जलवायु परिवर्तन वार्ता में तीखे मतभेद

जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर बैंकॉक में बातचीत समाप्त हो गई है और इसमें विकसित और विकासशील देशों के बीच तीखे मतभेद उभर कर सामने आए हैं. दिसंबर में कोपनहेगन में जलवायु परिवर्तन पर सम्मेलन होना है.

करीब 15 दिनों से विभिन्न देशों के प्रतिनिधी बैंकॉक में 200 पन्नों के दस्तावेज़ पर विचार विमर्श कर रहे थे ताकि सहमति बन पाए.

लेकिन अब भी दस्तावेज़ में 2000 बिंदु ऐसे हैं जहाँ सटीक शब्दावली को लेकर एकराय नहीं बन पाई है.

भारतीय दल के नेता श्याम सरन ने इस बात पर नाराज़गी बताई कि विकसित देश इस दिशा में आगे कदम बढ़ाने को तैयार नहीं है.

उनका कहना था कि कई विकसित देश गैस उत्सर्जन को कम करने के अपने मकसद को हासिल करने में विफल रहेंगे जैसा कि पहले चरण की योजना के तहत तय हुआ था.

श्याम सरन ने कहा, "सबसे बड़ी चिंता की बात ये है कि बातचीत के सबसे अहम लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में कोई प्रगति नहीं हुई है- यानी ये तय करना कि दूसरे चरण में गैस उत्सर्जन में कितनी कटौती करनी होगी."

'समय निकला जा रहा है'

बातचीत के दौरान कुछ बातों पर तो सहमति बन गई है लेकिन बुनियादी बातों को लेकर मतभेद बरकरार है.

विकासशील देश चाहते हैं कि क्योटो संधि की समयसीमा बढ़ाई जाए. उनका आरोप है कि अमीर देश क्योटो संधि की कड़ी शर्तों से बचना चाहते हैं. जबकि विकसित देशों की माँग है कि क्योटो की जगह एक नई संधि तैयार हो.

नई संधि के स्वरूप को लेकर सबसे ज़्यादा मतभेद हैं. अब तीन विकल्प खुले हुए हैं- बिल्कुल नई संधि तैयार की जाए, क्योटो संधि की सीमा बढ़ाई जाए या फिर कुछ अस्थाई और कामचलाऊ कदम उठा कर काम चलाया जाए.

जब तक विकसित और विकासशील देशों के बीच मतभेद दूर नहीं होते, नई संधि तैयार नहीं की जा सकती.

जहाँ तक बात रही अमरीका की तो वहाँ इस सिलसिले में एक और बाधा है. इस बात की आशंका जताई जा रही है कि गैस उत्सर्जन में कटौती से संबंधित बिल कोपेनहेगन सम्मेलन से पहले अमरीकी सिनेट में पारित नहीं हो पाएगा.

सम्मेलन दिसंबर में शुरु होना है. अब से लेकर दिसंबर तक के समय में केवल पांच दिन ऐसे रखे गए हैं जब संधि को लेकर बातचीत होनी है.

अमरीकी सिनेट ने क्योटो संधि को मंज़ूरी नहीं थी और इसी को आधार बनाकर तैयार की गई किसी भी संधि को मंज़ूरी मिलना मुश्किल काम है.पर्यवेक्षक आगाह कर रहे हैं कि नई संधि सुनिश्चित करने के लिए समय हाथ से निकला जा रहा है.

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