सम्मेलन को लेकर उम्मीदें बढ़ीं

पर्यावरण
Image caption भारत सहित कुछ देशों को प्रदूषण फैलाने में अग्रणी कहा जाता है

दिसंबर में होने वाले कोपेनहेगन जलवायु सम्मेलन में साठ से अधिक राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री हिस्सा लेने वाले हैं, और यह पता चलने के बाद इसकी सफलता को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं.

इस बात को लेकर चिंता व्यक्त की जा रही थी कि सम्मेलन में बातचीत के बाद शायद कोई ठोस सहमति न हो पाए. लेकिन पर्यवेक्षकों का कहना है कि इतनी बड़ी तादाद में राष्ट्राध्यक्षों का शामिल होना अपेक्षाएँ बढ़ाता है.

संयुक्त राष्ट्र के वार्षिक जलवायु सम्मेलन में आमतौर पर विभिन्न देशों के पर्यावरण मंत्री हिस्सा लेते हैं.

नई पर्यावरण संधि

इस बार सम्मेलन में 192 देशों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं जो एक ऐसी नई वैश्विक जलवायु संधि बनाए जाने का प्रयास करेंगे जो संयुक्त राष्ट्र की 1997 की क्योटो संधि का स्थान ले सके.

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन भी सम्मेलन में भाग लेने जा रहे हैं. उनका कहना है कि नई संधि तभी संभव है जब राष्ट्राध्यक्ष इस बारे में पूरी गंभीरता से विचार करें.

विश्व में सबसे अधिक प्रदूषण के ज़िम्मेदार तीन देशों-भारत, चीन और अमरीका के नेताओं का अभी हिस्सा लेने वाले प्रतिनिधियों की सूची में नाम नहीं है.

कुछ समय पूर्व संयुक्त राष्ट्र के एक अधिकारी ने कहा था कि अगले महीने जलवायु परिवर्तन पर कोपेनहेगन में होने वाले सम्मेलन में ऐसी कोई संधि नहीं होने जा रही है जो क़ानूनी रुप से बाध्यकारी हो.

हालांकि उनका मानना था कि जलवायु परिवर्तन पर एक राजनीतिक सहमति बन सकती है जो अगले कुछ महीनों में क़ानूनी संधि के लिए रास्ता बनाए.

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