'ऑरगैनिक खाने से ख़ास फ़ायदा नहीं'

एक स्वतंत्र शोध के मुताबिक़ आम भोजन के बजाय अगर आप ऑरगैनिक यानी जैविक भोजन खाते हैं तो वह कुछ ख़ास स्वास्थ्यवर्धक नहीं होता.

ब्रिटेन के शोधकर्ताओं की मानें तो दोनों तरह के भोजन की पौष्टिकता में ज़्यादा फ़र्क़ नहीं है और इस बात के सुबूत नहीं है कि ऑरगैनिक खाना सेहत के लिए फ़ायदेमंद होगा.

ब्रिटेन की खाद्य मानक एजेंसी ने यह शोध करवाया है. एजेंसी के मुताबिक इस शोध की रिपोर्ट लोगों को सही फ़ैसला लेने में मदद करेगी.

शोधकर्ताओं ने पिछले 50 वर्षों में पौष्टिकता और स्वास्थ्यवर्धन से जुड़े सुबूतों का अध्ययन किया.

शोधकर्ताओं के टीम लीडर डॉक्टर ऐलन डैनगोर ने बताया कि 162 में से 55 मामलों को अंतिम शोध में शामिल किया. इन 55 मामलों में ये पाया गया कि पारंपरिक तरीके से उगाए गए खाने और जैविक खाने की पौष्टिकता में मामूली अंतर था लेकिन ये अंतर इतना कम है कि इससे कोई ख़ास फ़र्क नहीं पड़ेगा.

माँस, अंडे और दुग्ध पदार्थों में भी यही नतीजा पाया गया है. ये रिपोर्ट अमरीकी जर्नल ऑफ़ क्लिनिकल न्यूट्रीशन में छपी है.

'ज़्यादा फ़र्क नहीं'

रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों तरह के भोजन में नाइट्रोजन और फ़ॉसफोरस के स्तरों में अंतर पाया जाता है लेकिन ये फ़र्क अलग-अलग तरह की खाद के इस्तेमाल के कारण आता है या फिर कटाई के समय में अंतर से.

खाद्य मानक एजेंसी (एफ़एसए) की अधिकारी गिल फ़ाइन ने ये ज़रूर कहा कि इसका मतलब ये नहीं है कि लोगों को ऑरगैनिक खाना नहीं खाना चाहिए.

वहीं डॉक्टर डैनगोर मानते हैं कि इस विषय पर और शोध की ज़रूरत है.

लेकिन ब्रिटेन की सॉयल एसोसिएशन ने इन नतीजों पर असहमति जताई है.

सॉयल एसोसिएशन के नीति निदेशक पीटर मेलचेट का कहना है, "शोधकर्ता कह रहे हैं कि जैविक और ग़ैर जैविक खाने में ख़ास फ़र्क नहीं है. लेकिन बड़े स्तर पर शोध के बगैर इतने दूरगामी परिणाम नहीं निकाले जा सकते."

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