फ़्रांस और ब्राज़ील आए एक साथ

  • 15 नवंबर 2009

फ्रांसीसी राष्ट्रपति निकोला सार्कोज़ी ने घोषणा की है कि अगले महीने जलवायु परिवर्तन पर होने वाले सम्मेलन में फ़्रांस और ब्राज़ील ने समान नीति अपनाने का फ़ैसला किया है.

ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुला डि सिलवा के साथ बातचीत के बाद सार्कोज़ी ने कहा कि वे बाकी देशों को मनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अभियान छेड़ेंगे.

फ़्रांसीसी राष्ट्रपति ने ये भी कहा है कि वे चाहते हैं कि कोपेनहेगन सम्मेलन सफल रहे न कि वो एक कट-प्राइस समझौता बन कर रह जाए.

ब्राज़ील पहले ही घोषणा कर चुका है कि वो कोपेनहेगन कांफ़्रेस में ये पेशकश रखेगा कि वो अपने कार्बन उत्सर्जन को 39 फ़ीसदी तक कम करेगा.

दिसंबर में कोपेनहेगन सम्मेलन होना है और ये बहुत ज़रूरी है कि कार्बन उत्सर्जन को लेकर विकसित और विकासशील देशों के बीच कोई सहमति बन पाए.

इस सिलसिले में अक्तूबर में भी कई देशों के प्रतिनिधियों का सम्मेलन हुआ था जिसमें तीखे मतभेद उभर कर सामने आए थे.

समझौते को लेकर चिंता

संयुक्त राष्ट्र में जलवायु परिवर्तन पर वार्ताओं का नेतृत्व कर रहे अधिकारी भी कह चुके हैं कि कोपेनहेगन में होने वाले सम्मेलन में ऐसी कोई संधि नहीं होने जा रही है जो क़ानूनी रुप से बाध्यकारी हो.

उनका कहना था कि जलवायु परिवर्तन पर एक राजनीतिक सहमति बन सकती है जो अगले कुछ महीनों में क़ानूनी संधि के लिए रास्ता बनाए.

विकासशील देश चाहते हैं कि क्योटो संधि की समयसीमा बढ़ाई जाए. उनका आरोप है कि अमीर देश क्योटो संधि की कड़ी शर्तों से बचना चाहते हैं. जबकि विकसित देशों की माँग है कि क्योटो की जगह एक नई संधि तैयार हो.

नई संधि के स्वरूप को लेकर सबसे ज़्यादा मतभेद हैं. अब तीन विकल्प खुले हुए हैं- बिल्कुल नई संधि तैयार की जाए, क्योटो संधि की सीमा बढ़ाई जाए या फिर कुछ अस्थाई और कामचलाऊ कदम उठा कर काम चलाया जाए.

जब तक विकसित और विकासशील देशों के बीच मतभेद दूर नहीं होते, नई संधि तैयार नहीं की जा सकती.

जहाँ तक बात रही अमरीका की तो वहाँ इस सिलसिले में एक और बाधा है. इस बात की आशंका जताई जा रही है कि गैस उत्सर्जन में कटौती से संबंधित बिल कोपेनहेगन सम्मेलन से पहले अमरीकी सिनेट में पारित नहीं हो पाएगा.

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