कम उम्र में बाल सफ़ेद क्यों हो रहे हैं?

  • 19 जुलाई 2018
सफेद बाल

"जब मैं 14-15 साल की थी, तभी मेरे बाल सफ़ेद होने लगे थे. मुझे या फिर मेरे पिता को इस बात से कोई फ़र्क नहीं पड़ा. लेकिन मेरी मां काफ़ी परेशान रहने लगी थी. वो मुझे डॉक्टर के पास ले कर गईं. डॉक्टर ने कैल्शियम सप्लीमेंट्स खाने की सलाह दी. लेकिन कुछ नहीं बदला. इस बात को अब तक़रीबन 15 साल बीत चुके हैं."

ये कहानी है चंढीगड़ में रहने वाली वर्णिका कुंडु की.

वर्णिका के बाल छोटे हैं लेकिन आधे पके और आधे काले. पहली नज़र में ये उनका फ़ैशन स्टेटमेंट लग सकता है. लेकिन उनका कहना है कि ऐसे बाल पाने के लिए उन्होंने पार्लर जा कर कुछ करवाया नहीं है बल्कि ये ख़ुद से हुआ है.

कम उम्र में बाल सफ़ेद होना एक नया ट्रेंड सा बनता जा रहा है. गूगल ट्रेंड के सर्च इंटरेस्ट से पता चला है कि पिछले दस सालों में गूगल पर 'ग्रे हेयर' यानी 'सफ़ेद बाल' सर्च करने वालों की तादाद काफ़ी बढ़ी है. ख़ासतौर पर 2015 के बाद से.

20 साल के सत्यभान भी उनमें से एक हैं जो गूगल पर इस उम्र में सफ़ेद बाल पर रिसर्च करते रहते हैं.

सत्यभान भी टीन ऐज में थे जब उन्होंने अपना पहला सफ़ेद बाल देखा. उस वक्त की अपनी पहली प्रतिक्रिया को याद करते हुए वो बताते हैं, "मुझे थोड़ी चिंता हुई. फिर मैंने गूगल किया. आख़िर इसकी वजह क्या है? मेरे पिता ख़ुद एक कार्डियोलॉजिस्ट हैं, उनकी सलाह पर मैं डॉक्टर से मिलने भी गया, फिर पता चला कि मेरे खाने-पीने की आदत, बालों पर आए दिन नए तरह के प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल कई कारण है जिससे ऐसा हुआ होगा."

स्किन और हेयर एक्सपर्ट डॉक्टर दीपाली भारद्वाज कहती हैं, "कम उम्र में बाल सफ़ेद होना एक बीमारी है. डॉक्टरी भाषा में इसे केनाइटिस कहते हैं."

इंडियन जरनल ऑफ डर्मेटोलॉजी में 2016 में छपे शोध के मुताबिक़ भारत में केनाइटिस के लिए 20 साल की उम्र तय की गई है. भारतीयों में 20 साल से या उससे पहले बाल सफ़ेद होना शुरू हो जाए, तो माना जाता है कि उसे ये बीमारी है.

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बीमारी के कारण

दिल्ली के सफदरजंग में कई सालों तक प्रैक्टिस करने वाले ट्राइकॉलोजिस्ट (बालों के डॉक्टर) डॉक्टर अमरेन्द्र कुमार कहते हैं केनाइटिस में हेयर कलर पिगमेंट पैदा करने वाले सेल में दिक्कत पैदा हो जाती है, जिसकी वजह से बाल सफ़ेद होने लगते हैं.

इसके पीछे कई कारण होते हैं. डॉक्टर अमरेन्द्र के मुताबिक़ कई बार कम उम्र में बाल सफ़ेद अनुवांशिक (जेनेटिक) कारण से होते हैं तो कई बार खाने-पीने में प्रोटीन और कॉपर की कमी और हार्मोनल वजहों से भी ये दिक्क़त पैदा हो सकती है.

शरीर में हीमोग्लोबिन का कम होना, एनीमिया, थाइरॉयड की दिक्क़त, प्रोटिन की कमी इन सब वजहों से बाल कम उम्र में सफ़ेद हो सकते हैं.

वर्णिका जब डॉक्टर से मिलीं तो उन्हें पता चला कि बालों की उनकी दिक्क़त जेनेटिक है.

अपने पिता के बारे में बताते हुए वर्णिका कहती हैं, "मेरे पिता के बाल भी कम उम्र में ही सफ़ेद हो गए थे. मेरी एक छोटी बहन भी है, उसके बाल भी मेरी ही तरह हैं. हमारे परिवार में ये दिक्कत कइयों के साथ है."

दुनिया में कई जगहों पर कम उम्र में सफ़ेद बाल क्यों होते हैं, इस पर शोध हुआ है.

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ब्रिटेन के यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रैडफोर्ड के प्रोफेसर डेसमंड टोबीन के मुताबिक यूरोप में रहने वालों के लिए 20 साल की उम्र में बाल का सफ़ेद होना आम बात है.

प्रोफ़ेसर टोबीन हेयर और स्किन पिगमेंट स्पेशलिस्ट हैं.

इस विषय पर किए गए कई शोध के अध्ययन के बाद वो इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि मानव शरीर में पाए जाने वाले 'जीन', हमारे बालों के रंग-रूप के लिए ज़िम्मेदार होते हैं. रिसर्च से ये भी पता चलता है कि अलग-अलग नस्ल के लोगों में अलग-अलग समय पर बाल सफ़ेद होने का ट्रेंड है. अफ्रीका और पूर्वी-एशियाई नस्लों में बाल एक उम्र के बाद ही सफ़ेद होने शुरू होते हैं.

भारत में 40 की उम्र के बाद बाल सफ़ेद हों तो इसे बीमारी नहीं माना जाता.

कम उम्र में सफ़ेद बाल पर अलग-अलग लोगों की प्रतिक्रिया भी अलग-अलग है. कई लोग कम उम्र में सफ़ेद बाल को स्वीकार नहीं करते. उसे छुपाने की कोशिश करते हैं. कई लोग इसे फ़ैशन स्टेटमेंट या फिर स्टाइल स्टेटमेंट में बदल देते हैं.

सत्यभान उनमें से हैं जो 20 साल की उम्र में सफ़ेद बाल के साथ नहीं रहना चाहते. इसलिए उन्होंने बाल डाई करना शुरू कर दिया है.

हालांकि डॉक्टर दीपाली इसे सही नहीं मानती. उनके मुताबिक़ इससे बालों को ज्यादा नुकसान पहुंचता है. थोड़े वक़्त के लिए ये असर ज़रूर दिखते हैं, लेकिन जैसे ही आप इनका इस्तेमाल बंद करते हैं वो बाल वापस सफ़ेद होने लगते हैं.

लेकिन वर्णिका कुंडु उनमे से हैं जिन्होंने पहले दिन से इसे स्वीकार कर लिया.

बीबीसी से बातचीत में वर्णिका कहती हैं, "कुछ लोगों को लगता है कि मैनें बाल हाई-लाइट कराए हैं. लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. कुछ ये भी कहते हैं कि उन्हें मेरे जैसे बाल चाहिए, लेकिन उन्हें मैं कैसे समझाऊं कि ये नैचुरल हैं."

क्या उनके सफ़ेद बालों को उनकी उम्र से जोड़कर कभी देखा गया?

वर्णिका पहले तो ज़ोर का ठहाका लगाती हैं, फिर कहती हैं एक बार नहीं कई बार.

"कई बार लोग मुझे देख कर पहली नज़र में उम्रदराज़ समझ बैठते हैं और फिर बातचीत में जब उन्हें मेरे सही उम्र पता चलता है तो वो माफ़ी भी मांगते हैं. लेकिन इन बातों को मैंने कभी दिल पर नहीं लिया और न ही बहुत ज़्यादा तवज्जो दी."

कई लोगों में ये भी पाया गया है कि इस बीमारी की वजह से लोग स्ट्रेस और ट्रॉमा में चले जाते हैं.

डॉक्टर अमरेन्द्र के मुताबिक़ दुनिया में तक़रीबन 5 से 10 फ़ीसदी लोग केनाइटिस के शिकार हैं.

आख़िर इससे निजात कैसे पाई जाए?

इस सवाल के जवाब में डॉक्टर अमरेन्द्र कहते हैं, "इस बीमारी का इलाज मुश्किल है. एक बार बाल सफ़ेद होना शुरू हो जाएं तो जितना मुश्किल उनका वापस काला होना है उतना ही मुश्किल बाकी के बचे बालों का सफ़ेद होने से रोकना है."

केनाइटिस के लिए दवाइयां और शैम्पू भी बाज़ार में उपलब्ध हैं, लेकिन उनसे केवल 20 से 30 फ़ीसदी सफलता ही मिल सकती है.

डॉ. दीपाली की माने तो कम उम्र में बाल सफ़ेद न हो इसके लिए खाने पीने पर शुरुआत से ही ध्यान देने की ज़रूरत है. खाने में बायोटिन ( एक तरह का विटामिन होता है) का इस्तेमाल करें, बालों में किसी तरह का केमिकल न लगाएं. अक्सर एंटी डेंडरफ शैम्पू में बालों को नुकसान पहुंचाने वाले केमिकल का प्रयोग किया जाता है. ऐसे शैम्पू सप्ताह में सिर्फ दो बार ही लगाए. डॉ. दीपाली के मुताबिक बालों में तेल ज्यादा लगाने से इस बीमारी में कोई फ़र्क नहीं पड़ता.

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