लिंग प्रयोग से उम्मीदें

  • 10 नवंबर 2009
Image caption 12 में से आठ ख़रगोशों ने नए तंतुओं के साथ सफलतापूर्वक यौन क्रिया की.

अमरीका में वैज्ञानिकों ने पशुओं पर प्रयोग करके ये उम्मीदें जगाई हैं कि अगर किसी मानव का लिंग दुर्घटना या बीमारी की वजह से निष्क्रिय हो गया हो तो उसमें फिर से जान फूँकी जा सकती है.

नॉर्थ कैरोलीना में वेक फ़ोरेस्ट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने ख़रगोश के लिंग पर प्रयोग करके पाया कि उसमें तनाव बढ़ाने वाले तंतुओं (tissue) को बदला जा सकता है.

इन वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में ही ऐसे तंतु तैयार किए और उन्हें ख़रगोशों के लिंग में स्थापित किया जिससे ख़रगोशों ने ना सिर्फ़ यौन आनंद लिया बल्कि उनकी संतान भी पैदा हुई.

इस प्रयोग का ब्यौरा प्रोसीडिंग्स ऑफ़ नेशनल अकेडेमी ऑफ़ साइंसेज़ में प्रकाशित हुआ है.

प्रयोग करने वाली टीम के एक सदस्य प्रोफ़ेसर एंथनी अटाला का कहना था, “ज़ाहिर सी बात है कि इस क्षेत्र में अभी और प्रयोग व अध्ययन करने की ज़रूरत है लेकिन हमारे प्रयोग के परिणाम बहुत उत्साहजनक हैं. इनसे पता चलता है कि इस तकनीक का प्रयोग करके उन लोगों का भला किया जा सकता है कि जिनके लिंग के तंतु कमज़ोर हो गए हैं और उनमें फिर से जान डालने की ज़रूरत है.”

प्रोफ़ेसर एंथनी का कहना था, “हमें उम्मीद है कि यौन अंगों में असामान्यता, लिंग कैंसर, किसी अन्य तरह की बीमारी से प्रभावित लिंग या फिर ऐसे लोगों को इस तकनीक से लाभ हो सकता है जिनके लिंग में तनाव नहीं होता है.”

वैज्ञानिकों का कहना है कि लिंग में तनाव लाने वाले तंतुओं के किसी बीमारी या चोट की वजह से निष्क्रिय हो जाने के बाद उन्हें फिर से बनाना चिकित्सा जगत के लिए एक बड़ी चुनौती है क्योंकि इन तंतुओं की बनावट बहुत ही जटिल होती है.

इस दिशा में अनेक प्रयोग किए जा चुके हैं जिनमें विभिन्न पहलुओं से अध्ययन किए गए हैं लेकिन उनमें कोई ख़ास सफलता नहीं मिल सकी है.

वेक फ़ोरेस्ट यूनिवर्सिटी के इस वैज्ञानिक दल ने लिंग के तनाव तंतुओं को फिर से बनाने की दिशा में उल्लेखनीय सफलता पाई है. इस टीम ने ऐसे मानव मूत्राशय बनाए हैं जिन्हें मरीज़ों में स्थापित भी किया गया है.

इससे पहले किए गए एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने ख़रगोश में ऐसे लिंग तंतु बनाए थे जिनकी कार्यक्षमता 50 प्रतिशत थी.

प्रयोग सफल

वेक फ़ोरेस्ट यूनिवर्सिटी के इस वैज्ञानिक दल ने प्रयोगशाला में लिंग तंतु बनाकर उन्हें तीनमुखी विकसित किया और फिर पशुओं के लिंग में स्थापित किया.

Image caption वैज्ञानिकों का कहना है कि ख़रगोश पर होने वाले प्रयोग अक्सर मानव पर भी सही उतरते हैं

एक महीने बाद इन तंतुओं ने एक महीने के बाद ही अपना रूप लेना शुरू कर दिया था.

लिंग में तनाव के दौरान रक्त संचार सुचारू रूप से रखने का काम सामान्य माँसपेशी वाले तंतु ही करते हैं.

परीक्षणों में पाया गया कि बनाए गए तंतुओं में रक्त संचार का दबाव सामान्य था और लिंग में तनाव ख़त्म होने के बाद ये दबाव सामान्य रूप में हल्का भी हो गया.

जिन ख़रगोशों में ये तंतु लगाए गए थे, जब उन्होंने मादा के साथ यौन संबंध बनाए तो 12 में से आठ मामलों में मादा के शरीर में शुक्राणु पाए गए. 12 में से चार मादा ख़रगोशों को गर्भ भी ठहर गया.

ब्रिटेश एसोसिएशन ऑफ़ यूरोलॉजिकल सर्जन्स के मानद सचिव टिम टैरी ने इस अध्ययन को बहुत ही चौंकाने वाला बताया है.

उन्होंने कहा कि जिन लोगों के लिंग तंतु किसी भी वजह से निष्क्रिय हो जाते हैं, उनके इलाज के लिए जटिल ऑपरेशन ही एक मात्र उपाय नज़र आता है लेकिन इस ताज़ा प्रयोग और अध्ययन से एक विकल्प की उम्मीद नज़र आ रही है.

हालाँकि टिम टैरी ने ये भी कहा कि इस तकनीक का प्रयोग इंसानों पर करने से पहले अभी काफ़ी अध्ययन और प्रयोग करने की आवश्यकता होगी जिसमें कुछ समस्याएँ भी हो सकती हैं.

टिम टैरी ने कहा, “लेकिन इसमें कोई शक नहीं है कि तंतु निर्माण की इस तकनीक में समय के साथ और भी सुधार और प्रगति होगी.”

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