वेज बर्गर जिसे काटो तो 'ख़ून' निकलता है!

  • 25 अप्रैल 2018
इम्पॉसिबल बर्गर इमेज कॉपीरइट IMPOSSIBLE FOODS

एक कैफ़े में बैठे 19 साल के इवान मेक्कॉरमेक अपने बड़े, जूसी बर्गर को ध्यान से देख रहे हैं.

ये मांस जैसा दिखता है, इसमें से खुश्बू भी नॉन वेज जैसी आती है और इसे काटने पर इसमें से ख़ून भी निकलता है.

लेकिन ये सब धोखा है.

"मुझे ये बात बहुत अच्छी लगी कि ये दूसरे वेजी बर्गर्स के मुक़ाबले ज़्यादा जूसी और क्रंची है. मुझे लगता है कि इसकी बनावट भी इसकी बड़ी वजह है."

ये बर्गर सिलिकॉन वैली की एक कंपनी इम्पॉसिबल फ़ूड्स ने बनाया है. कंपनी बताती है कि गेहूं, नारियल तेल और आलू से बनाया गया यह बर्गर किसी भी मांसाहारी को चकमा दे सकता है.

Image caption इवान मेक्कॉरमेक का मानना है कि उनके बर्गर से मांसाहारी दोस्तों को बेवकूफ बनाया जा सकता है.

दुनिया भर में कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन, पेड़ों की कटाई और पानी के इस्तेमाल का मांस उद्योग का बड़ा योगदान है.

इस बर्गर को बनाने का मुख्य मकसद पर्यावरण को बचाना है.

कंपनी के सीईओ पैट ब्राउन बताते हैं कि उनकी कोशिश है कि 2035 तक ऐसी तकनीकी बना ली जाए जिससे खाने में पशुओं का इस्तेमाल पूरी तरह ख़त्म हो जाए.

उनका मानना है कि मांस के कारोबार के लिए जानवरों को पालना एक कारखाना चलाने जैसा है. पैट मांस, मछली और डेरी तीनों उद्योगों को इसमें शामिल करते हैं.

उनका कहना है कि "ये तकनीक पृथ्वी पर जीवाश्म ईंधन उत्पादन (जैसे कोयला, मिट्टी का तेल वगैरह), परिवहन प्रणाली, खनन और पेड़ काटने से ज़्यादा घातक है."

"ये ने सिर्फ़ भारी मात्रा में ग्रीनहाउस गैस बनाता है, साथ ही सबसे ज़्यादा पानी का इस्तेमाल और उसे प्रदूषित भी करता है."

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फ़ूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइज़ेशन (FAO) के मुताबिक़, निकलने वाली कुल ग्रीनहाउस गैसों का 18 फ़ीसदी पशुपालन उद्योग से आता है.

सेंटर फ़ॉर एग्रीकल्चर एंड बायोसाइंस इंटरनेशनल के मुताबिक़ वनस्पति प्रोटीन की तुलना में पशु प्रोटीन की पैदावार में 11 गुना ज़्यादा जीवाश्म ईंधन की ज़रूरत होती है.

अमेज़न समेत दुनिया भर के जंगलों को अलग अलग कारणों से काटा जा रहा है.

हालांकि FAO ये भी बताता है कि मांस के कारोबार से न सिर्फ़ करोड़ों लोगों को रोज़गार मिलता है बल्कि यह उद्योग दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाले कुल प्रोटीन का तीसरा हिस्सा भी मुहैया कराता है.

पिछली सदी के आख़िर में मांस का उत्पादन 229 मिलियन टन रहा जिसका 2050 तक बढ़कर 465 मिलियन टन होने की उम्मीद है.

इम्पॉसिबल फ़ूड्स के बर्गर पर्यावरणविद और शाकाहारियों को पसंद आएंगे लेकिन फ़िलहाल ये अमरीका के कुछ ही रेस्टोरेन्ट में मिलेगा.

2020 तक सुपरमार्केट के लिए ये अपना उत्पादन बढ़ाने की योजना भी बना रही है. कंपनी मछली से बने उत्पादों पर भी काम कर रही है.

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