सिगरेट पीने की लत से ऐसे पा सकते हैं छुटकारा

  • 26 अगस्त 2018
सिगरेट, स्मोकिंग, धूम्रपान, तंबाकू इमेज कॉपीरइट Getty Images

सरकार का कहना है कि भारत में हर साल 10 लाख लोग लोग सिगरेट पीने से मरते हैं. ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे (2016-17) के मुताबिक़ भारत में सिगरेट पीने वालों की संख्या 10 करोड़ से ज़्यादा है.

इन आंकड़ों को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने एक सितंबर से सिगरेट के पैकेट पर एक हेल्पलाइन नंबर लिखने का फ़ैसला किया है. ये नंबर है: 1800-11-2356.

भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देश के मुताबिक अगले महीने से सिगरेट के पैकेट पर लिखा होगा - आज ही छोड़ें, कॉल करें 1800-11-2356.

नए पैकेट में चित्र और चेतावनी दोनों ही बदली होगी. हेल्पलाइन नम्बर के साथ पैकेट पर 'तंबाकू से कैंसर होता है' या फिर 'तंबाकू से दर्दनाक मौत होती है' लिखा होना भी जरूरी होगा.

सिगरेट पीने की लत कैसे छोड़ें?

सरकार के नए आदेश के बाद सब सवाल पूछ रहे हैं कि क्या हेल्पलाइन नम्बर से सिगरेट पीने वाले, सिगरेट पीना छोड़ देंगे?

यही जानने के लिए हमने भी राष्ट्रीय तंबाकू मुक्ति सेवा केन्द्र पर फोन किया.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

वैसे तो ये सेवा केन्द्र 2016 से दिल्ली में चल रहा है. हेल्पलाइन पर फोन करते ही सबसे पहले रिकॉर्डेड आवाज़ आती है - हम आपके तंबाकू छोड़ने के फ़ैसले का स्वागत करते हैं. हमारे काउंसलर जल्द ही आपसे बात करेंगे.

कई बार काउंसलर व्यस्त होने की वजह से बात नहीं करते और फोन कट जाता है.

इस हेल्पलाइन पर तीन बार फोन करने के असफल प्रयास के बाद काउंसलर के पास हमारा नम्बर भी लगा. फ़ोन पर एक महिला की आवाज़ सुन कर वो थोड़ा हैरान थी.

काउंसलर से जब उनकी हैरानी का सबब पूछा तो उन्होंने खुद बताया कि देश में केवल तीन फ़ीसदी महिलाएं ही तंबाकू का सेवन करती हैं.

सिगरेट छोड़ने के हेल्पलाइन नंबर पर फ़ोन करने वाले ज़्यादातर पुरूष होते हैं. महिलाएं फ़ोन करती भी हैं तो अपने पति-भाई या दूसरे सगे संबंधियों के लिए करती हैं.

फिर शुरू हुआ बातचीत का सिलसिला.

काउंसलर पहले आपसे आपके सिगरेट पीने का इतिहास पूछतीं हैं - मसलन कब से सीगरेट पी रहे है? आपको लत कब से लगी है? एक दिन में कितनी पीते हैं? वगैरह वगैरह..

उनके मुताबिक ये जानना इसलिए ज़रूरी है ताकि ये पता लगा सकें कि उस शख़्स के लिए सिगरेट की लत छोड़ना कितना आसान या मुश्किल है.

इतना जान लेने के बाद, काउंसलर सिगरेट पीने वाले से ही पूछते हैं - सिगरेट छोड़ने की डेडलाइन क्या है?

इसका मक़सद ये है कि पता लगाया जा सके - लत छोड़ने के लिए आप कितने तत्पर हैं और संजिदा भी.

फिर शुरू होती है क्लास - लत छुड़वाने की.

पहली सलाह - सुबह उठते ही 2 ग्लास गुनगुने पानी में नींबू निचोड़ कर लें. पानी में शहद का इस्तेमाल भी कर सकते हैं.

दूसरी सलाह - सिगरेट पीने का जब भी मन करें, "खुद को समझाएं कि मुझे सिगरेट पीना छोड़ना है." सिगरेट छोड़ने के लिए इच्छाशक्ति सबसे ज़्यादा ज़रूरी है.

तीसरी सलाह - इच्छाशक्ति के साथ, जब आप सिगरेट छोड़ने की डेडलाइन तय कर लें और उसके बाद आपको सिगरेट पीने की तलब लगे, तो आप आराम से बैठें, लंबी सांस भरे और पानी पी लें. ऐसा करने से आपका ध्यान भटकेगा.

चौथी सलाह - अदरक और आंवला को कद्दू-कस कर उसे सूखा लें और नींबू और नमक डाल कर डिब्बे में भर कर हमेशा अपने साथ रखें. जब भी सिगरेट पीने की तलब लगे, आप थोड़ी थोड़ी देर पर इस पेस्ट का सेवन कर सकते हैं. इसके आलावा मौसम्मी, संतरा और अंगूर जैसे फल और उनका रस पीना भी सिगरेट की तलब मिटाने में मददगार होता है.

हेल्पलाइन नंबर पर ये सलाह देने के बाद काउंसलर आपके साथ हफ्ते भर के अंदर फॉलो-अप कॉल भी करती हैं.

फ़िलहाल एक दिन में इस हेल्पलाइन नंबर पर 40-45 कॉल आते हैं. काउंसलर के मुताबिक जिस दिन अख़बारों में विज्ञापन छप जाता है उस दिन कॉल की संख्या ज़्यादा हो जाती है.

ये हेल्पलाइन सेंटर सुबह आठ बजे से शाम के आठ बजे तक काम करता है. यहां फ़िलहाल 14 काउंसलर काम करते हैं.

हेल्पलाइन नंबर पर मिलने वाले मदद के मुताबिक सिगरेट या तंबाकू छोड़ने के कोशिश के शुरूआती दिनों में स्वाभाव में चिड़चिड़ापन, घबराहट, छटपटाहट होती है. ये लक्षण इस बात पर निर्भर करता है कि किसको, कितनी सिगरेट पीने की आदत है और कितने दिन से आदत है.

हेल्पलाइन नंबर - कितना फ़ायदेमंद ?

मैक्स इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर के चेयरमैन डॉ. हरित चतुर्वेदी के मुताबिक नए तरीके के चित्र-चेतावनी से दो तरीके के फ़ायदे होंगे.

अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बीबीसी से कहा, "मैंने आज तक कोई ऐसा इंसान नहीं देखा तो तंबाकू की लत छोड़ना नहीं चाहता. इस तरीके से हेल्पलाइन नंबर सिगरेट पर लिखे होने से उनको पता चलेगा कि आख़िर सिगरेट छोड़ने के लिए जाना कहां है, किनसे बात करनी है. इसके आलावा जो लोग सिगरेट पीना शुरू कर रहें हैं वो पहले से ही सावधान हो जाएंगे."

डॉ. हरित चतुर्वेदी के मुताबिक भारत में पिछले दिनों तंबाकू के पैकेट पर छपे चेतावनी की वजह से साल दर साल ऐसे लोगों की संख्या लगातार घट रही है.

आस्ट्रेलिया में सरकार ने 2006 में सिगरेट के पैकेट पर इसी तरह से हेल्पलाइन नंबर लिखना शुरू किया था. ये तरीका वहां कितना कारगर रहा, इस पर 2009 में एक रिपोर्ट सामने आई. इस रिपोर्ट के मुताबिक पैकेट पर हेल्पलाइन नंबर छपने के बाद हेल्पलाइन नंबर पर फोन करने वालों की संख्या बढ़ी, जिससे ये अनुमान लगाया जा सकता है कि छोड़ने वालों को असली तरीका पहले पता नहीं था.

दुनिया के 46 देशों में तंबाकू के उत्पाद पर पैकेजिंग के समय ऐसे नंबर लिखे होते हैं.

वॉलंट्री हेल्थ एसोसिएशन ऑफ इंडिया की सीईओ भावना मुखोपाध्याय के मुताबिक, "ग्लोबल अडल्ट टोबैको सर्वे (2016-17) में ये बात सामने आई है कि 62 फ़ीसदी सिगरेट पीने वाले, 54 फ़ीसदी बीड़ी पीने वालों ने चित्र चेतावनी देख कर तंबाकू छोड़ने का निश्चय किया. ये अपने आप में बहुत बड़ी बात है."

डॉ. चतुर्वेदी के मुताबिक, " एक महीने तक कोई सिगरेट नहीं छूता तो ये वापस सिगरेट पर लौटने की संभावना कम हो जाती है. लेकिन छह महीने तक अगर कोई न पीए, तो दोबारा सिगरेट पीना शुरू करने की संभवना खत्म हो जाती है."

लोगों की राय

बीबीसी ने भी कई लोगों से इस नए सरकारी आदेश पर उनकी राय जाननी चाही.

दिल्ली में मास्टर्स की पढ़ाई करने वाली सदफ़ खान के मुताबिक, "सिगरेट के पैकेट पर तो आज भी वार्निंग लिखी होती है, लेकिन पीने वाले तो आज भी पीते हैं. मैं भी आज भी पीती हूं. हेल्पलाइन नंबर पैकेट पर छापने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा."

मुंबई की रहने वाले मलकीत सिंह कहते हैं, "जब तक घर परिवार का दवाब नहीं होता, या भी बीमार नहीं पड़ते, तब तक कोई भी सिगरेट पीना नहीं छोड़ता. सिगरेट पीना शुरू करने के लिए कोई वजह होती है और छोड़ने के पीछे भी."

आंकड़े क्या कहते हैं?

ग्लोबल अडल्ट टोबेको सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक देश में 10.7 फ़ीसदी वयस्क तंबाकू का सेवन करते हैं. देश में 19 फ़ीसदी पुरुष और 2 फ़ीसदी महिलाएं तंबाकू लेते हैं.

सिर्फ़ सिगरेट पीने की बात करें तो 4 फ़ीसदी वयस्क सिगरेट पीते हैं. सिगरेट पीने वालों में 7.3 फ़ीसदी पुरूष हैं और 0.6 फ़ीसदी महिलाएं हैं.

WHO की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय महिलाओं में सिगरेट से ज्यादा बीड़ी पीने की आदत है. देश में 1.2 फ़ीसदी महिलाएं बीड़ी पीती हैं.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

भारत में सिगरेट से जुड़े क़ानून

2014 में भारत में क़ानून बना जिसके बाद सिगरेट के पैकेट पर तस्वीर के साथ 'सिगरेट पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है' लिखना अनिवार्य किया था. लेकिन सिगरेट बनाने वाली कंपनियों ने सरकार के इस फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज किया. 2016 ने सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के हक में फ़ैसला सुनाया.

भारत में तंबाकू से जुड़े उत्पाद का विज्ञापन पर बैन है. 18 साल से कम उम्र के बच्चे तंबाकू के उत्पाद नहीं बेच सकते. सार्वजनिक जगहों पर सिगरेट पीने पर पाबंदी है. ऐसा करते पाए जाने पर जुर्माने का भी प्रावधान है.

ये भी पढ़े:

सीरिया, इराक़ से तुलना: राहुल के तर्क में कितना दम?

ये 'मोमो' आख़िर बला क्या है?

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए