‘सामूहिक व्यायाम, खुशहाली का नुस्खा’

  • 16 सितंबर 2009
Image caption नौकायन आमतौर पर सामूहिक खेल है

एक अध्ययन के मुताबिक सामूहिक व्यायाम करने से एंडोर्फिन हॉरमोन ज़्यादा मात्रा में स्रावित होता है और ये आदमी को खुश रखता है.

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की एक टीम ने नौकायन करने वाले बारह नाविकों पर किए गए लंबे शोध के बाद ये निष्कर्ष निकाला है.

जिन्होंने अकेले नाव चलाई उनमें एंडार्फिन हॉरमोन कम मात्रा में स्रावित हुआ जबकि समूह में ऐसा करने वालों में इसकी मात्रा ज़्यादा थी.

बॉयोलॉजी लेटर्स नामक पत्रिका में छपे इस शोध में उम्मीद जताई गई है कि ये हॉर्मोन जातीय या सामूहिक क्रियाकलापों में भी मददगार होते हैं.

लंबे समय से ये माना जाता रहा है कि शारीरिक श्रम से एंडॉर्फिन हॉर्मोन निकलता है जो कि व्यायाम के बाद मिलने वाले आनंद के लिए उत्तरदायी होता है.

इस हॉर्मोन में दर्द को छिपाने की क्षमता होती है.

लेकिन ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के मुताबिक एक साथ नाव चलाने से इसका प्रभाव काफी बढ़ गया.

पैंतालीस मिनट तक अकेले नाव चलाने और छह लोगों के समूह में चलाने, दोनों ही स्थितियों में शोधकर्ताओं ने ये जानने की कोशिश की इस दौरान हाथ में बढ़ा हुआ रक्त दाब कितनी देर तक महसूस होता है.

व्यायाम की वजह से दर्द सहने की क्षमता दोनों ही समूहों में बढ़ी पाई गई लेकिन समूह में ऐसा करने वालों में फ़र्क साफ़ दिखा.

शोधकर्ताओं के मुताबिक ये फ़र्क एंडॉर्फ़िन के ज़्यादा स्रावण की वजह से हुआ.

खेल में प्रदर्शन बेहतर होने के अलावा, शोधकर्ताओं का अनुमान है कि एंडॉर्फ़िन हॉर्मोन जातीय या सामुदायिक क्रियाओं में भी सहायक होता है जो कि धार्मिक क्रियाकलापों, नाचने अथवा हंसने की वजह से उत्पन्न होती हैं.

ब्रिटिश साइकोलॉजिकल सोसायटी से जुड़े मनोवैज्ञानिक कैरोल सेहॉल्ट ने इस शोध निष्कर्ष को काफी विश्वसनीय बताया है.

उनका कहना है, ‘नौकायन एक ऐसा खेल है जिसमें टीम वर्क की ज़रूरत होती है. ऐसे में एंडॉर्फिन इस प्रक्रिया को बढ़ाने में मददगार हो सकते हैं. लेकिन हम लोग अपने अनुभव से ये जानते हैं कि सामूहिक तौर पर व्यायाम कई स्तर से फ़ायदेमंद होता है. प्रेरणादायक होने के साथ ही इसका सामाजिक महत्व भी होता है.’

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