आकार में है सफलता की कुंजी

  • 21 जनवरी 2010
मस्तिष्क
Image caption शोध में मस्तिष्क के कुछ हिस्सों के आकार पर अध्ययन हुआ है

अगर वीडियो गेम खेलते समय आपको अच्छी ख़ासी मशक्कत करनी पड़ती है, तो इसका संबंध आपके मस्तिष्क के कुछ हिस्सों के आकार से हो सकता है.

ये कहना है एक शोध का. अमरीकी शोधकर्ताओं का दावा है कि वे मस्तिष्क के कुछ अहम हिस्सों का आकार माप कर ये आकलन कर सकते हैं कि कोई व्यक्ति वीडियो गेम खेलते समय कैसा प्रदर्शन कर सकता है.

सेरेब्रल कोरटेक्स पत्रिका में इन शोधकर्ताओं ने लिखा है कि उनकी खोज से सीखने की क्षमता में अंतर के अध्ययन पर व्यापक असर पड़ सकता है.वैसे प्रतिभा और मस्तिष्क के आकार के बीच संबंध की बात पर मोटे तौर पर सहमति है. इसके बावजूद यह एक जटिल मसला है.

अगर जानवरों की दुनिया में जाएँ, तो छोटे दिमाग़ वाले जानवर कई मामलों में अपने से बड़े दिमाग़ वाले जानवरों से तेज़-तर्रार लगते हैं.

इस मामले में बंदर और घोड़े का उदाहरण दिया जाता है. इसी तरह एक मनुष्य और हाथी की प्रतिभा की तुलना भी उसके दिमाग़ के आकार पर नहीं हो सकती.

अंतर

लेकिन बात अब मस्तिष्क के कुछ ख़ास हिस्सों की हो रही है, जो अपेक्षाकृत बड़ा हो सकता है. और शायद ये किसी व्यक्ति विशेष या नस्ल विशेष में समझदारी के अंतर को बयां कर सकता है.

यूनिवर्सिटी ऑफ़ इलिनॉय, यूनिवर्सिटी ऑफ़ पिट्सबर्ग और मासाच्यूसेट्स इंस्टिच्यूट ऑफ़ टेक्नॉलॉजी ने ऐसे 39 वयस्कों को चुना, जिन्होंने पिछले दो वर्षों के दौरान एक हफ़्ते में वीडियो गेम खेलने में तीन घंटे से भी कम का समय लगाया.

इन वयस्कों में 10 पुरुष और 29 महिलाएँ थीं. इन लोगों को विशेष रूप से बनाए गए दो वीडियो गेम में से एक को खेलना था.

एक वीडियो गेम में उन्हें एकमात्र गोल करने में ध्यान लगाना था, तो दूसरे गेम में उन्हें लगातार अपनी प्राथमिकताएँ बदलनी थी.

एमआरआई स्कैन से पता चला कि जिन लोगों के मस्तिष्क का मध्यभाग बड़ा था, उन्होंने बाक़ी प्रतियोगियों को कुछ घंटे के अंदर ही मात दे दी.

अध्ययन

लगातार प्राथमिकताएँ बदलने वाले वीडियो गेम में जिन लोगों ने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया, उनमें ये पाया गया कि उनके मस्तिष्क का लंबा हिस्सा उसके केंद्रीय भाग में गहराई तक था. इन्हें कौडेट और पुटामेन कहा जाता है.

यूनिवर्सिटी ऑफ़ इलिनॉय के प्रोफ़ेसर आर्थर क्रेमर का कहना है कि मस्तिष्क का ये हिस्सा सीखने की प्रक्रिया और नए माहौल में ढलने से जुड़ा हुआ है.

प्रोफ़ेसर आर्थर क्रेमर कहते हैं- ऐसे लोग एक साथ कई काम कर सकते हैं. जैसे गाड़ी चलाते समय वे सड़क पर देख सकते हैं, अपने जीपीएस का भी इस्तेमाल कर सकते हैं और यात्रियों से भी बात कर सकते हैं.

इस शोध में पारंपरिक जाँच पद्धति के बजाए वीडियो गेम के इस्तेमाल के बारे में उन्होंने बताया कि इससे व्यक्ति वास्तविक दुनिया और चुनौतियों के और क़रीब आ जाता है.

इस शोध से टीम ने यह आकलन किया कि प्रदर्शन में अंतर का एक चौथाई हिस्सा मस्तिष्क के आकार के माप से बताया जा सकता है.

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