क्या डोनल्ड ट्रंप ने फ़ेसबुक के दम पर जीता था अमरीका के राष्ट्रपति का चुनाव?

  • 20 मार्च 2018
ट्रंप, मार्क ज़करबर्ग इमेज कॉपीरइट Getty Images

इस कहानी में कई सनसनीखेज़ चीज़ें हैं, अनैतिक व्यवहार के आरोप हैं, भावनाओं के साथ खिलवाड़ है और आंकड़ों का बेजा इस्तेमाल है.

फ़ेसबुक और आंकड़ों का धंधा करने वाली कंपनी 'कैम्ब्रिज एनालिटिका' इस कहानी के केंद्र में हैं.

उन पर लोगों की निजी जानकारी और उससे जुड़े डेटा के ग़लत इस्तेमाल का आरोप है.

कहा जा रहा है कि 'कैम्ब्रिज एनालिटिका' ने फ़ेसबुक से मिले डेटा के सहारे 2016 के अमरीकी राष्ट्रपति के चुनाव और ब्रिटेन में ब्रेक्ज़िट पर हुए जनमत संग्रह के नतीज़ों को प्रभावित करने की कोशिश की थी.

दोनों ही कंपनियां इससे इनकार करती हैं कि उन्होंने कुछ ग़लत नहीं किया है.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

कैम्ब्रिज एनालिटिका क्या है

कैम्ब्रिज एनालिटिका एक ब्रितानी कंपनी है. इसके मालिकों में रिपब्लिकन पार्टी को चंदा देने वाले अरबपति कारोबारी रॉबर्ट मर्कर भी हैं.

इस कंपनी पर साल 2016 के अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों को प्रभावित करने का आरोप है.

ये कहा जा रहा है कि इस कंपनी ने लाखों फ़ेसबुक यूजर्स के एकाउंट्स की जानकारी उनकी इजाज़त के बग़ैर इस्तेमाल की.

इसके लिए कंपनी ने ऐसा सॉफ़्टवेयर तैयार किया जिससे लोगों के राजनीतिक रुझान का अंदाज़ा लगाया जा सके.

डेटा चोरी की ख़बरों पर फ़ेसबुक के शेयर लुढ़के

इमेज कॉपीरइट PATRICIA DE MELO MOREIRA/AFP/Getty Images
Image caption कैम्ब्रिज एनालिटिका के बॉस एलेक्ज़ेंडर निक्स

कैम्ब्रिज एनालिटिका पर क्या है आरोप

ब्रितानी समाचार चैनल 'न्यूज़ 4' ने डेटा एनालिटिक्स फ़र्म कैम्ब्रिज एनालिटिका के अधिकारियों से मिलने के लिए अपने अंडरकवर रिपोर्टर भेजे.

कैम्ब्रिज एनालिटिका को डोनल्ड ट्रंप को चुनावी जीत दिलाने में मदद करने का श्रेय दिया जाता है.

रिपोर्टर ने कंपनी के अधिकारियों के सामने खुद को श्रीलंका के बिज़नेसमैन के तौर पर पेश किया और बताया कि वे देश के स्थानीय चुनावों को प्रभावित करना चाहते हैं.

कैम्ब्रिज एनालिटिका के बॉस एलेक्ज़ेंडर निक्स स्टिंग ऑपरेशन में उन रिपोर्टरों को साफ़ तौर पर ये बताते दिखे कि किस तरह से उनकी कंपनी राजनीतिक विरोधियों को नुक़सान पहुंचा सकते हैं. उनकी छवि ख़राब करने के लिए कैम्पेन चला सकते हैं. कॉल गर्ल के साथ उन्हें पकड़वा सकते हैं और ऐसे हालात बना सकते हैं जिनमें विरोधी कैमरे के सामने रंगे हाथों रिश्वत लेते पकड़े जाएं.

कैम्ब्रिज एनालिटिका 'न्यूज़ 4' चैनल के दावों से इनकार करती हैं. कंपनी का कहना है कि डॉक्युमेंट्री संपादित की गई और बातचीत की पटकथा मक़सद को पूरा करने के लिए लिखी गई है. कंपनी का ये भी दावा है कि बातचीत की शुरुआत 'न्यूज़ 4' के रिपोर्टरों ने ही की थी.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

फ़ेसबुक का रोल क्या था

साल 2014 में फ़ेसबुक पर एक क्विज़ में यूज़र्स को उनके व्यक्तित्व के बारे में जानने का मौका दिया गया.

कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर एलेक्ज़ेंडर कोगान ने ये क्विज़ डिजाइन की थी. (कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी का कैम्ब्रिज एनालिटिका से कोई संबंध नहीं है.)

उस वक़्त फ़ेसबुक पर चल रहे ऐप्स और गेम्स में ये आम बात थी कि क्विज़ में भाग ले रहे व्यक्ति की जानकारी के अलावा उसके दोस्तों से जुड़े डेटा भी ले लिए जाते थे.

हालांकि फ़ेसबुक ने अब काफी बदलाव किए हैं और डेटा डेवलपर्स अब इस तरह से यूज़र डेटा इकट्ठा नहीं कर सकते.

कैम्ब्रिज एनालिटिका के लिए काम कर चुके क्रिस्टोफ़र वाइली आरोप लगाते हैं कि इस क्विज़ में 270,000 लोगों ने हिस्सा लिया और तक़रीबन पांच करोड़ लोगों से जुड़ा डेटा उनकी मर्जी के बगैर इकट्ठा किया गया.

इनमें से ज़्यादातर लोग अमरीकी थे और वे क्विज़ में भाग लेने वाले लोगों की फ़्रेंड लिस्ट में थे.

क्रिस्टोफ़र वाइली का दावा है कि ये डेटा कैम्ब्रिज एनालिटिका को बेचा गया और उन लोगों के राजनीतिक रुझान के हिसाब से ट्रंप समर्थक प्रचार सामाग्री फ़ेसबुक विज्ञापनों के जरिए उन तक पहुंचाई गई.

कैम्ब्रिज एनालिटिका इन आरोपों से इनकार करती है और उसका कहना है कि ट्रंप के इलेक्शन कैम्पेन को मुहैया कराई सेवाओं में ये सब कुछ शामिल नहीं था.

इमेज कॉपीरइट Getty Images
Image caption अमरीकी कांग्रेस के सामने मार्क ज़करबर्ग को गवाही के लिए बुलाए जाने की मांग उठ रही है

क्या ये फ़ेसबुक के अपने नियम-क़ायदों के ख़िलाफ़ था

ये डेटा उस वक्त फ़ेसबुक के नेटवर्क का इस्तेमाल करके इकट्ठा किया गया था. कई डेटा डेवलपर्स ने इसका फ़ायदा उठाया था.

लेकिन फ़ेसबुक को अपने यूजर्स से जुड़े ये डेटा दूसरी पार्टियों के साथ शेयर करने का अधिकार नहीं था.

एक और बात ये भी है कि क्विज़ में भाग ले रहे लोगों को इस बात का जरा सा भी गुमान नहीं था कि उनकी जानकारियों का इस्तेमाल डोनल्ड ट्रंप के चुनाव अभियान में किया जाएगा.

फ़ेसबुक का कहना है कि जब उन्हें पता चला कि उनके नियम तोड़े जा रहे हैं और उन्होंने इस क्विज़ ऐप को हटा दिया और क्विज़ तैयार करने वाले से ये आश्वासन भी मांगा कि यूजर्स की जानकारी डिलीट कर दी जाएगी.

कैम्ब्रिज एनालिटिका का दावा है कि उसने कभी भी इस डेटा का इस्तेमाल नहीं किया और फ़ेसबुक के कहने पर इसे डिलीट कर दिया गया था.

फ़ेसबुक और ब्रिटेन के इन्फॉर्मेशन कमिश्नर दोनों ही ये जानना चाहते हैं कि ये डेटा क्या वाकई डिलीट कर दिया गया था.

क्रिस्टोफ़र वाइली का दावा है कि ऐसा नहीं हुआ.

सरकार क्या कह रही है

अमरीकी सीनेटरों ने मांग की है कि फ़ेसबुक के फ़ाउंडर मार्क ज़करबर्ग को कांग्रेस के सामने गवाही देने के लिए बुलाया जाए और ये पूछा जाए कि यूजर डेटा को वे कैसे सुरक्षित रखते हैं.

यूरोपीय संसद के प्रमुख ने कहा है कि वे इस बात की जांच कराएंगे कि कहीं फ़ेसबुक के यूजर डेटा का बेजा इस्तेमाल तो नहीं किया गया.

ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरीज़ा मे की प्रवक्ता ने कहा है कि वे इस जानकारी के सार्वजनिक होने के बाद बेहद चिंतित हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार