माँ की जुबान में रोते हैं शिशु

नवजात शिशु
Image caption नवजात शिशु अपने आसपास की आवाज़ों से बहुत जल्द प्रभावित होते हैं

नवजात शिशुओं के रोने का अंदाज़ क्यों जुदा होता है, वैज्ञानिकों ने इस उलझन को सुलझाने का दावा किया है. जर्मनी के वैज्ञानिकों ने शोध में पाया है कि नवजात शिशु अपनी माँ की जुबान में रोते हैं.

शोधकर्ताओं ने ऐसे 60 स्वस्थ नवजात शिशुओं पर शोध किया जिनके परिवार फ़्रेंच और जर्मन भाषा बोलते थे.

शोध में पाया गया कि फ़्रेंच जुबान बोलने वाली माँ का शिशु तेज़ आवाज़ में रोता है और फिर उसकी आवाज़ धीमी होती जाती है, जबकि जर्मन शिशु धीमी आवाज़ में रोना शुरू करता है और फिर उसकी आवाज़ तेज़ हो जाती हैं.

जर्मन और फ़्रेंच भाषा भी दरअसल इसी तर्ज़ पर बोली जाती हैं.

करंट बायोलॉज़ी में छपे शोध में बताया गया है कि नवजात शिशु संभवत: अपनी माँ की नकल करता है.

शोध में पाया गया कि शिशु जब गर्भ में होता है तो उस पर उस जुबान का असर होता है जो सबसे पहले उस तक गर्भ में पहुँचती है.

शोध

वैज्ञानिक ये पहले ही साबित कर चुके हैं कि गर्भावस्था के अंतिम तीन महीनों में भ्रूण बाहरी दुनिया की आवाज़ों को याद रख सकता है. ख़ासकर शिशु गर्भ के दौरान संगीत और कुछ गुनगुनाने वाली आवाज़ों को लेकर संवेदनशील होता है.

एक और अध्ययन में ये भी बताया गया था कि 12 हफ़्ते का नवजात शिशु उन आवाज़ों की नकल कर सकता है जो उन्हें अपने बड़ों से सुनने को मिलती हैं.

शोध दल का नेतृत्व करने वाली वुर्ज़बर्ग यूनीवर्सिटी की कैथलीन वर्मके कहती हैं, “इस अध्ययन से ये पता चला है कि नवजात शिशु न केवल अलग-अलग अंदाज़ में रोते हैं, बल्कि वे उसी जुबान में रोते हैं जो उन्होंने गर्भावस्था के दौरान सुनी होती हैं.”

डॉ वर्मके के दल ने अपना शोध उन 60 नवजात शिशुओं पर किया जो तीन से पांच दिन के थे.

उनके अनुसार, "नवजात भाषा सीखने के लिए आतुर रहते हैं और इसके लिए अपनी माँ के स्वर और सुर की नकल करने की कोशिश करते हैं."

उनका कहना है कि ये देखना रोचक होगा कि एक महीने के बाद भी क्या इन शिशुओं का रोने का अंदाज़ यही रहता है या इसमें कुछ बदलाव आता है.

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