कोपेनहेगन सम्मेलन के प्रमुख किरदार

ईवो डि बूओ
Image caption बूओ कोपेनहेगेन में कार्बन उत्सर्जन में कटौती पर बाध्यकारी समझौते के पक्ष में हैं

कोपेनहेगेन में आज से शुरू जलवायु परिवर्तन सम्मेलन को अब तक का सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन बताया जा रहा है. ये तक कहा जा रहा है कि कोपेनहेगेन में दो हफ़्ते तक चलने वाली बातचीत का जो भी परिणाम निकलेगा, उसका असर न सिर्फ़ मानव सभ्यता, बल्कि पूरी धरती पर पड़ेगा.

इतने महत्वपूर्ण सम्मेलन को सफल बनाने की ज़िम्मेदारी जिन लोगों पर होगी उनमें से प्रमुख हैं-

ईवो डि बूओ

ईवो डि बूओ जलवायु परिवर्तन पर संयुक्तराष्ट्र की संस्था यूएन-एफ़सी-सीसी के कार्यकारी सचिव हैं. बूओ चाहते हैं कि कोपेनहेगेन में एक बाध्यकारी संधि पर सहमति बन जाए. सिर्फ़ इसलिए नहीं कि जलवायु परिवर्तन पर अंतरराष्ट्रीय वार्ताओं और सम्मेलनों का आयोजन उन्हीं की संस्था की अगुआई में होता है, बल्कि इसलिए भी कि वे इस बात पर दिल से यक़ीन करते हैं कि ग्लोबल वार्मिंग में मुख्य योगदान मानवीय क्रिया-कलापों का है.

एड मिलिबैंड

Image caption एड मिलिबैंड कोपेनहेगेन में सहमति कराने के लिए एड़ी-चोटी एक किए हुए हैं

ब्रिटेन के ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन मंत्री एड मिलिबैंड कोपेनहेगेन सम्मेलन को सफल बनाने के लिए पिछले कई महीनों से एड़ी-चोटी का प्रयास किए हुए हैं. मिलिबैंड चाहते हैं कि कोपेनहेगेन में कार्बन उत्सर्जन में कटौती के बारे में ही नहीं, बल्कि ग़रीब देशों को दी जाने वाली मदद के बारे में भी कोई पक्का समझौता हो.

केविन कोनराड

कोपेनहेगेन में जिन वार्ताकारों की आवाज़ ज़्यादा गूँजती मिलेगी उनमें एक हैं- केविन कोनराड. वे मालदीव जैसे 42 छोटे द्वीपीय देशों के समूह का प्रतिनिधित्व करते हैं. बाली जलवायु सम्मेलन के दौरान उन्होंने अमरीका को चुनौती दी थी- ‘यदि तुम किसी कारण दुनिया को नेतृत्व नहीं दे पा रहे हो, तो कृपा कर तुम हमारे रास्ते से हट जाओ!’

जयराम रमेश

Image caption जयराम रमेश ने भारत के लचीले रुख़ की वक़ालत की है

भारत के वन एवं पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश विकासशील देशों पर कोई बाध्यकारी कटौती लक्ष्य थोपे जाने का विरोध करेंगे. उनकी दलील है कि जलवायु संकट मूलत: विकसित देशों का कारनामा है, इसलिए इससे निपटने के प्रयासों में उन्हें बाक़ियों से बहुत ज़्यादा योगदान करना होगा.

जोनाथन पर्शिंग

जोनाथन पर्शिंग कोपेनहेगेन में अमरीका के मुख्य वार्ताकार होंगे. ओबामा प्रशासन में लाए जाने से पहले पर्शिंग पर्यावरण के क्षेत्र में सक्रिय एक संस्था के प्रमुख थे. इसलिए उम्मीद की जा रही है कि वे जलवायु संकट की गंभीरता को देखते हुए अमरीका का लचीला रुख़ प्रस्तुत कर सकेंगे.

इनके अलावा कोपेनहेगेन की वार्ताओं में- ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुला डि सिल्वा की दूत डिलमा रूसेफ़, दक्षिण अफ़्रीकी पर्यावरण मंत्री बुयेलवा सोनयिका, चीन के राष्ट्रपति हू जिन्ताओ के विशेष दूत शियै झेनउआ, ब्रिटेन की मुख्य वार्ताकार जैन थॉम्प्सन, जलवायु परिवर्तन पर भारतीय प्रधानमंत्री के विशेष दूत श्याम सरन, ऑस्ट्रेलिया की जलवायु परिवर्तन मंत्री पेनी वोन्ग और डेनामार्क की जलवायु परिवर्तन सम्मेलन मंत्री कोनी हेदगोर की भी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका होगी.

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