चाभी चीन और अमरीका के हाथों में

गैस
Image caption जलवायु परिवर्तन पर साल के अंत तक संधि होनी है लेकिन सहमति नहीं बन पाई है.

जलवायु परिवर्तन पर एक अंतरराष्ट्रीय संधि के लिए सहमति बनाने के प्रयासों के तहत दुनिया भर के नेता आज संयुक्त राष्ट्र में उच्च स्तरीय बैठक करेंगे.

यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब साल के अंत तक अंतरराष्ट्रीय संधि होनी है लेकिन इस दिशा में कोई महत्वपूर्ण प्रगति नहीं हो सकी है.

हालांकि ब्रिटेन के ऊर्जा एवं जलवायु परिवर्तन मामलों के मंत्रि एड मिलिबैंड ने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि इस बैठक में कोई सहमति ज़रुर बन जाएगी.

मिलिबैंड का कहना था, ‘‘मुझे नहीं लगता कि लोगों को अभी भी जलवायु परिवर्तन का प्रभाव समझ में आ रहा है. बांग्लादेश को देखिए तो समझ में आएगा हो क्या रहा है. उन लोगों के लिए ज़रुरी है कि हम कोई कार्रवाई करें.’’

न्यूयॉर्क में हो रही इस बैठक में सबसे महत्वपूर्ण ये बात होगी कि अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा और चीन के राष्ट्रपति हू जिनताओ क्या कहते हैं.

दोनों बड़े देश है और दोनों बड़ी मात्रा में उत्सर्जन करते हैं और इन दोनों देशों का सांकेतिक महत्व भी है. इतना ही नहीं किसी भी समझौते की कुंजी इन्हीं दोनों देशों के हाथ में ही है.

हालांकि मिलिबैंड मानते हैं कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय संधि में पूरी दुनिया को कुछ ऐसे क़दम उठाने होंगे जो अभी तक न उठाए गए हों. जैसे कि ग्रीनहाउस गैसों के बढ़ते हुए उत्सर्जन को उलटी दिशा में मोड़ना. इतना ही नहीं एक ऐसी व्यवस्था बनाना जिसके तहत सभी देश इस संबंध में किए गए वादों को निभाएं और प्रतिबद्धता बनाए रखें.

संयुक्त राष्ट्र में चर्चा के बाद जी 20 देशों की अमरीकी शहर पिट्टसबर्ग में बैठक होने जा रही है. ब्रिटेन के पर्यावरण मंत्री, एड मिलीबैंड ने ये बात स्वीकार की कि धरती के बढ़ते तापमान पर नई संधि अभी भी अधर में लटकी है.

मिलिबैंड कहते हैं कि अगर दिसम्बर में कोपनहेगन में समझौता करना है तो इस मामले को जल्दी और अत्यंत गंभीरता से लेना ज़रुरी है.

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