आप जानते हैं फ़ेसबुक आपको कैसे 'बेच' रहा है!

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फ़ेसबुक अब तक के सबसे बड़े संकट के जूझ रहा है और कंपनी की पहली प्रतिक्रिया से उसे कोई ख़ास मदद नहीं मिली है.

आरोप है कि साल 2016 में अमरीका के राष्ट्रपति चुनावों में डोनल्ड ट्रंप की मदद करने वाली कंपनी कैम्ब्रिज एनालिटिका ने फ़ेसबुक के पाँच करोड़ से अधिक यूज़र्स की निजी जानकारियां 'चुरा' ली थीं.

फ़ेसबुक के डेटा सुरक्षा प्रमुख एलेक्स स्टैमॉस की प्रस्तावित विदाई ने कंपनी के दुनिया भर के दफ़्तरों के अंदर चिंता बढ़ा दी है.

सवालों के दायरे में अब सीधे फ़ेसबुक के प्रमुख मार्क ज़करबर्ग आ चुके हैं.

जब पहली दफ़ा यह कहा गया था कि रूस ने फ़ेसबुक का इस्तेमाल 2016 के अमरीकी चुनावों को प्रभावित करने के लिए किया था, तब मार्क ज़करबर्ग ने इन आरोपों को 'पागलपन वाली बात' करार दिया था.

महीनों बाद उन्होंने फ़ेसबुक पर वायरल होने वाले झूठ को रोकने के लिए कई उपायों की घोषणा की.

इस बार चैनल '4 न्यूज़' की अंडरकवर रिपोर्टिंग, 'द ऑब्ज़र्वर' और 'द न्यूयॉर्क' टाइम्स की ख़बरों पर उन्होंने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लाखों लोगों ने उनके डेटा को इकट्ठा कर उसे थर्ड पार्टी को दे दिया है. यह डेटा उल्लंघन के दायरे में नहीं आता है.

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फ़ेसबुक का बिज़नेस मॉडल

फ़ेसबुक और कैम्ब्रिज एनालिटिका, दोनों ने किसी भी तरह की गड़बड़ी और नियमों के उल्लंघन की बात से इंकार किया है.

अगर ये डेटा सुरक्षा के उल्लंघन का मामला नहीं है, अगर यह कंपनियों के लिए चिंता का विषय नहीं है और अगर यह सबकुछ जो हुआ, वो क़ानून सही है तो दो अरब फ़ेसबुक यूज़र्स को चिंतित होने की ज़रूरत है.

फ़ेसबुक ने अप्रत्याशित रूप से कमाई की है और अमीर बना है. अधिकतर यूज़र को यह नहीं पता है कि सोशल मीडिया कंपनियां उनके बारे में कितना जानती हैं.

फ़ेसबुक का बिज़नेस मॉडल उसके डेटा की गुणवत्ता पर आधारित है. फ़ेसबुक उन डेटा को विज्ञापनदाताओं को बेचता है.

यूजर्स डाटा चोरी होने की ख़बरों

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राजनीति भी बेची जा रही है

विज्ञापनदाता यूज़र की ज़रूरत समझकर स्मार्ट मैसेजिंग के ज़रिए आदतों को प्रभावित करते हैं और यह कोशिश करते हैं कि हम उनके सामान को खरीदें.

'द टाइम्स' में ह्यूगो रिफ्किंड लिखते हैं कि 'अभी जो कुछ भी हुआ है वो इसलिए हुआ है कि फ़ेसबुक न सिर्फ़ सामान बल्कि राजनीति भी बेच रहा है. राजनीतिक दल, चाहे वो लोकतांत्रिक हों या न हों, हमारी सोच को प्रभावित करने के लिए स्मार्ट मैसेजिंग का इस्तेमाल करना चाहते हैं ताकि हमलोग किसी ख़ास उम्मीदवार को वोट करें. वो इसका इस्तेमाल आम सहमति को कमज़ोर करने और सच्चाई को दबाने के लिए भी करते हैं.'

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मार्क ज़करबर्ग को जवाब देना चाहिए

फ़ेसबुक की चालाकी से दी गई प्रतिक्रिया और न्यूज़ फ़ीड को तय करने वाली तकनीक का इस्तेमाल, ख़ास उद्देश्यों को पूरा करने की इजाज़त देगा जो समाज के लिए हमेशा ठीक नहीं होगा.

हालांकि कंपनी ने डेटा सुरक्षा के उल्लंघन से इंकार किया है, बावजूद इसके फ़ेसबुक ने कैम्ब्रिज एनालिटिका और मुखबिर क्रिस विली के अकाउंट को सस्पेंड कर दिया है.

अब कंपनी को अपने कर्मियों की मीटिंग बुलाकर उनकी चिंताओं को कम करने और सवालों के जवाब देने की ज़रूरत है.

मार्क ज़करबर्ग को सार्वजनिक रूप से बोलने की भी ज़रूरत है, सिर्फ चालाक प्रतिक्रिया देने वाला ब्लॉग काफी नहीं होगा.

क्या डोनल्ड ट्रंप ने फ़ेसबुक के दम पर जीता था अमरीका के राष्ट्रपति का चुनाव?

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