'कैंडल लाइट डिनर' से बचें !

  • 21 अगस्त 2009
मोमबत्ती
Image caption इस शोध के बावजूद कैंसर रिसर्च करने वाले चिकित्सक कुछ बातों पर सहमत नहीं हैं

किसी शांत जगह में अपनी महिला मित्र के साथ 'कैंडल लाइट डिनर' यानि मोमबत्ती की दूधिया रोशनी में शानदार भोजन भला किसे पसंद नहीं होगा. लेकिन शोधकर्ताओं ने आगाह किया है कि ऐसे रूमानी भोज स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं!

साउथ कैरोलाइना स्टेट युनिवर्सिटी के विशेषज्ञों ने मोमबत्तियों से निकलने वाले धुएं का परीक्षण किया है.

उन्होंने पाया कि पैराफ़ीन की मोमबत्तियों से निकलने वाले हानिकारक धुएं का संबंध फेंफड़े के कैंसर और दमे जैसी बीमारियों से है.

हालांकि शोधकर्ताओं ने ये भी माना कि मोमबत्ती से निकलने वाले धुएं का स्वास्थ्य पर हानिकारक असर पड़ने में कई वर्ष लग सकते हैं.

ब्रिटेन के विशेषज्ञों का कहना है कि धूम्रपान, मोटापा और शराब सेवन से कैंसर होने का खतरा ज़्यादा है. विशेषज्ञ ये भी मानते हैं कि मोमबत्तियों के कभी-कभी इस्तेमाल से लोगों को ज़्यादा चिंता करने की ज़रूरत नहीं है.

कौन है ख़तरे के दायरे में?

मुख्य शोधकर्ता आमिर हमीदी का कहना है कि जो लोग पैराफ़ीन मोमबत्तियों का ज़्यादा इस्तेमाल करते हैं वो खतरे के दायरे में हैं.

आमिर हमीदी ने वाशिंगटन स्थित अमेरिकन केमिकल सोसाइटी को बताया कि कभी कभी मोमबत्तियों के इस्तेमाल से और उससे निकलने वाले धुएं से ज़्यादा असर नहीं होगा.

उनका कहना था, "यदि कोई व्यक्ति कई वर्षों तक हर रोज़ पैराफ़ीन मोमबत्तियाँ जलाता है, खासकर ऐसे कमरे में जहाँ से हवा आने-जाने का प्रावधान नहीं है, तब समस्या हो सकती है."

मोमबत्ती से निकलने वाले धुएं की जाँच पड़ताल के लिए शोधकर्ताओं ने प्रयोगशाला में कई तरह की मोमबत्तियों को जलाया और उससे निकलने वाले पदार्थों को एकत्र किया.

पैराफ़ीन-आधारित मोमबत्तियों से निकलने वाले धुएं के परीक्षण से पता चला कि उसके जलने से पैदा होने वाला ताप इतना तेज़ नहीं होता जिससे खतरनाक कण जैसे टॉल्युइन और बेंज़ीन पूरी तरह से जल पाएं.

वैज्ञानिकों का कहना है कि मधुमक्खी के छत्ते से निकले मोम या सोया से बनने वाली मोमबत्तियाँ जब जलती हैं तो उनसे इतनी ज़्यादा मात्रा में रसायन नहीं निकलता और इसलिए वैज्ञानिकों ने सुझाव दिया है कि ऐसी ही मोमबत्तियों का इस्तेमाल किया जाए.

सबूत

उधर ब्रिटेन स्थित कैंसर रिसर्च के डॉक्टर जोआना ओवेन्स कहती हैं कि ऐसा कोई सीधा सबूत नहीं मिला है जिससे कहा जा सके कि मोमबत्ती के रोज़ इस्तेमाल से कैंसर जैसी बीमारियाँ होने का ख़तरा हो सकता है.

डॉक्टर ओवेन्स कहती हैं कि बंद कमरे में अगर सिगरेट पी जाए तो उससे प्रदूषण बढ़ता है और ये ज़्यादा महत्वपूर्ण है.

वो कहती हैं, "जब हम कैंसर की बात करते हैं तो हमें पक्के सबूतों पर ज़्यादा ध्यान देना चाहिए. सिगरेट, शराब सेवन, मोटापा, खाने पीने की ग़लत आदतें, इन सब से कैंसर होने की संभावना ज़्यादा होती है."

ब्रिटिश लंग फ़ाउंडेशन के मेडिकल डॉयरेक्टर डॉक्टर नोएमी आइज़र कहती हैं कि पैराफ़ीन मोमबत्ती के कभी-कभी इस्तेमाल से फेफड़ों को ख़तरा नहीं होना चाहिए, लेकिन लोगों को मोमबत्ती जलाते वक़्त कुछ सावधानियाँ भी बरतनी चाहिए जैसे कि मोमबत्तियाँ खुले हवादार कमरों में जलाई जाएं.

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