शराब पर डॉक्टरों की चिंता

शराब
Image caption शराब सेवन से स्वास्थ्य सेवा पर हर साल तीन अरब पाउंड का बोझ पड़ता है

ब्रिटेन में डॉक्टरों का कहना है कि शराब के विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगना चाहिए और इनमें वो विज्ञापन भी शामिल हैं जो शराब बनाने वाली कंपनियाँ खेल और संगीत के कार्यक्रमों को प्रायोजित करने के लिए करती हैं.

ब्रिटिश मेडिकल एसोसिएशन यानी बीएमए ने कहा है कि शराब की बिक्री बढ़ाने वाले तरीक़ों पर रोक लगाना बेहद ज़रूरी है और इसमें शराब को कम क़ीमत पर बेचने जैसे प्रोत्साहनों पर रोक लगाना भी शामिल है.

डॉक्टरों का कहना है कि शराब की बिक्री बढ़ाने के लिए उसकी क़ीमतें कम करने जैसी योजनाओं से शराब के उपभोग में बढ़ावा होता है इसलिए इन पर रोक लगनी चाहिए.

शराब बनाने वाली कंपनियाँ इसके विज्ञापन पर एक साल में लगभग 80 करोड़ पाउंड की भारी भरकम रक़म ख़र्च करती हैं. इसमें से लगभग एक चौथाई ही विज्ञापनों पर ख़र्च होती है बाक़ी कम क़ीमत पर शराब बेचने जैसे तरीक़ों पर ख़र्च होती है.

डॉक्टरों ने अब कहा है कि शराब के विज्ञापनों और अन्य लुभावने उपायों पर रोक लगाया जाना इसलिए ज़रूरी है क्योंकि शराब सेवन अब ऐसे प्रमुख कारणों से एक बन गया है जिसकी वजह से कम उम्र में ही या तो मौत हो जाती है या कुछ लोग विकलांग हो जाते हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार धूम्रपान और उच्च रक्त चाप की वजह से सबसे ज़्यादा मौतें या विकलांगता होती है. उसके बाद शराब सेवन तीसरे स्थान पर है जिसकी वजह से ज़्यादा मौतें होती हैं.

शराब सेवन से होने वाली बीमारियों का इलाज करने के लिए ब्रिटेन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा यानी एनएचएस को हर साल लगभग तीन अरब पाउंड की रक़म ख़र्च करनी पड़ती है.

हाल के वर्षों में ब्रिटेन में शराब सेवन की मात्रा तेज़ी से बढ़ी है और एक तिहाई वयस्क लोग डॉक्टरों द्वारा बताई गई सीमा से ज़्यादा शराब सेवन करता है.

लेकिन ब्रिटिश मेडिकल एसोसिएशन की रिपोर्ट में कहा गया है कि शराब का विज्ञापन करने से ख़ासतौर से युवाओं पर जो बड़ा असर पड़ता है उस पर व्यापक चिंता भी जताई गई है.

रिपोर्ट में ध्यान दिलाया गया है कि शराब के विज्ञापन पर प्रतिवर्ष ख़र्च की जाने वाली लगभग 20 करोड़ पाउंड की रक़म भी काफ़ी महत्वपूर्ण है लेकिन विज्ञापन के तरीक़ों में हाल के समय में बहुत बदलाव आए हैं.

शराब की बढ़त

Image caption ब्रिटेन में युवाओं में शराब सेवन की बढ़ती लत पर चिंताएँ जताई गई हैं.

हाल के समय में शराब कंपनियाँ ख़ासतौर से खेल और संगीत की दुनिया को प्रायोजित करने के लिए उतर चुकी हैं. खेल और संगीत की दुनिया को सबसे ज़्यादा सहायता राशि वित्त क्षेत्र मुहैया कराता है और शराब कंपनियाँ उसके बाद दूसरे नंबर पर आ चुकी हैं.

बीएमए ने शराब के विज्ञापन और बिक्री बढ़ाने के अन्य उपायों पर बिल्कुल पाबंदी लगाए जाने का आहवान करते हुए कहा है कि शराब बेचने के घंटों में कमी करना और क़ीमतें घटाकर बेचने के चलन को भी रोकना होगा.

इसके लिए कहा गया है कि शराब की बिक्री की न्यूनतम क़ीमत तय होनी चाहिए. स्कॉटलैंड में ऐसा प्रस्ताव पहले से ही विचाराधीन है और ब्रिटेन के अन्य हिस्सों में भी अब इस पर विचार किया जा रहा है.

लेकिन स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस तरह के प्रस्तावों का अभी तक यह कहते हुए विरोध किया है कि इस तरह की पहल स्वैच्छिक रूप से शराब उद्योग की तरफ़ से ही होनी चाहिए.

हालांकि स्वास्थ्य मंत्रालय ने ऐसे संकेत दिए थे कि अगर ज़रूरत पड़ी तो शराब की क़ीमतें कम करके बिक्री बढ़ाने पर रोक लगाने के लिए क़ानून भी बनाया जा सकता है.

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