कोरोना लॉकडाउन: ज़ूम ऐप इस्तेमाल कर रहे हैं तो अलर्ट हो जाइए

ज़ूम मीटिंग

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भारत में कोरोनावायरस के मामले

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स्रोतः स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय

11: 30 IST को अपडेट किया गया

ज़ूम मीटिंग ऐप को लेकर गाइडलाइन जारी करते हुए भारत सरकार ने गुरुवार को कहा है कि यह ऐप वीडियो कॉन्फ्रेंस के लिए सुरक्षित नहीं है.

सरकार ने उन लोगों के लिए गाइडलाइन जारी की हैं जो निजी चीज़ों के लिए ज़ूम का इस्तेमाल कर रहे हैं.

कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से दुनिया के अधिकतर देशों में लॉकडाउन जारी है और लोग घरों से काम कर रहे हैं. ऑफिस से दूर होने की वजह से मीटिंग्स के लिए अधिकतर लोग ज़ूम मीटिंग ऐप का इस्तेमाल कर रहे हैं. लॉकडाउन के दौर में ज़ूम ऐप अचानक से चर्चा में आ गया है.

गृह मंत्रालय ने गुरुवार को जारी गाइडलाइन में कहा, ''ज़ूम ऐप व्यक्तिगत स्तर पर भी इस्तेमाल के लिए सुरक्षित नहीं है.''

सरकार ने कहा कि गाइडलाइन के ज़रिए आप किसी भी अनधिकृत व्यक्ति का हस्तक्षेप रोक सकते हैं. पासवर्ड और यूजर एक्सेस के जरिए डीओएस अटैक को भी रोका जा सकता है. गृह मंत्रालय की गाइडलाइंस के मुताबिक, ज़्यादातर सेटिंग लॉग-इन करके की जा सकती हैं या फिर अपने लैपटॉप या फोन में ऐप डाउनलोड करके की जा सकती हैं.

इसके पहले भी ज़ूम मीटिंग ऐप में प्राइवेसी को लेकर सवाल उठे थे और कंपनी ने भी माना था कि कुछ ख़ामियां हैं.

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ज़ूम ऐप पर दि सिटिज़न लैब की रिपोर्ट

दि सिटिज़न लैब की टीम ने पाया है कि ज़ूम ऐप में कई महत्वपूर्ण कमियां हैं और ये मीटिंग के दौरान संवेदनशील जानकारी शेयर करने के लिए सुरक्षित नहीं है.

इस टीम ने अपने रिसर्च में पाया है कि ज़ूम ऐप एक नॉन-स्डैंडर्ट तरीके का एंक्रिप्शन यूज़ करता है जो सभी जानकारी चीन को भेजता है.

इस रिपोर्ट के आधार पर दि सिटिज़न लैब का कहना है कि ज़ूम ऐप का इस्तेमाल-

  • सरकारों को नहीं करना चाहिए
  • स्वास्थ्य कर्मचारियों को नहीं करना चाहिए जो संवेदनशील जानकारियों से डील करते हैं.
  • इसके साथ ही मीडिया कर्मचारियों, वकीलों और एक्टिविस्ट को भी इसका इस्तेमाल ना करने की सलाह दी गई है.

जो टिडिइ, साइबर सेक्योरिटी एक्सपर्ट-

ज़ूम के मुताबिक रोज़ाना करीब 200 मिलियन मीटिंग इस ऐप के ज़रिए हो रही है. इतने सारे सिक्योरिटी की दिक्कतों के बाद भी 199 मिलियन लोगों जो इसका इस्तेमाल कर रहे हैं उन्हें ये ख़तरनाक नहीं लगता है.

सिटिज़न लैब ने ऐसे कई प्रमाण सामने रखे हैं, जिससे पता चलता है कि वीडियो मीटिंग के डेटा लीक हो सकते हैं. आपने वीडियो मीटिंग में क्या बात की, उसके लीक अंशों को जोड़ कर आसानी से पता लगाया जा सकता है कि आपने मीटिंग में क्या बात की और क्या वीडियो मीटिंग में देखा.

हालांकि ऐसा करने के लिए हैकर को बहुत ज़्यादा मेहनत और कोशिश करनी पड़ेगी. इसलिए जो लोग केवल आम मीटिंग के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं, उनको उतनी चिंता करने की जरूरत नहीं, क्योंकि हैकर को ऐसी मीटिंग का डिटेल इतना वक़्त लगाकर हैक करने से कोई फायदा नहीं होने वाला.

लेकिन अगर कोई कंपनी बोर्ड लेवल की बैठक के लिए इसका इस्तेमाल कर रही है या फिर सरकारें अपने काम के लिए इसका इस्तेमाल कर रही हैं तो उनकी जानकारी को इस ऐप के इस्तेमाल से ख़तरा ज़्यादा हो सकता है.

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ज़ूम का चीन कनेक्शन

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सिटिज़न लैब के रिसर्च फैलो बिल मार्कज़क के मुताबिक, "ज़ूम ने अपने ऐप में एक सबसे बड़ी ग़लती ये की है कि अपनी अलग से एंक्रिप्शन स्कीम डिज़ाइन की है, और उसे लागू किया है. जबकि उसके इस्तेमाल के लायक कई एंक्रिप्शन स्कीम डिज़ाइन जो ऑडियो और वीडियो दोनों पर काम कर सकते थे, वो पहले से मौजूद थे."

मार्कज़क के मुताबिक आज सच्चाई ये है कि ज़ूम की एंक्रिप्शन किसी पुराने एंक्रिप्शन से बेहतर तो बिलकुल नहीं है. इसलिए जो कोई इस ऐप का इस्तेमाल करते हैं उन्हें इसके इस्तेमाल के पहले दो बार जरूर सोचना चाहिए. ख़ास कर तब जब वो कोई जरूरी जानकारी मीटिंग के दौरान टीम के साझा कर रहे हों.

ब्रिटेन में ज़ूम पर हुई इस रिसर्च और उसके नतीज़ों से किसी को कोई ख़ास आश्चर्य नहीं हुआ है. लोगों को लगता है कि ये ऐप अपनी ही एक स्पीड पर काम कर रहा है और भविष्य में खुद को बदलते वक़्त के साथ ढाल लेगा.

ब्रिटेन की भी नेशनल साइबर सेक्योरिटी सेंटर ने एक बयान में कहा है कि हर तरह की मीटिंग के लिए इस ऐप का इस्तेमाल सुरक्षित नहीं है. हालांकि ब्रिटेन की सरकार ने ये नहीं बताया है कि किस तरह की मीटिंग के लिए ज़ूम ऐप का इस्तेमाल कर सकते हैं.

बीबीसी को ज़ूम से मिली जानकारी के मुताबिक ज़ूम ऐप कैबिनेट मीटिंग के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है लेकिन इमरजेंसी कोबरा मीटिंग के लिए नहीं.

एंक्रिप्शन के अलावा इस रिपोर्ट में ये भी पता चला है कि ज़ूम सभी डाटा को चीन भेजता है. ऐसा तब भी होता है जब चीन के बाहर ज़ूम पर मीटिंग की जा रही है.

भारत में कोरोनावायरस के मामले

यह जानकारी नियमित रूप से अपडेट की जाती है, हालांकि मुमकिन है इनमें किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के नवीनतम आंकड़े तुरंत न दिखें.

राज्य या केंद्र शासित प्रदेश कुल मामले जो स्वस्थ हुए मौतें
महाराष्ट्र 1351153 1049947 35751
आंध्र प्रदेश 681161 612300 5745
तमिलनाडु 586397 530708 9383
कर्नाटक 582458 469750 8641
उत्तराखंड 390875 331270 5652
गोवा 273098 240703 5272
पश्चिम बंगाल 250580 219844 4837
ओडिशा 212609 177585 866
तेलंगाना 189283 158690 1116
बिहार 180032 166188 892
केरल 179923 121264 698
असम 173629 142297 667
हरियाणा 134623 114576 3431
राजस्थान 130971 109472 1456
हिमाचल प्रदेश 125412 108411 1331
मध्य प्रदेश 124166 100012 2242
पंजाब 111375 90345 3284
छत्तीसगढ़ 108458 74537 877
झारखंड 81417 68603 688
उत्तर प्रदेश 47502 36646 580
गुजरात 32396 27072 407
पुडुचेरी 26685 21156 515
जम्मू और कश्मीर 14457 10607 175
चंडीगढ़ 11678 9325 153
मणिपुर 10477 7982 64
लद्दाख 4152 3064 58
अंडमान निकोबार द्वीप समूह 3803 3582 53
दिल्ली 3015 2836 2
मिज़ोरम 1958 1459 0

स्रोतः स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय

11: 30 IST को अपडेट किया गया

उत्तरी अमरीका के कई टेस्ट कॉल के दौरान पाया गया कि एंक्रिप्टिंग की और डिक्रिप्टिंग की बीजिंग के सर्वर में ट्रांसमिट किए गए. सिटिज़न लैब की रिपोर्ट में ये भी कहा गया है.

रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि ज़ूम ऐप 'एंड टू एंड एंक्रिप्शन' यूज़ नहीं करता बल्कि 'ट्रांसपोर्ट एंक्रिप्शन' का इस्तेमाल करता है.

ज़ूम का बयान

हालांकि 1 अप्रैल को जारी किए गए अपने बयान में ज़ूम ऐप ने स्वीकार किया कि उनसे ग़लती हुई. उन्होंने पहले ग़लत जानकारी दी थी कि वो 'एंड टू एंड एंक्रिप्शन' पॉलिसी का इस्तेमाल करते हैं. अपने स्पष्टीकरण में उन्होंने स्वीकार किया कि अगले 90 दिन में वो अपने ऐप को और अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय बनाने की दिशा में काम करेंगे, ताकि लोग इसका इस्तेमाल करते हुए अपने निजता के उल्लंघन की चिंता न करें.

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