनीय हो जाए, तभी वो इच्छामृत्यु के लिए आवेदन कर सकता है. जिन देशों में इच्छामृत्यु लीगल है, उनमें से ज़्यादातर में इस नियम का पालन किया जाता है.
  • नीदरलैंड में देखा जाता है कि मरीज़ की बीमारी असहनीय है कि नहीं और उसमें सुधार की कितनी संभावना है.
  • बैल्जियम का कानून भी इससे मिलता-जुलता है. मरीज़ की बीमारी असहनीय होनी चाहिए और उसे लगातार बीमारी की वजह से पीड़ा हो रही हो, तभी इच्छामृत्यु का आवेदन स्वीकार किया जाएगा.
  • अमरीका और कनाडा में मरीज़ को इच्छामृत्यु के लिए मदद कभी मुहैया कराई जाती है, जब बीमारी असहनीय हो, इलाज के ज़रिए उसके ठीक कर पाना असंभव हो और उसे लगातार पीड़ा हो रही हो.
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इन देशों में कैसे बदला क़ानून?

  • कोलंबिया, मोन्टाना और कनाडा की अदालतों ने मानवाधिकार के दावों के मद्देनज़र कानून में बदलाव किया और इच्छामृत्यु की अनुमति दी.
  • बैल्जियम, क्यूबेक और वेरमॉन्ट में विधायिका ने इस क़ानून को बदला.
  • ओरेगन और वॉशिंटगन में भी इसे लेकर तब कानून बनाना पड़ा, जब भारी संख्या में लोगों ने इसके पक्ष में अपना वोट दिया.

कैसे किया जाता है आवेदन?

जहां भी इच्छामृत्यु की अनुमति दी गई है, सभी देशों में मरीज़ को एक लिखित आवेदन करना होता है. यह सुनिश्चित किया जाता है कि मरीज़ को इसकी जानकारी हो या उसके परिजनों को पता हो की वो क्या करने जा रहे हैं. अमरीका में इच्छामृत्यु के आवेदन के साथ-साथ दो गवाह भी पेश करने होते हैं.

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मरीज़ की उम्र कितनी हो?

  • सिर्फ़ नीदरलैंड और बेल्जियम में ही 18 साल से कम उम्र के मरीज़ों को इच्छामृत्यु का आवेदन करने की अनुमति है. अगर 16 से 18 साल का कोई मरीज़ इच्छामृत्यु का आवेदन करता है, तो मरीज़ के माता-पिता भी इसमें कोई रोकटोक नहीं कर सकते.
  • हालांकि बेल्जियम में 18 साल से कम उम्र के मरीज़ मां-बाप की अनुमति के साथ आवेदन कर सकते हैं.
  • जिन देशों ने इच्छामृत्यु को लीगल किया है उनमें से ज़्यादातर देशों में 18 साल से कम उम्र के मरीज़ों को आवेदन करने की अनुमति नहीं है.
  • ज़्यादातर देशों में कुछ मानसिक बीमारियों से जूझ रहे मरीज़ों की इच्छामृत्यु की अर्ज़ी स्वीकार नहीं की जाती.

...अन्य सावधानियां क्या हैं?

  • नीदरलैंड और बैल्जियम ने डॉक्टरों का एक ऐसा नेटवर्क तैयार किया है जो ये जांच करता है कि इच्छामृत्यु का आवेदन करने वाला मरीज़ क्या वाक़ई ऐसी बीमारी से जूझ रहा है जो असहनीय है. सभी मामलों में दो डॉक्टरों का सर्टिफ़िकेट लगाना ज़रूरी है.
  • अमरीका के पांच राज्यों में भी मरीज़ को दूसरे डॉक्टर से सलाह लेनी होती है. साथ ही एक सर्टिफ़िकेट देना होता है कि मरीज़ किसी भी तरह की मानसिक बीमारी से नहीं जूझ रहा है.
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क्या कहते हैं आंकड़े?

  • साल 2010: नीदरलैंड में जितने लोगों की मृत्यु हुई, उनमें से क़रीब 2.8 प्रतिशत लोगों ने इच्छामृत्यु को चुना.
  • साल 2007-08 में एक हेल्थ सर्वे जारी किया गया था जिसमें ये बात सामने आई थी कि इच्छामृत्यु के ग़ैरक़ानूनी होने के बावजूद फ़्रांस और ब्रिटेन में कई सौ लोगों ने इच्छामृत्यु की.
  • साल 2002 में क़ानूनी मान्यता मिलने के बाद बैल्जियम में इच्छामृत्यु करने वाले लोगों की संख्या में उछाल आया.

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