किस वजह से जीसैट-11 को फ़्रेंच गुयाना से वापस भारत लाना पड़ा?

  • 26 अप्रैल 2018
इसरो, जीसैट-11, जीसैट-6ए, अंतरिक्ष कार्यक्रम, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र इमेज कॉपीरइट ISRO

देश के अब तक के सबसे वज़नी संचार उपग्रह जीसैट-11 का प्रक्षेपण टाल दिया गया है जिसे फ़्रेंच गुयाना से छोड़ा जाना था. इसरो ने इसे वापस भारत मंगा लिया है.

विदेशी लॉन्च पैड से उपग्रह का वापस लौटना एक अप्रत्याशित घटना है.

जीसैट-11 को आरियान-5 रॉकेट से फ़्रेंच गुयाना से छोड़ा जाना था.

इसे 30 मार्च को ही लॉन्च करने के लिए फ्रेंच गुयाना भेजा गया था. आरियान की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक़ फ़िलहाल इसका प्रक्षेपण टाल दिया गया है.

ग़ौरतलब है कि साल 2018 में भारत की योजना कई उपग्रहों को लॉन्च करने की है लेकिन 29 मार्च को छोड़े गए जीसैट-6ए से 24 घंटे बाद ही संपर्क टूट गया था.

तो आख़िर क्या कारण है कि इसरो ने जीसैट-11 का प्रक्षेपण टालते हुए इसे वापस भारत मंगा लिया है? इसका प्रक्षेपण अब कब होगा? और जीसैट-11 की ख़ासियत क्या है?

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बीबीसी ने यही सवाल विज्ञान पत्रकार पल्लव बागला से किए. पढ़िए पल्लव की राय उन्हीं के शब्दों में:

जीसैट-11 इसरो का बनाया हुआ सबसे भारी भरकम, बहुत अहम और ख़ास उपग्रह है.

इसे दक्षिण अमरीका के फ़्रेंच गुयाना से फ़्रेंच रॉकेट आरियान-5 से 25 मई को प्रक्षेपित किया जाना था.

इसके टाले जाने का कारण यह है कि कुछ दिन पहले ही इसरो का बनाया हुआ सैटेलाइट जीसैट-6ए प्रक्षेपण के बाद अंतरिक्ष में खो गया था, इसरो का उससे संपर्क टूट गया था.

जीसैट-6ए जैसे कुछ पुर्जे जीसैट-11 में भी लगे हैं. इसरो उसको दोबारा टेस्ट करना चाहता है ताकि इसमें कोई कमी न हो और ये फ़ेल ना हो.

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जीसैट-11 की ख़ासियतें

जीसैट-11 उपग्रह का वज़न 5,700 किलो है. भारत के पास ऐसा रॉकेट नहीं है जिससे इतने ज़्यादा वज़न के उपग्रह का प्रक्षेपण किया जा सके इसलिए इसको फ़्रांस के आरियान-5 रॉकेट से भेजा जाना था.

भारत को सैटेलाइट पर आधारित इंटरनेट सर्विस मुहैया कराने के लिए बनाया गया है. यह बेहद शक्तिशाली है और संचार के नज़रिये से बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाला है.

इसरो इससे संचार क्रांति लाने की बात कर रहा है. यह अकेला उपग्रह कई उपग्रहों के बराबर काम करने की क्षमता रखता है.

पहली बार इसरो ने इतना बड़ा और भारी भरकम उपग्रह बनाया है. यह जियोस्टेशनरी उपग्रह है.

जब इसे ठीक कर अंतरिक्ष में भेजा जाएगा तो यह 36 हज़ार किलोमीटर ऊपर ठीक भारत के ऊपर रखा जाएगा. इसमें सैटेलाइट बेस्ड इंटरनेट कनेक्टिविटी देने की क्षमता है.

इसकी क़ीमत लगभग 500 करोड़ रुपये है. जिसे फ़्रेंच गुयाना से वापस लाने में क़रीब 50-60 करोड़ रुपये खर्च होंगे लेकिन ये ज़रूरी है ताकि असफल होने की गुंज़ाइश ना रहे.

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Image caption जीसैट-6ए

270 करोड़ का था जीसैट-6ए उपग्रह

जीसैट-6ए एक संचार उपग्रह था जिसे हैंडहेल्ड रिसीवर के ज़रिए मल्टीमीडिया संचार देने के मक़सद से भेजा गया था जिसे बनाने की लागत 270 करोड़ रुपये थी.

उससे संपर्क टूटने के कारणों की जांच अभी चल रही है.

ऐसा माना जा रहा है कि कहीं न कहीं पावर सिस्टम या एंटीना सिस्टम में ख़राबी आ गई थी जिसकी वजह से भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी से उसका संपर्क टूट गया और अब वो अंतरिक्ष में एक पत्थर की तरह चक्कर लगा रहा है.

इसरो का कहना है कि वो लगातार उससे संपर्क साधने की कोशिश कर रहे हैं जिससे 270 करोड़ के नुकसान से बचा जा सके.

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2018 इसरो के लिए बहुत अहम

2018 में इसरो का हर महीने एक लॉन्च या मिशन करने का विचार है.

कुछ संचार उपग्रह हैं, कुछ ऐसे हैं जो सेना के काम आएंगे तो कुछ दुश्मन देशों पर बहुत पैनी नज़र रखेंगे. इन्हीं के बीच एक बहुत ही अहम लॉन्च है चंद्रयान-2 का.

अक्तूबर-नवंबर के महीने में इसका लॉन्च श्रीहरिकोटा से होने की उम्मीद है. यह भारत का चांद की ओर जाने वाला दूसरा मिशन होगा.

इसमें एक ऑरबिटर, लैंडर और रोवर होगा. चंद्रयान-2 के ज़रिए भारत पहली बार अपना झंडा चांद पर पहुंचाएगा.

2018 में इसरो के कई लॉन्च हैं जिसमें पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल, जीएसएलवी मार्क-2 और जीएसएलवी मार्क-3 जिसे बाहुबली भी कहते हैं, भी शामिल हैं.

जीसैट-7ए भारत की एयरफ़ोर्स के लिए एक रडार सैट है जिसमें दिन और रात दोनों में देखने की क़ाबिलियत है और दुश्मन देश पर बहुत पैनी नज़र रख सकता है.

इसके साथ कुछ संचार उपग्रह है और कुछ अर्थ इमेजिंग उपग्रह भी हैं जिनका प्रक्षेपण होना है.

(पल्लव बागला से बीबीसी संवाददाता अभिजीत श्रीवास्तव की बातचीत पर आधारित.)

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