मज़बूत है जलवायु परिवर्तन विज्ञान

राजेंद्र पचौरी
Image caption राजेंद्र पचौरी के त्यागपत्र की भी मांग हुई है

संयुक्त राष्ट्र के जलवायु परिवर्तन पैनल (आईपीसीसी) के चेयरमैन डॉक्टर राजेंद्र पचौरी ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि हाल की कई गंभीर ग़लतियों के बावजूद जलवायु परिवर्तन विज्ञान अपनी जगह मज़बूती से क़ायम है.

राजेंद्र पचौरी ने बीबीसी के साथ बातचीत में कहा कि बड़ी मात्रा में सबूत मौजूद हैं, जो इस विज्ञान को प्रमाणित करते हैं.

उन्होंने कहा कि हाल की आईपीसीसी की रिपोर्ट में सिर्फ़ एक गंभीर ग़लती है और वो है हिमालय के ग्लेशियर पिघलने की गति.

दिल्ली में जलवायु परिवर्तन पर आयोजित एक सम्मेलन में उन्होंने कहा कि इस ग़लती को सार्वजनिक रूप से ठीक किया गया है.

'झूठ'

राजेंद्र पचौरी ने कहा कि ब्रितानी अख़बारों में उनके और आईपीसीसी के काम के बारे में झूठ प्रकाशित किए जा रहे हैं.

जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र के राजदूत इयो डे बोअर ने भी आईपीसीसी का बचाव किया और कहा कि इसका काम मज़बूत है.

उन्होंने कहा कि कोपेनहेगन सम्मेलन में व्यापक समझौते में नाकामी के बाद यह संयुक्त राष्ट्र की वार्ता की प्रक्रिया के लिए नए साल की ख़राब शुरुआत है.

बीबीसी संवाददाता क्रिस मॉरिस का कहना है कि उम्मीद ये जताई रही है कि इस साल मैक्सिको सिटी में जलवायु परिवर्तन पर होने वाली बातचीत में कोई समझौता हो पाएगा.

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