'जलवायु इतिहास लिखें मगर सही'

कोपनहैगन जलवायु सम्मेलन 2009

संयुक्त राष्ट्र के जलवायु परिवर्तन प्रमुख ईवो डीह बुअर ने कहा है कि कोपेनहेगन सम्मेलन के ज़रिए इतिहास लिखा जाएगा लेकिन उन्होंने आगाह भी किया कि जो भी इतिहास लिखा जाए, उसका ठीक होना ज़रूरी है.

उन्होंने जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले प्रतिनिधियों से ऐतिहासिक समझौते का आह्नान किया.

उनका कहना था कि देशों को दुनिया भर में बढ़ रहे तापमान की चुनौती का सामना करने के लिए ग्रीन हाउस समूह की गैसों का उत्सर्जन कम करने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित करने होंगे.

192 देशों के लगभग 15 हज़ार प्रतिनिधि एक पखवाड़ा चलने वाले कोपेनहेगन सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन पर कोई नया समझौता करने की कोशिश करेंगे.

डेनमार्क के प्रधानमंत्री लार्स लोअग़ रास मूस्सेन ने सम्मेलन के उदघाटन अवसर पर कहा कि समझौता संभावना के दायरे में है और सारी दुनिया पूरी मानवता की हिफ़ाज़त सुनिश्चित करने के लिए इस सम्मेलन की तरफ़ देख रही है.

संयुक्त राष्ट्र के जलवायु परिवर्तन पर अंतरराष्ट्रीय पैनल के मुखिया डॉक्टर राजेंद्र पचौरी ने कहा है कि अगर इस सम्मेलन में विश्व नेता कोई समझौता करने में नाकाम रहते हैं तो उसके बहुत गंभीर परिणाम होंगे.

बीबीसी के पर्यावरण मामलों के संवाददाता का कहना है कि अमरीका, भारत और चीन ने ग्रीन हाउस समूह की गैसों को कम करने के जो नए संकल्प व्यक्त किए हैं उनसे ऐसी उम्मीदें बढ़ी हैं कि सम्मेलन में कोई समझौता अवश्य ही हो जाएगा.

कौन ख़र्च उठाए

इस बीच अफ्रीकी संघ ने कहा है कि औद्योगिक देशों को साफ़-सुथरी अर्थव्यवस्थाओं के रास्ते पर चलने में ग़रीब देशों की मदद करनी चाहिए और इसका ख़र्च औद्योगिक देश ही उठाएँ.

Image caption डेनमार्क के प्रधानमंत्री लार्स लोअग़ रास मूस्सेन ने कहा कि सारी दुनिया इस सम्मेलन की तरफ़ देख रही है.

अफ्रीकी संघ के अध्यक्ष जीं पिंग ने कहा है कि अगर अफ्रीकी संघ की माँग नहीं मानी गई तो वो कोपेनहेगन सम्मेलन से वॉकआउट कर देंगे.

उधर विकासशील देशों के संगठन जी-77 के प्रतिनिधि लुमुम्बा स्टेनिसलास काव दी एपिंग ने कहा है कि विकसित देशों की राष्ट्रीय संपदा का कम से कम एक प्रतिशत हिस्सा ग़रीब देशों की मदद पर ख़र्च होना चाहिए.

सम्मेलन की अध्यक्ष कोन्नी हैडगार्ड ने कहा है कि कोपेनहेगन सम्मेलन में कोई समझौता होने के लिए महत्वपूर्ण है कि ग़रीब देशों के लिए सरकारी और निजी मदद का रास्ता बनाया जाए जिससे ग़रीब देश जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सामना कर सकें.

उन्होंने कहा कि अगर तमाम देश कोपेनहेगन सम्मेलन में उत्पन्न हुए अवसर का लाभ नहीं उठा सके तो हो सकता है कि ऐसा मौक़ा फिर से हाथ ही न लगे.

कितना ख़तरा

इस बीच अमरीका में एक सरकारी एजेंसी यह घोषणा करने जा रही है कि ग्रीन हाउस समूह की गैस मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए कितना बड़ा ख़तरा पैदा करती हैं.

इस घोषणा के बाद यह संभव हो सकता है कि ग्रीन हाउस समूह की गैसों के उत्सर्जन नियमित करने के लिए कांग्रेस की अनुमति लेना अनिवार्य नहीं होगा.

पर्यावरण संरक्षण एजेंसी ग्रीन हाउस समूह की गैसों के ख़तरों पर काम करती है.

कार्बन डाई ऑक्साइड और ग्रीन हाउस समूह की अन्य गैसों के उत्सर्जन की सीमा को सीमित करने के लिए अगर कांग्रेस कोई उपयुक्त क़ानून नहीं बना पाती है तो यह एजेंसी कुछ बाध्यकारी नियमों की घोषणा कर सकती है.

जलवायु विधेयक को प्रतिनिधि सभा में जून, 2009 में पारित कर दिया गया था लेकिन उच्च सदन सीनेट में इस क़ानून को पारित करने में देरी हो रही है.

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