भारतीय मूल के वेंकटरामन को नोबेल सम्मान

  • 7 अक्तूबर 2009
वेंकटरामन रामकृष्णन
Image caption वेंकटरामन रामकृष्णन इस समय ब्रिटेन के कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से जुड़े हैं

भारतीय मूल के वैज्ञानिक वेंकटरामन रामकृष्णन और दो अन्य वैज्ञानिकों को इस वर्ष केमिस्ट्री के लिए नोबेल पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की गई है.

अमरीकी नागरिक डॉक्टर वेंकटरामन को इसराइली महिला वैज्ञानिक अदा योनोथ और अमरीका के थॉमस स्टीज़ के साथ सम्मान के लिए चुना गया है.

बीबीसी संवाददाता पाणिनी आनंद के साथ बातचीत में डॉक्टर रामकृष्णन ने कहा कि उन्हें नोबेल मिलने से बहुत खुशी है पर पुरस्कारों के मिलने के आधार पर अच्छे काम की पहचान करने का पैमाना ग़लत है.

उन्होंने कहा, "मीडिया का ज़्यादा ध्यान वैज्ञानिकों के काम पर तब जाता है जब उन्हें पश्चिम में मिलने वाले बड़े सम्मान या पुरस्कार मिलने लगते हैं. यह ग़लत तरीका है. कोशिश होनी चाहिए कि हम अपने यहाँ काम कर रहे वैज्ञानिकों, उनके काम को जाने और उसके बारे में लोगों को बताएं."

भारत में जन्मे वेंकटरामन इस समय ब्रिटेन के प्रतिष्ठित कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से जुड़े हुए हैं.

57 वर्षीय वेंकटरामन रामकृष्णन कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय की एमआरसी लेबोरेट्रीज़ ऑफ़ म्यलूकुलर बायोलोजी के स्ट्रकचरल स्टडीज़ विभाग के प्रमुख वैज्ञानिक हैं.

डॉक्टर रामकृष्णन के नेतृत्व में वैज्ञानिकों ने रिबोसोम्ज़ का गहन अध्ययन किया था, रिबोसोम्ज़ शरीर की कोशिश के भीतर प्रोटीन बनाते हैं.

तीनों वैज्ञानिकों ने त्रिआयामी चित्रों के ज़रिए दुनिया को समझाया कि किस तरह रिबोसोम्ज़ अलग-अलग रसायनों के साथ प्रतिक्रिया करते हैं, इसके लिए उन्होंने एक्सरे क्रिस्टलोग्राफ़ी का सहारा लिया जो रिबोसोम्ज़ की हज़ारों गुना बड़ी छवि सामने लाता है.

नोबेल सम्मान समिति का कहना है कि "इन वैज्ञानिकों ने विज्ञान के क्षेत्र में बुनियादी योगदान किया है और उनके इस सराहनीय कार्य की वजह से बहुत सारी बीमारियों का इलाज एंटी बायोटिक्स के ज़रिए करने में भारी मदद मिली है".

अदा योनोथ इसराइल के विज़मैन इंस्टीट्यूट में स्ट्रकचरल बायोलॉजी की प्रोफ़ेसर हैं और रसायन विज्ञान के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार पाने वाली चौथी महिला हैं, 1964 के बाद से पहली बार किसी महिला को यह सम्मान मिला है.

तीसरे वैज्ञानिक थॉमस स्टीज़ का संबंध अमरीका के येल विश्वविद्यालय से है.

तीनों वैज्ञानिकों के बीच पुरस्कार की राशि बराबर-बराबर बाँटी जाएगी, यह पुरस्कार 10 दिसंबर को दिया जाएगा.

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