रॉकेट तो छूटा पर उपग्रह लापता

  • 25 अगस्त 2009
दक्षिण कोरियाई रॉकेट

दक्षिण कोरिया का अपनी ही धरती से पहली बार अंतरिक्ष में उपग्रह भेजने का अभियान नाकाम हो गया है.

दक्षिण कोरिया का एक रॉकेट इस उपग्रह को लेकर अंतरिक्ष में गया मगर रॉकेट से प्रक्षेपित उपग्रह अपनी तय कक्षा में नहीं पहुँच सका.

फ़िलहाल कोरियाई वैज्ञानिक और उनके रूसी सहयोगी इस उपग्रह का पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि ये उपग्रह कहाँ गया.

दक्षिण कोरिया में इस अंतरिक्ष अभियान की तैयारी पिछले 10 वर्षों से चल रही थी.

कोरियाई सरकार ने इस कार्यक्रम को पूर्णतः व्यावसायिक कार्यक्रम बताया था मगर उसके पड़ोसी उत्तर कोरिया ने इसे लेकर संदेह जताए थे.

अभियान

मंगलवार को दक्षिण कोरिया ने सफलतापूर्वक नारो अंतरिक्ष केंद्र से केएसएलवी-1 नामक रॉकेट को एक द्वीप से अंतरिक्ष में भेजा.

Image caption दक्षिण कोरिया के इस अंतरिक्ष अभियान को लेकर जनता में ख़ासा उत्साह था

33 मीटर लंबे और 140 टन वज़न वाले इस रॉकेट पर एक उपग्रह भी रखा था.

दक्षिण कोरिया के इस अंतरिक्ष अभियान की लागत आधा अरब डॉलर थी.

इस अभियान को लेकर दक्षिण कोरिया में भारी उत्साह था और लाखों लोगों ने टेलीविज़न पर इस कार्यक्रम को देखा.

ये अभियान यदि सफल रहता तो दक्षिण कोरिया अपनी ज़मीन से उपग्रह प्रक्षेपित करनेवाला दुनिया का दसवाँ देश बन जाता.

दक्षिण कोरिया को अभी तक अपने उपग्रहों को अंतरिक्ष में पहुँचाने के लिए दूसरे देशों की सहायता लेनी पड़ती है.

संदेह

उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया के अंतरिक्ष अभियान पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि वो ये देख रहा है कि दक्षिण कोरियाई रॉकेट के बारे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया क्या रहती है.

उत्तर कोरिया ने पिछले अप्रैल में एक रॉकेट छोड़ा था जिसके कारण उसपर संयुक्त राष्ट्र की ओर से प्रतिबंध लगा दिया गया था.

ये कहा गया कि उत्तर कोरिया ने रॉकेट अभियान के नाम पर लंबी दूरी का मिसाइल परीक्षण किया है.

ये भी कहा गया कि अंतरिक्ष में उत्तर कोरिया का कोई उपग्रह नहीं दिखाई दिया है.

हालाँकि उत्तर कोरिया इस बात पर ज़ोर देता रहा कि उसका उपग्रह पृथ्वी की परिक्रमा कर रहा है.

उधर दक्षिण कोरिया ने अपने अंतरिक्ष अभियान की तुलना उत्तर कोरिया से किए जाने को ग़लत ठहराते हुए कहा है कि उसका अंतरिक्ष अभियान असैनिक अभियान है.

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