महिला रोबोट 'व्योममित्र' को अंतरिक्ष भेजेगा इसरो

  • 23 जनवरी 2020
इसरो, महिला रोबोट 'व्योममित्र' को अंतरिक्ष की सैर कराएगा इमेज कॉपीरइट IMRAN QURESHI

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (इसरो) ने अपनी पहली महिला ह्यूमॉयड (इंसान जैसी दिखने वाली रोबोट) का पहला प्रोटोटाइप पेश किया है. इस रोबोट का नाम 'व्योममित्र' है.

दिसंबर 2021 में भेजे जाने वाले मानव अंतरिक्ष मिशन के व्योममित्र, पुरुष अंतरिक्षयात्रियों की मदद करेगी.

"गगनयान" प्रोग्राम के तहत अंतरिक्षयात्रियों के जाने से पहले व्योममित्र को इस साल के आखिर में और अगले साल भी मानव रहित मिशन में भेजा जाएगा.

बेंगलुरु में इसी सप्ताह हुई तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी "मानव अंतरिक्ष यान और अन्वेषण: वर्तमान चुनौतियां और भविष्य के रुझान" में व्योममित्र को सबके सामने पेश किया गया. कार्यक्रम में ये सबके लिए आकर्षण का केंद्र बनी रही.

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कार्यक्रम में मौजूदा लोग उस समय हैरान रह गए जब व्योममित्र ने खुद अपना परिचय दिया.

रोबोट ने कहा, "सभी को नमस्कार. मैं व्योममित्र हूं और मुझे अर्ध मानव रोबोट के नमूने के रूप में पहले मानवरहित गगनयान मिशन के लिए बनाया गया है."

व्योममित्र के शब्दों में, "मैं पूरे यान के मापदंडों पर निगरानी रखूंगी, आपको सचेत करूंगी और जीवनरक्षक प्रणाली का काम देखूंगी. मैं स्विच पैनल के संचालन सहित विभिन्न काम कर सकती हूं."

तिरुवनंतपुरम स्थित विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) के निदेशक एस सोमनाथ ने बीबीसी से कहा, "मानवरहित मिशनों के परीक्षणों के बाद बहुत सी संभावनाएं होंगी. ये अंतरिक्षयात्रियों के सवालों के जवाब दे सकती हैं. ये एक दोस्त हो सकती है, जिससे अतंरिक्षयात्री बात कर सकते हैं. अमेज़न की एलेक्सा की तरह ये मनोवैज्ञानिक पहलू को भी हैंडल कर सकती हैं."

इसरो के चेयरमैन डॉ के. सिवन ने बीबीसी से कहा, "फिलहाल मानवरहित मिशन में इसका इस्तेमाल पर्यावरण कंट्रोल सपोर्ट सिस्टम को टेस्ट करने के लिए होगा. ये अतंरिक्षयात्रियों की तरह की काम करेगी."

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सोमनाथ के मुताबिक़, "कांफ्रेस में जो प्रोटोटाइप दिखाया गया, उस पर फिलहाल और काम किया जा रहा है. अब उसमें कई सारे फीचर जोड़े जाएंगे. हम ह्यूमॉयड के तकनीकी पहलू पर काम करेंगे, जिससे वो आवाज़ों को पहचानने और कुछ और काम करने में सक्षम होगी."

सोमनाथ कहते हैं, "दिखने में ये अलग हो सकती है, लेकिन ये एल्गोरिदम लॉजिक पर ही आधारित होंगे. फिलहाल ये नहीं कहा जा सकता, कितने ह्यूमनोइड बनाए जाएंगे. बाद में ये ह्यूमॉयड इंसानों की मदद करेंगे."

वो कहते हैं, "इनमें से एक काम कार्बन डाइऑक्साइड सिलेंडर को बदलने का भी हो सकता है, ताकि मुश्किल स्थितियों में अंतरिक्षयात्री जीवित रह सकें."

गगनयान प्रोग्राम के लिए इसरो भारतीय वायु सेना के तीन पायलटों का चयन कर चुका है, जो फिलहाल रूस में ट्रेनिंग ले रहे हैं.

सिवन ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा है कि दिसंबर 2021 में भारत के मानव मिशन को अंतरिक्ष में भेजने से पहले इसरो दो मानवरहित मिशन - दिसंबर 2020 और जून 2021 - में अंतरिक्ष में भेजेगा.

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