जलवायु परिवर्तन पर अहम वार्ता

  • 24 अगस्त 2009

जलवायु परिवर्तन बहस में साझा नीति के पक्षधर भारत और चीन सोमवार से बीजिंग में बातचीत शुरू कर रहे हैं.

Image caption जयराम रमेश चार दिनों की यात्रा पर बीजिंग गए हैं

बातचीत में ग्लेशियर आंकडों के आदान-प्रदान और नई वन परियोजनाओं के बारे में रणनीति बनाने के बारे में विचार किया जाएगा.

रविवार को पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश चार दिनों की चीन यात्रा पर बीजिंग पहुंचे, जहाँ वे योजना और पर्यावरण मंत्रालय के उच्च अधिकारियों से बातचीत करेंगे.

बैठक के पहले दिन पर्यावरण पर संयुक्त कार्य दल बनाए जाने और हिमालय के ग्लेशियरों पर साथ-साथ काम करने पर चर्चा होगी.

हाल के दिनों में भारत और चीन ग्लेशियरों के घटने पर चिंता जताई जाती रही है.

तिब्बत में ग्लेशियरों की स्थिति का भारत पर सीधा प्रभाव पड़ता है क्योंकि ब्रह्मपुत्र जैसी महत्वपूर्ण नदी तिब्बत से ही निकलती है जिस पर भारत के लाखों लोगों की ज़िंदगी निर्भर है.

महत्व

जयराम रमेश जलवायु परिवर्तन बातचीत में वन्यीकरण को भी ख़ासा महत्त्व दे रहे हैं.

Image caption बातचीत के एजेंडे में ग्लेशियर भी शामिल है

चीन प्रति वर्ष 50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र का वन्यीकरण करता है जबकि भारत 10 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में नए वन लगाता है.

जयराम रमेश की ये यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह कोपेनहेगेन शिखर वार्ता से चार महीने से भी कम समय पहले हो रही है.

इस मुद्दे पर भारत और चीन के रुख़ में समानता रही है और इस यात्रा के दौरान वो इस पर फिर ज़ोर देना चाहेंगे.

दोनों देशों का कहना है कि वे गैस उत्सर्जन घटाए जाने के लक्ष्य को क़ानूनी जामा पहनाए जाने के पक्ष में नहीं हैं क्योंकि इससे उनकी विकास योजनाएँ प्रभावित होंगी.

जयराम रमेश ने हाल में जलवायु परिवर्तन बहस में चीन को भारत का सबसे नज़दीकी सहयोगी बताया था.

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