जलवायु सम्मेलन में आएँगे ओबामा

यूरोपीय नेताओं ने अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा के इस बयान का स्वागत किया है जिसमें उन्होंने कहा है कि वे कोपनहेगन जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में हिस्सा लेंगे.

अमरीका ने घोषणा की है कि वो कई चरणों में ग्रीनहाउस गैसों से होने वाला उत्सर्जन कम करेगा और इसकी शुरुआत 2020 तक 17 फ़ीसदी की कटौती से की जाएगी. ये पहला मौका है जब अमरीका ने कोई लक्ष्य निर्धारित किया है.

स्वीडन के पर्यावरण मंत्री आंद्रियास कार्लग्रेन ने कहा है कि ओबामा की उपस्तिथि से उम्मीदें बढ़ेंगी.

हालांकि बीबीसी के मार्क मार्डेल का कहना है कि कई पर्यावरणविदों ने अमरीकी लक्ष्य को निराशाजनक बताया है.

काफ़ी है लक्ष्य?

संयुक्त राष्ट्र में जलवायु परिवर्तन मामलों के प्रमुख यो डे बोयर ने कहा है कि अच्छे नतीजे हासिल करने के लिए ओबामा की मौजूदगी अहम साबित होगी.

बराक ओबामा नौ दिसंबर को सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए आएँगे- यानी सम्मेलन शुरु होने के दो दिन बाद.

लेकिन वे 12 दिन की इस बैठक के अंत तक नहीं रहेंगे. प्रतिनिधियों को उम्मीद है कि बैठक के आख़िरी दिनों में समझौते हो पाएगा.

यूरोप प्रवास के दौरान बराक ओबामा ओसलो भी जाएँगे जहाँ वे अपना नोबोल पुरस्कार प्राप्त करेंगे.

संयुक्त राष्ट्र के इस जलवायु सम्मेलन का लक्ष्य 1997 की क्योटो संधि की जगह एक नई संधि पर सहमति बनाना है. हालांकि पर्यावेक्षकों का कहना है कि इसकी संभावना कम ही हैं.

अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि अमरीका 2005 के स्तर के हिसाब से उत्सर्जन में 2020 तक 17 फ़ीसदी की कमी लाएगा, 2025 तक 30 फ़ीसदी, 2030 तक 42 फ़ीसदी और 2050 तक 83 फ़ीसदी.

हालांकि ज़्यादातर देशों के लक्ष्य 1990 के स्तर के आधार पर तय किए गए हैं. बीबीसी में पर्यावरण मामलों के संवाददाता रिचर्ड ब्लैक का कहना है कि इस बिनाह पर देखा जाए तो अमरीका केवल कुछ फ़ीसदी की ही कटौती कर रहा है क्योंकि 1990 के बाद से उसके उत्सर्जन में 15 फ़ीसदी की बढ़ोत्तरी हो चुकी है.

विकासशील देशों की माँग है कि उत्सर्जन में 25 से 40 फ़ीसदी की कमी आनी चाहिए. यूरोपीय संघ ने 20 फ़ीसदी की कटौती लाने का लक्ष्य रखा है.

स्वीडन के पर्यावरण मंत्री आंद्रियास कार्लग्रेन ने कहा है कि कोपनहेगन में कोई भी संभावित समझौता चीन और अमरीका द्वारा निर्धारित लक्ष्यों के आधार पर हो सकता है या बिगड़ सकता है.

सम्मेलन में 192 देशों के लोग हिस्सा लेंगे. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन, फ़्रांसीसी राष्ट्रपति सार्कोज़ी और ब्राज़ील के राष्ट्रपति कह चुके हैं कि वे इसमें भाग लेंगे.

चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ ने अभी नहीं बताया है कि वे सम्मेलन में आएँगे या नहीं. चीन के बाद अमरीका विश्व का सबसे ज़्यादा प्रदूषण फैलाने वाला देश है.

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