जलवायु सम्मेलन पर आरोप-प्रत्यारोप

  • 22 दिसंबर 2009
Image caption कोपेनहेगन सम्मेलन के नतीजे पर ब्रिटेन ने असंतोष जताया

चीन ने ब्रिटेन के इन आरोपों का खंडन किया है कि उसने संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन को अगवा कर लिया था.

चीन का कहना है कि ये आरोप निराधार हैं और राजनीति से प्रेरित हैं.

इसके पहले ब्रिटेन के पर्यावरण मंत्री एड मिलीबैंड ने कहा था कि चीन ने ग्रीन हाउस गैसों की कटौती के प्रस्ताव को वीटो कर दिया था.

उनका कहना था कि इस पर लगभग सभी देशों की सहमति थी.

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन ने भी कहा था कि मुट्ठी भर देशों ने अपने रवैये से कोपेनहेगन सम्मेलन को अगवा कर लिया और दोबारा ऐसा नहीं होना चाहिए.

गॉर्डन ब्राउन ने कहा था कि जिस तरह पूरी बातचीत हुई उससे सबक सीखने की ज़रूरत है और वे समझौते के लिए कोशिश करते रहेंगे.

दरअसल यूरोपीय देशों को उम्मीद थी कि अमरीका और चीन बातचीत के दौरान कुछ और रियायतें देंगे और लचीला रुख़ अपनाएंगे, लेकिन ऐसा हुआ नहीं.

चीन की दलील

चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ का तर्क था कि विश्व में सबसे ज़्यादा ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन अमरीका करता है, इसलिए अमरीका को ज़्यादा कटौती करनी चाहिए और ऊर्जा के बेहतर स्रोत्रों के लिए ग़रीब देशों को और पैसा देना चाहिए.

कुछ अन्य देशों ने भी चीन पर आरोप लगाया है कि 2050 तक दुनिया के उत्सर्जन में 50 फ़ीसदी की कटौती का लक्ष्य तय करने में चीन ने बाधा डाली.

लेकिन चीन का कहना है कि ऐसा करने से विकासशील देशों पर एक सीमा लग जाएगी जो सही नहीं होगी बशर्ते कि अमीर देश उन्हें ऊर्जा के बेहतर स्रोत विकसित करने के लिए अधिक पैसे दें.

अभी इसके लिए हर साल 100 अरब डॉलर से कुछ कम की राशि देने की पेशकश की गई है.

कुछ विश्लेषकों का मानना है कि ये पेशकश इतनी कम थी कि इससे अच्छा तो होता कि वार्ता टूट जाती.

इधर जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल जल्द ही एक और जलवायु सम्मेलन बुलाने की कोशिश में जुटी हैं जबकि अगले साल संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन मेक्सिको में होगा.

इस दौरान बड़े देशों की कोशिश रहेगी कि कुछ देशों को वे विशेष मित्र देशों के तौर पर वार्ता में शामिल करें ताकि बातचीत के लिए मसौदा तैयार करने में वैसी फ़ज़ीहत न हो जैसी कोपनहेगन में हुई.

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार