हकलेपन के लिए जीन ज़िम्मेदार

गुणसूत्र
Image caption गुणसूत्रों की पहचान से हकलेपन के इलाज में मदद मिल सकती है.

कई परिवारों में हकलाने की समस्या आम है लेकिन अब वैज्ञानिकों ने इसके लिए ज़िम्मेदार तीन गुणसूत्रों की पहचान कर ली है.

वैज्ञानिकों का मानना है कि इन गुणसूत्रों में कोई भी बदलाव समस्याएं उत्पन्न करता है और ये समस्याएं दिमाग के कई हिस्सों को भी प्रभावित कर सकती है.

इससे जुड़े शोध पाकिस्तान, अमरीका और इंग्लैंड में किए गए हैं और यह शोध न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसीन में प्रकाशित हुआ है.

पूरी दुनिया के क़रीब एक प्रतिशत लोग हकलेपन के शिकार हैं.

हकले लोग किसी शब्द या अक्षर को बोलने में दिक्कत महसूस करते हैं जिससे उनकी भाषा का प्रवाह प्रभावित होता है.

बच्चों में इस समस्या का जल्दी पता लगने पर इसे ठीक किया जा सकता है जबकि बड़ों में सांस से जुड़े कुछ व्यायाम के ज़रिए इसे ठीक किया जाता है.

जिन हकले लोगों पर परीक्षण किए गए उनमें पाया गया कि तीन गुणसूत्रों में किसी न किसी में बदलवा ज़रुर था.

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑन डीफ़नेस एंड अदर कम्युनिकेशन डिसॉर्डर्स (एनआईडीसीडी) की जिस टीम ने इन गुणसूत्रों की खोज की है उनका मानना है कि इसे कई और बीमारियों के इलाज में मदद मिलेगी.

इन तीन में से दो गुणसूत्रों जीएनपीटीएबी और जीएनपीटीजी का संबंध कुछ समस्याओं से पाया गया है.

एनआईडीसीडी के प्रमुख जेम्स बैटी का कहना है कि सैकड़ों वर्षों से हकलेपन की समस्या शोधकर्ताओं के लिए अजूबे की तरह रहा है लेकिन इन गुणसूत्रों की पहचान के बाद इसके इलाज में बड़े बदलाव आ सकते हैं.

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