'भारत क्योटो संधि से अलग नहीं होगा'

  • 21 अक्तूबर 2009
मनमोहन सिंह
Image caption मनमोहन सिंह ने धनी देशों पर दबाव देने का आरोप लगाया.

भारत ने दक्षिण एशिया क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) के साथ सुर से सुर मिलाते हुए कहा है कि वह क्योटो संधि का पालन करेगा और कोपेनहेगेन में होने वाली बैठक में इसको आधार बनाएगा.

भारत के पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सार्क देश जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र के दिशानिर्देश और बाली में तय की गई कार्ययोजना का पालन करेंगे.

उनका कहना था कि जलवायु परिवर्तन पर सार्क देशों का एक ही मत है और हमें इससे हटना नहीं चाहिए.

उन्होंने पत्रकारों के उन सवालों का जवाब देने से इनकार कर दिया जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री को चिठ्ठी लिख कर क्योटो संधि को खारिज करने और जी 77 देशों से बाहर निकलने की सलाह दी थी.

इस मामले पर स्पष्टीकरण देते हुए जयराम रमेश का कहना था कि उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को चिठ्ठी लिखकर ये ज़रुर कहा था कि जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर देश को लचीलापन दिखाना चाहिए लेकिन इस बात से इनकार किया कि उन्होंने क्योटो संधि पर भारत के रुख़ में बदलाव की बात कही थी.

पर्यावरण मंत्री ने कहा कि उन्होंने किसी भी स्तर पर क्योटो संधि के मूलभूत सिद्धांतों से हटने की सिफ़ारिश नहीं की.

इससे पहले ऐसी ख़बरें मीडिया में आई थी कि उन्होंने क्योटो संधि को खारिज करने और जी 77 देशो से निकल जाने की राय दी थी और कहा था कि ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती की बात कोपनहेगेन में होनी वाली बैठक में भारत स्वीकार कर ले.

इस बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी मंगलवार को कहा कि विकसित देश विकासशील देशों पर उत्सर्जन कटौती को बाध्यकारी बनाने का दबाव बना रहे हैं.

उन्होंने कहा, "विकसित देशों की ओर से ये कोशिश है कि विकासशील देशों पर नई प्रतिबद्धताएँ थोप दी जाए. यह हमारा आर्थिक विकास प्रभावित कर सकता है."

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