एक साल बाद फिर से काम करने लगा कटा हुआ हाथ

  • 20 अप्रैल 2019
चयांक कुमार, मुंबई इमेज कॉपीरइट Chayank Kumar
Image caption चयांक कुमार

''वो 10 अप्रैल 2018 का दिन था. मैं हर रोज़ की तरह कॉलेज के लिए निकला था. मैं रोज़ाना ट्रेन से कॉलेज जाता था. उस दिन भी मैं ट्रेन पर चढ़ने की कोशिश कर रहा था. तभी ट्रेन चल पड़ी और मेरा पैर फिसल गया. मैं ट्रेन और ट्रैक के बीच में फंस गया था. ट्रेन मेरे बाएं हाथ के ऊपर से गुज़री और हाथ कोहनी से कटकर अलग हो गया. लेकिन मेरा बैग ट्रेन में फंस गया और मैं साथ में घिसटता चला गया.''

मुंबई के रहने वाले चयांक कुमार उस दिन हमेशा के लिए अपना हाथ खो देते लेकिन समय पर अस्पताल पहुंचने के कारण उन्हें फिर से अपना हाथ मिल पाया. चयांक का कटा हुआ हाथ न सिर्फ़ जुड़ गया बल्कि छह महीने बाद उसमें हरकत भी होने लगी.

अपने साथ हुई दुर्घटना के बारे में चयांक बताते हैं, ''जब मैं ट्रेन से अलग हुआ तो देखा कि मेरा हाथ कट गया था और थोड़ी दूरी पर पड़ा था. मेरे हाथ से बहुत ख़ून बह रहा था और तेज़ दर्द था. मैं जैसे बेहोश होने को था. लेकिन मैंने किसी तरह अपना हाथ उठाया और प्लेटफ़ॉर्म की तरफ़ बढ़ा. मैंने एक शख़्स से मुझे ऊपर खींचने के लिए कहा. मैं किसी तरह प्लेटफ़ॉर्म पर बैठा और अपनी मां को फ़ोन करने लगा लेकिन मेरे हाथ में इतना ख़ून लगा था कि फोन तक अनलॉक नहीं हुआ. मैंने किसी और व्यक्ति की मदद से अपनी मां को फ़ोन किया.''

चयांक को ये नहीं पता था कि कटा हुआ अंग कैसे जोड़ा जा सकता है. इसमें उनकी मदद रेलवे कर्मचारियों और सरकारी अस्पताल ने की.

चयांक बताते हैं, ''जब मैं अपनी मां को फ़ोन कर रहा था तब तक स्टेशन मास्टर और जीआरपी पुलिस आ गई. मुझे स्ट्रेचर पर एक एंबुलेस में ले जाया गया और पास के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया. फिर वहां से मेरी मां मुझे कोकीलाबेन अस्पताल लेकर गईं. वहां मेरी सर्जरी की गई जो क़रीब आठ घंटे चली. बाद में मेरी तीन सर्जरी और हुईं.''

सर्जरी के तुरंत बाद चयांक का हाथ ठीक नहीं हुआ. उसमें संवेदना और हलचल महसूस होने में करीब छह महीने का वक़्त लगा.

चयांक ने बताया, ''सर्जरी के बाद हाथ में कोई हलचल नहीं थी. कुछ महसूस नहीं हो रहा था. फिज़ियोथेरेपिस्ट से भी इलाज चल रहा था. फिर सितंबर-अक्टूबर में उंगलियों में हरकत होनी शुरू हुई. अभी तो हाथ में ठंडा-गर्म का पता चलता है. किसी के छूने का पता चलता है. पूरी तरह मूवमेंट तो नहीं है पर सुधार हो रहा है. कभी-कभी तो लगता था कि पता नहीं हाथ ठीक होगा या नहीं लेकिन मेरी मां हमेशा मेरी हिम्मत बढ़ाती रहीं.''

इंजीनियरिंग कर रहे चयांक कुमार का हाथ तो बच गया लेकिन सही जानकारी न होने पर ऐसी ही दुर्घटनाओं में कई लोगों को कटा हुआ अंग वापस नहीं मिल पाता. शरीर से पूरी तरह अलग हो चुके अंग को दोबारा जोड़ा जा सकता है लेकिन उसके लिए कुछ सावधानियां ज़रूरी होती हैं.

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Image caption अस्पताल में अपनी मां के साथ चयांक कुमार

कोकिलाबेन अंबानी अस्पताल में चयांक कुमार का इलाज करने वाले प्लास्टिक सर्जन डॉक्टर क़ाज़ी अहमद कहते हैं कि चयांक का हाथ इसलिए बच पाया क्योंकि वो समय पर और सही तरीके़ से अस्पताल पहुंच गया था. चार घंटे के अंदर ही उनकी सर्जरी हो गई थी.

डॉक्टर क़ाज़ी अहमद ने ऐसे मामले में बरती जाने वाली सावधानियों और इस ख़ास सर्जरी के बारे में विस्तार से बताया-

कैसे रखें कटा हुआ अंग

सबसे ज़्यादा ज़रूरी है कि कटे हुए अंग को ख़राब होने से पहले अस्पताल लाना ताकि सही समय पर सर्जरी की जा सके. जब तक वो शरीर से जुड़ा होता है तब तक रक्त प्रवाह के ज़रिए कोशिकाओं को ऑक्सीजन मिलती रहती है लेकिन कट जाने के बाद ऑक्सीजन न मिलने से कोशिकाएं मरने लगती हैं.

कोशिकाओं के निष्क्रिय होने से पहले अंग को शरीर से जोड़ना ज़रूरी है ताकि उसमें रक्त प्रवाह शुरू हो जाए. इसलिए इस बात का ध्यान देना है कि जो हिस्सा कट गया है वो थोड़ा ठंडा रहे और उसका मेटाबॉलिज्म बना रहे यानि उसमें जान रहे.

इसके लिए कटे हुए अंग को सलाइन या साफ़ पानी से धोएं. फिर एक साफ़ कपड़े में हल्का लपेट दें. कपड़े से टाइट बांधें नहीं, बस लपेटें. जैसे रुमाल या गीले तौलिये का इस्तेमाल कर सकते हैं. फिर उसे एक पॉलिथिन में डाल दें. इस पॉलिथिन को फिर एक दूसरी पॉलिथिन में डालना है जिसमें ठंडा पानी और बर्फ़ हो. इससे कटा हुआ हिस्सा ठंडा रहेगा लेकिन बर्फ़ के सीधे संपर्क में नहीं होगा.

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उस कटे हुए अंग पर सीधा बर्फ़ नहीं लगनी चाहिए. बर्फ़ जम जाने से वो ख़राब हो जाएगा. उसे कोल्ड इंजरी हो सकती है. ठंडा रखने से उसका मेटाबॉलिज्म बना रहता है और निष्क्रिय होने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है. इससे सर्जरी के सफल होने की संभावना बढ़ जाती है.

वहीं, जो हिस्सा शरीर से जुड़ा है उसे गीले साफ़ कपड़े से लपेट दें ताकि ख़ून बहना रुक जाए. उसमें हल्के प्रेशर की ड्रेसिंग कर दें. अगर ख़ून बहना नहीं रुका तो जान का ख़तरा हो सकता है. गुप्तांगों के कटने पर भी यही प्रक्रिया होती है.

बचाने के लिए कितना समय

कटे हुए अंग की कितने समय में सर्जरी हो जानी चाहिए, ये इस बात पर निर्भर करता है कि कौन सा अंग कटा है. जैसे उंगली कटती है तो उसे अच्छी तरह प्रीज़र्व करने पर 10 से 12 घंटे का समय भी मिल जाता है. कई बर 24 घंटे तक भी उंगली बचाई जा सकती है.

लेकिन, जितना ऊपर का अंग होता है उसे बचाने का समय भी कम होता जाता है. जैसे कि कोहनी, बांह या पूरा हाथ कट जाए तो अधिकतम समय चार घंटे तक हो सकता है. इतने समय में हाथ को जोड़ना ज़रूरी है. क्योंकि जिस अंग में जितनी ज़्यादा मांसपेशियां होंगी, उसे बचाने का समय भी कम होगा.

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कैसे होता है ऑपरेशन

इस सर्जरी में सामान्य स्टीचिंग नहीं होती, बल्कि माइक्रोवैस्क्यूलर सर्जरी होती है. ये एक नस जोड़ने वाली प्रक्रिया है. इसमें बहुत बारिक नसों और नलियों को जोड़ा जाता है. ये सर्जरी ऑपरेटिंग माइक्रोस्पोक में होती है और इसमें बाल से भी पतले धागों से सिलाई की जाती है ताकि रक्त प्रवाह फिर से शुरू हो सके.

ये टांके सामान्य घाव पर लगने वाले धागे से नहीं लगाए जा सकते और न ही इन्हें खोला जाता है. ये शरीर में ही रहकर जोड़ी गईं मांसपेशियों को सहयोग देते हैं. ये सर्जरी वो प्लास्टिक सर्जन ही कर सकते हैं जिनके पास माइक्रोवेस्क्यूलर सर्जरी की विशेषज्ञता हो.

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सर्जरी के बाद

कटे हुए अंग को ठीक होने में कितना समय लगेगा ये इस बात पर निर्भर करता है कि चोट कितनी बड़ी है. जितनी बड़ी चोट होती है उसे ठीक होने में भी उतना ही समय लगता है. आगे का रास्ता भी थोड़ा मुश्किल होता है लेकिन धीरे-धीरे रिकवरी हो जाती है. बाद में भी छोटी-मोटी सर्जरी की ज़रूरत पड़ सकती है.

जुड़ने के बाद शरीर का वो हिस्सा निष्क्रिय लगता है और उसमें हरकत आने में 4 से 6 महीने का समय लग जाता है. अगर सर्जरी अच्छी तरह की गई हो तो आमतौर पर अंग में सेंसेशन आ जाता है. बीच-बीच में सेंसेशन कम-ज़्यादा होता रहता है. इस इलाज में ऑर्थोपेडिक डॉक्टर और फिजियोथेरेपिस्ट की भी ज़रूरत होती है.

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