चाँद का टुकड़ा निकला लकड़ी

  • 28 अगस्त 2009
डच म्यूज़ियम में रखा पत्थर
Image caption माना जाता था कि ये पत्थर अपोलो 11 के अंतरिक्षयात्री चाँद से लेकर आए थे.

हालैंड के राष्ट्रीय संग्रहालय का कहना है कि वो ठगे गए हैं क्योंकि जिस पत्थर के टुकड़े को वो चांद का टुकड़ा समझ रहे थे वो बस सख्त लकड़ी है और कुछ नहीं.

संग्रहालय के कर्मचारियों के अनुसार उन्होंने जिस पत्थर के टुकड़े को ये मानकर बहुत संभालकर रखा था कि वो चाँद की सतह से आया है, दरअसल वो लक़ड़ी का एक टुकड़ा है जो पत्थर जैसा सख्त हो गया है.

अब से पहले तक यह माना जाता था कि इस पत्थर को अपोलो 11 के तीन अंतरिक्षयात्री चाँद से लेकर आए थे.

ये पत्थर पिछले 40 वर्षों से हॉलैंड की राजधानी एम्सटर्डम के संग्रहालय में रखा हुआ था और सभी लोग ये समझ रहे थे कि ये चाँद की सतह से उठाया गया एक पत्थर है.

संग्रहालय के निरीक्षकों ने इसे बेहद महत्वपूर्ण वस्तु मानकर बहुत संभालकर रखा हुआ था.

संग्रहालय को ये पत्थर वर्ष 1988 में पूर्व डच प्रधानमंत्री विलेम ड्रीस की मृत्यु के बाद मिला था.

विलेम ड्रेस को ये पत्थर वर्ष 1969 में अमरीका के तत्कालीन राजदूत जे विलियम मिडेनडॉर्फ़ ने अपोलो 11 के तीन अंतरिक्षयात्रियों की हॉलैंड यात्रा के दौरान दिया था.

तीनो अंतरिक्षयात्री चाँद पर कदम रखने के बाद 'जायंट लीप' नाम की एक सदभावना यात्रा पर थे.

हालैंड की एनओएस न्यूज़ से बात करते हुए मिडेनडॉर्फ़ ने कहा कि उन्हें ये पत्थर अमरीकी विदेश विभाग से मिला था लेकिन इसके बारे में विस्तार से उन्हें बहुत कुछ याद नहीं है. हेग में अमरीकी दूतावास ने कहा है कि वो मामले की जांच कर रहे हैं.

वो कहते हैं कि विलेम ड्रीस की इस पत्थर के टुकड़े में बहुत दिलचस्पी थी लेकिन ये कि पत्थर चाँद से नहीं आया है, इसके बारे में उन्हें कुछ पता नहीं है.

पत्थर का बीमा

एक वक़्त ऐसा भी था जब इस पत्थर का करीब डेढ़ मिलियन डॉलर यानि करीब साढ़े सात करोड़ का बीमा हुआ था, लेकिन इस पत्थर पर किए गए परीक्षणों से पता चला है कि ये चाँद से लाया गया पत्थर नहीं है.

अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि उनके पास इस बारे में कोई जवाब नहीं है.

उधर संग्रहालय का कहना है कि वो इस पत्थर को एक जिज्ञासा की वस्तु मानकर संभाल कर रखेंगे.

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