दवा कंपनियों का दबाव नहीं: डब्ल्यूएचओ

स्वाइन फ़्लू
Image caption स्वाइन फ़्लू को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कई चेतावनियाँ जारी की थीं

स्वाइन फ़्लू महामारी से निपटने के तौर तरीक़ों पर यूरोपीय काउंसिल की आशंकाओं के जवाब में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने अपनी रणनीति का बचाव किया है.

जून में जब स्वाइन फ़्लू महामारी घोषित हुई तो दुनिया के तमाम देश भारी तादाद में टीके की खरीद में जुट गए लेकिन वायरस उतना ख़तरनाक और मज़बूत नही निकला जैसा सोचा गया था.

यूरोप के स्वास्थ्य समितियों के संघ की बैठक में दवा कंपनियों से विश्व स्वास्थ्य संगठन के संबंधों को लेकर सवाल उठाए गए हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के फ़्लू विशेषज्ञों ने इस बात का खंडन किया है कि दवा कंपनियों का विश्व स्वास्थ्य संगठन पर कोई अनुचित दबाव था.

यूरोपीय काउंसिल की स्वास्थ्य समिति ने विश्व स्वास्थ्य संगठन और दवा कंपनियों के बीच सांठगांठ को लेकर उठे सवालों की सुनवाई की.

राजनेताओं और मीडिया ने साठगाँठ के सवाल उठाए थे.

सुनवाई के दौरान डब्ल्यूएचओ की ओर से स्वाइन फ़्लू विशेषज्ञ कीजी फ़ुकुडा ने कहा कि फ़्लू को लेकर डब्ल्यूएचओ की रणनीति और उससे निपटने के लिए जो क़दम उठाए गए उसमें दवा कंपनियों का कोई अनुचित प्रभाव नहीं था.

पूरे विश्व में चौदह हजार से भी ज्यादा लोग स्वाइन फ्लू के शिकार हो चुके हैं और लाखों प्रभावित हैं कहीं-कहीं पर तो ये एक मामूली मौसमी बुखार भी साबित हुआ है.

डॉ. फुकुडा ने मौसमी बुखार और स्वाइन फ्लू के बीच तुलना को ख़ारिज कर दिया और इसे संतरे की तुलना सेब से करने जैसा बताया.

उन्होंने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन अपने विशेषज्ञों के साथ-साथ निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों के साथ मिलकर काम करता है और यहां निजी हितों की रक्षा नहीं की जाती.

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