बादलों से निराश हुआ तारेगना

बादलों से निराश हुए हज़ारों लोग

प्रख्यात भारतीय खगोलशास्त्री आर्यभट्ट की कर्मस्थली तारेगना में सूर्यग्रहण देखने के लिए हज़ारों लोग एकत्रित हुए थे लेकिन बादलों की वजह से उन्हें निराशा हाथ लगी और वे ग्रहण नहीं देख सके.

इनमें आम लोगों के अलावा देश-विदेश से आए वैज्ञानिक, छात्र और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी शामिल थे.

हालांकि ग्रहण के समय वहाँ गहरा अंधेरा छा गया और ग्रहण समाप्त होते हुए फिर से उजाला फूट पड़ा.

इस निराशा के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने घोषणा की है कि तारेगना में खगोलीय अध्ययन के लिए एक केंद्र की स्थापना की जाएगी.

बिहार की राजधानी पटना में भी बारिश होती रही और लोग ग्रहण नहीं देख सके. पूरे बिहार में सिर्फ़ पूर्णिया में ही पूर्ण सूर्यग्रहण दिखा है.

निराशा

बिहार के मसौढी अनुमंडल का एक छोटा सा गाँव तारेगना अचानक बहुप्रचारित हो गया था और कहा गया था कि पूरे भारत में यहाँ ग्रहण सबसे अच्छा दिखेगा और सबसे लंबे समय तक रहेगा.

इसके बाद वहाँ देश विदेश के वैज्ञानिकों का मजमा लगने लगा था और उत्सुक लोगों की भारी भीड़ एकत्रित हो गई थी.

लोगों में उत्सुकता दो दिन पहले से ही दिख रही थी.

लेकिन बुधवार की सुबह जब लोगों ने पूर्व में बादल देखे तो उनका दिल बैठने लगा था.

आख़िर सूर्योदय और सूर्य ग्रहण का भी समय आ गया लेकिन बादल नहीं छँटे.

लेकिन तारेगना में रोशनी धीरे-धीरे कम होने लगी. सुबह 6 बजकर 24 मिनट पर तारेगना अंधेरे में डूब गया. वैसे तो लोग ग्रहण को नहीं देख पा रहे थे लेकिन लोगों को यह पता चल गया कि पूर्ण सूर्यग्रहण हो गया है. कोई चार मिनट बाद फिर से उजाला फूटने लगा.

लोगों को लगा कि तारेगना में दो बार सुबह हुई है. एक बार सुबह साढ़े पाँच बजे और दूसरी बार साढ़े छह बजे.

कुछ लोगों का कहना है कि उन्होंने पूर्ण ग्रहण के समय बादलों की ओट से तारे भी देखे.

निराश लोगों में बड़ी संख्या बच्चे भी शामिल थे जिन्होंने ग्रहण देखने के लिए विशेष चश्मे ख़रीदे थे.

उनका कहना था कि मौसम की वजह से सारी तैयारी पर पानी फिर गया है.

ग्रहण समाप्त होते-होते तारेगना में बादल छट गए थे और धूप निकल आई थी.

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