ओशनसैट-2 का सफल प्रक्षेपण

सेटेलाइट
Image caption भारत इससे पहले कई सेटेलाइटों का सफल प्रक्षेपण कर चुका है.

पोलर सेटेलाइट लॉन्च वेहिकल (पीएसएलवी) उपग्रह ओशनसैट 2 और छह अन्य नैनो सैटेलाइट को लेकर अंतरिक्ष की ओर रवाना हो गया है.

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (इसरो) के श्रीहरिकोटा केंद्र से बुधवार सुबह छोड़ा गया. ओसनसैट 2 को पीएसएलवी पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करेगा.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस मौके पर वैज्ञानिकों को बधाई दी है. लॉन्च के दौरान मौजूद उप राष्ट्रपति ने कहा कि वैज्ञानिकों ने भारत का नाम और रोशन किया है.

ये उपग्रह पांच साल तक काम करेगा और माना जा रहा है कि पहले संस्करण की तरह ये लंबे समय तक भी चल सकता है.

ओशनसैट 2 उपग्रह मौसम की जानकारी जुटाएगा और मछली की बहुलता वाले क्षेत्रों की पहचान करेगा. इस सेटेलाइट से भारतीय मौसम विभाग और मत्स्य विभाग को काफी मदद मिलने उम्मीद जताई जा रही है.

साइंस मैगज़ीन के दक्षिण एशिया संवाददाता पल्लव बागला बताते हैं," जब मछली पकड़ने के लिए मछुआरा निकलता है तो उसे ये पता नहीं होता कि मछलियां कहां ज़्यादा है. पर ये सैटेलाइट देख पाता है कि यहां ज़्यादा मछलियां है. ओशनसेट 2 में साथ में मौसम की जानकारी देने का उपकरण भी डाला गया है जिससे हवा और दबाव के क्षेत्र भी मापे जा सकेंगे जिससे भारत चक्रवात पर और अच्छी जानकारी प्राप्त कर पाएगा."

970 किलोग्राम वज़न वाले ओशनसैट 2 उपग्रह के साथ छह विदेशी नैनो उपग्रह भी छोड़े जाएगे. उनमें से चार जर्मनी और एक एक स्विटज़रलैंड और तुर्की के हैं. ये सेटेलाइट यूरोपीय देशों, वहां के विश्वविद्यालयों के शिक्षा और प्रयोग के लिए इस्तेमाल में आने वाले सेटेलाइट हैं. कुल मिलाकर पीएसएलवी से सात सेटेलाइट लांच किए जा रहे हैं.

पीएसएलवी का ये 16वां अभियान है. रॉकेट की ऊँचाई सात मंज़िला इमारत के बराबर है, इसका वज़न 230 टन है और इसकी कीमत है 160 करोड़ रुपए.

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