चीन में गूगल के प्रोजेक्ट का विरोध

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गूगल के सैकड़ों कर्मचारी एक बार फिर खुद अपनी ही कंपनी का विरोध कर रहे हैं. उन्होंने लिखित में विरोध दर्ज किया है.

चीन में गूगल सेंसर सर्च इंजन योजना पर काम कर रहा है और उसके कर्मचारी इसी का विरोध कर रहे हैं.

उन्होंने कंपनी से अधिक पारदर्शी होने का आग्रह किया है.

उन्होंने कहा, "अभी काम को लेकर नैतिक निर्णय लेने के लिए हमारे पास पर्याप्त सूचनाएं नहीं हैं."

गूगल ने इस पर कोई प्रतिक्रिया देने से इंकार कर दिया है. गूगल ने अब तक इस प्रोजेक्ट के बारे में सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कहा है.

गूगल की पेरेंट कंपनी अल्फाबेट ने सेंसरशिप क़ानून और कथित तौर पर सरकारी हैकिंग के विरोध में आठ साल पहले चीन छोड़ दिया था.

ड्रैगनफ्लाई

हालांकि पिछले महीने आई कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक गूगल गुपचुप तरीके से चीन के लिए सर्च इंजन पर काम कर रहा है, जिसे कंपनी के अंदर ड्रैगनफ्लाइ का नाम दिया गया है.

कुछ वेबसाइट्स, कुछ शब्द जैसे मानवाधिकार और धर्म जैसे शब्दों को यह सर्च इंजन ब्लॉक करेगा. इसे अभी चीनी सरकार की अनुमति मिलना बाकी है.

इससे कंपनी के कुछ कर्मचारी नाराज़ हो गये हैं, जिन्हें डर है कि वो अनजाने में उस तकनीक पर काम कर रहे हैं जो चीन की जनता की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाने में मदद करेगा.

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कर्मचारी पहली बार नहीं कर रहे विरोध

विभिन्न मीडिया संस्थानों से साझा की गई चिट्ठी में लिखा गया है, "हमें तत्काल और अधिक पारदर्शिता चाहिए, हम क्या बना रहे हैं किस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं, गूगल कर्मचारियों को यह जानने की ज़रूरत है.''

यह पहली बार नहीं है जब गूगल के कर्मचारी अपनी ही कंपनी के किसी निर्णय के ख़िलाफ़ बोले हैं.

इसी साल अप्रैल में हज़ारों कर्मचारियों ने अमरीकी सैन्य उद्देश्यों के लिए ड्रोन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल को लेकर कंपनी का विरोध किया था.

इसके बाद गूगल ने पेंटागन के साथ अपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अनुबंध को ख़त्म कर दिया.

चीन, इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाली दुनिया की सबसे बड़ी आबादी है लेकिन इस अमरीकी कंपनी को चीन में अपने पांव जमाने में कंटेंट प्रतिबंधों और अन्य बाधाओं के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

चीन में गूगल के तीन दफ़्तर होने के बावजूद वहां फ़ेसबुक, ट्विटर, गूगल और इंस्टाग्राम सभी प्रतिबंधित हैं.

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