ओलंपिक के बाद 'प्रदूषण कम'

चीन में अधिकारियों का दावा है कि पिछले साल ओलंपिक के दौरान उठाए गए क़दमों की बदौलत बीजिंग स्वच्छ वातावरण का आनंद उठा रहा है.

अधिकारियों का कहना है कि इस साल के पहले सात महीनों में 171 दिन ऐसे थे जब प्रदूषण का स्तर कम था जो पिछले साल के मुकाबले 22 दिन ज़्यादा है.

बीजिंग ओलंपिक के एक साल बाद विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की राजधानी में हवा की स्वच्छता में सुधार हुआ है.

हालांकि उनका ये भी कहा है कि अगर बीजिंग को विश्व के कम प्रदूषित शहरों में शामिल होना है तो काफ़ी कुछ और करना पड़ेगा.

लेकिन वातावरण में इस सुधार के लिए चीन को बड़ी आर्थिक क़ीमत चुकानी पड़ी है. अपने बाक़ी प्रदूषित शहरों में सुधार करने के लिए चीन शायद ही इतना पैसा खर्च कर सके.

ग्रीनपीस की अधिकारी यांग आइलुन कहती हैं, "बीजिंग में प्रदूषण कम करने के लिए जो क़दम उठाए गए थे वो काफ़ी ख़र्चीले थे. दूसरे शहरों में ऐसा करना आसान नहीं होगा."

ओलंपिक के समय बीजिंग में प्रदूषण का ख़तरनाक स्तर कई खिलाड़ियों, दर्शकों और अधिकारियों के लिए चिंता का विषय बना हुआ था.

विशेष अभियान

चीनी अधिकारी ये नहीं चाहते थे कि उनके देश में होने वाला सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय आयोजन प्रदूषण की वजह से ग़लत तरीके से सुर्ख़ियों में रहे.

इसलिए चीन सरकार ने प्रदूषण कम करने के लिए कई क़दम उठाए. संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के अनुसार इन योजनाओं पर चीन ने 17 अरब डॉलर खर्च किए.

प्रदूषण फैलाने वाली कई फैक्ट्रियों को बीजिंग से हटा दिया गया, सड़कों पर से निजी कारों को चलने से मना कर दिया गया और कोयले से चलने वाले बॉयलर की जगह गैस इस्तेमाल की जाने लगी.

ये क़दम कारगर भी साबित हुए और अगस्त में ओलंपिक के दौरान प्रदूषण स्तर में 36 फ़ीसदी की गिरावट आई. इन क़दमों का फ़ायदा इस साल भी मिल रहा है और लोगों को ज़्यादा दिन नीले आसमान को देखना नसीब हो रहा है.

हालांकि कुछ आलोचकों का कहना है कि चीन के ताज़ा आँकड़े असल समस्या को कम करके आँक रहे हैं. चीन सरकार ने शुक्रवार को कहा था कि प्रदूषण स्तर कम था जबकि ज़्यादातर समय शहर में धुँध सी छाई हुई थी.

अमरीकी दूतावास के मुताबिक भी शुक्रवार को प्रदूषण स्तर ज़्यादा था. ओलंपिक के दौरान प्रदूषण कम करने के लिए जो क़दम उठाए गए थे उन्हें बाद में जारी नहीं रखा गया.

तीस लाख से ज़्यादा निजी कारें फिर से सड़कों पर दौड़ने लगी हैं. ग्रीनपीस अधिकारी यांग कहती हैं कि लोगों को कार चलाने से रोकने का एक तरीका ये हो सकता है कि ईंधन पर कर लगाया जाए.

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