चंद्रयान 2: इसरो के ‘विक्रम लैंडर’ की इस तस्वीर का सच

  • 10 सितंबर 2019
नासा इमेज कॉपीरइट NASA
Image caption सोशल मीडिया पर इस तस्वीर को शेयर कर रहे हैं भारतीय यूज़र

अंतरिक्ष से खींची गई चंद्रमा के सतह की एक फ़ोटो सोशल मीडिया पर इसरो द्वारा भेजे गए 'विक्रम लैंडर' की बताकर शेयर की जा रही है.

इस वायरल तस्वीर के साथ लोग यह दावा कर रहे हैं कि 'चाँद का चक्कर लगा रहे ऑर्बिटर ने विक्रम लैंडर की ये थर्मल तस्वीर ली है जिसे इसरो ने जारी किया है'.

47 दिनों की लंबी यात्रा के बाद शनिवार, 7 सितंबर 2019 को जब चंद्रयान-2 का विक्रम लैंडर चाँद की सतह से महज 2.1 किलोमीटर दूर था, तब भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के बेंगलुरु सेंटर से उसका संपर्क टूट गया था.

इमेज कॉपीरइट SM Viral Post
Image caption इसी संदेश के साथ सैकड़ों बार यह फ़ोटो सोशल मीडिया पर शेयर की गई है
इमेज कॉपीरइट SM Viral Post

मंगलवार सुबह इसरो ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर यह सूचना दी है कि "चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर ने विक्रम लैंडर की लोकेशन पता कर ली है, लेकिन उससे संपर्क अभी तक स्थापित नहीं किया जा सका है. विक्रम लैंडर से संपर्क बनाने की सभी संभव कोशिशें जारी हैं."

इससे पहले रविवार को इसरो प्रमुख के सिवन ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा था कि "इसरो को चाँद की सतह पर विक्रम लैंडर की तस्वीरें मिली हैं. ऑर्बिटर ने विक्रम लैंडर की थर्मल इमेज ली है जिसे देखकर लगता है कि विक्रम लैंडर की चांद पर हार्ड लैंडिंग हुई है."

लेकिन जो तस्वीर सोशल मीडिया पर विक्रम लैंडर की बताकर शेयर की जा रही है वो भ्रामक है.

इसरो ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट के ज़रिये, आधिकारिक फ़ेसबुक और ट्विटर अकाउंट से या फ़िर किसी प्रेस रिलीज़ के ज़रिये विक्रम लैंडर की कोई तस्वीर जारी नहीं की है.

इमेज कॉपीरइट NASA

वायरल फ़ोटो का सच

रिवर्स इमेज सर्च से पता चलता है कि जिस तस्वीर को 'भारतीय ऑर्बिटर द्वारा ली गई विक्रम लैंडर की थर्मल इमेज' बताकर शेयर किया जा रहा है, वो दरअसल अमरीकी स्पेस एजेंसी नासा के मिशन 'अपोलो-16' की तस्वीर है.

18 जून 2019 को नासा ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर एक फ़ीचर स्टोरी छापी थी जिसमें इस तस्वीर का इस्तेमाल किया गया था.

इस फ़ीचर स्टोरी के अनुसार यह अपोलो-16 की लैंडिंग साइट की तस्वीर है.

नासा का 'अपोलो-16' लूनर लैंडिंग मिशन 16 अप्रैल 1972 को 12 बजकर 54 मिनट पर अमरीका के फ़्लोरिडा में स्थित कैनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च किया गया था.

इमेज कॉपीरइट NASA
Image caption मिशन अपोलो-16 में शामिल रहे अंतरिक्ष यात्री (बाएं से दाएं) थॉमस मैटिंग्ली, कमांड पायलट जॉन यंग (बीच में) और चार्ल्स एम ड्यूक

यह चाँद पर उतरने के लिए नासा के एक चालक दल का वाहन था. तीन लोगों के इस चालक दल की अगुवाई कमांडर जॉन डब्ल्यू यंग कर रहे थे.

नासा के अपोलो-16 मिशन के दौरान तीनों अंतरिक्षयात्रियों ने चाँद पर कुल 71 घंटे, दो मिनट का वक़्त बिताया था.

इस दौरान अंतरिक्ष यात्रियों ने 20 घंटे, 14 मिनट में कुल तीन अलग चरणों में चाँद पर चहलक़दमी की थी. 11 दिनों तक चला नासा का यह मिशन 27 अप्रैल 1972 को पूरा हुआ था.

इमेज कॉपीरइट Twitter
Image caption फ़र्ज़ी अकाउंट

इसरो और के सिवन के फ़र्ज़ी अकाउंट

सोशल मीडिया (ख़ासतौर से ट्विटर) पर बीते कुछ दिनों में भारतीय स्पेस एजेंसी और इसरो प्रमुख के सिवन के नाम से कई फ़र्ज़ी अकाउंट बनाये गए हैं जिनके साथ ये दावा किया जा रहा है कि वो उनके आधिकारिक अकाउंट हैं.

लेकिन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने स्पष्ट किया है कि ये सभी प्रोफ़ाइल और अकाउंट फ़र्ज़ी हैं.

इमेज कॉपीरइट Twitter

इसरो की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित सबसे ताज़ा अपडेट के अनुसार के सिवन का सोशल मीडिया पर कोई पर्सनल अकाउंट नहीं है. उनकी तस्वीरों वाले फ़र्ज़ी अकाउंट्स से दी जा रहीं सूचनाओं पर विश्वास न करें.

इसी के साथ इसरो ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर संगठन के आधिकारिक ट्विटर, फ़ेसबुक और यू-ट्यूब लिंक जारी किये हैं.

(इस लिंक पर क्लिक करके भी आप हमसे जुड़ सकते हैं)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार